250 रुपए से 3,000 रुपए तक होगा बुलेट ट्रेन का किराया, सिर्फ 40 सेकेंड होगी लेट: NHRCL

नई दिल्ली। मुंबई और अहमदाबाद के बीच प्रस्तावित बुलेट ट्रेन के यात्रियों को अपने गंतव्य के आधार पर 250 रुपये से 3,000 रुपये के बीच का भुगतान करना होगा। सरकार की महत्वाकांक्षी परियोजना में संभावित किरायों के पहले आधिकारिक संकेत देते हुए, राष्ट्रीय हाई स्पीड रेल कॉर्पोरेशन लिमिटेड (NHRCL) के प्रबंध निदेशक अचल खरे ने संवाददाताओं से कहा कि किराया वर्तमान अनुमानों और गणनाओं पर आधारित है। मुंबई और अहमदाबाद के बीच 3,000 रुपये और बांदा कुर्ला कॉम्प्लेक्स (बीकेसी) और ठाणे के बीच 250 रुपए के करीब होगा। खरे ने कहा, 'किराया वर्तमान अनुमानों और गणनाओं पर आधारित है। एक बिजनेस क्लास होगा और इसके किराए 3,000 रुपये से अधिक होने की संभावना है।'

15 मिनट और 250 रुपये तक किराया

15 मिनट और 250 रुपये तक किराया

उन्होंने कहा, 'अगर हवाई अड्डे की यात्रा में बोर्डिंग पास और सुरक्षा जांच को ध्यान में रखा जाए तो यात्रा अधिक सस्ती और एक उड़ान से कम समय लेने वाली होगी।' अधिकारी ने कहा कि, ठाणे और बांदा कुर्ला कॉम्प्लेक्स के बीच टैक्सी से यात्रा करने के लिए डेढ़ घंटे और करीब 650 रुपये का खर्च होता है। लेकिन हाई स्पीड ट्रेन के साथ, यात्रा का समय केवल 15 मिनट और 250 रुपये तक किराया होगा। उन्होंने कहा, किराया एसी प्रथम श्रेणी के किराए से 1.5 गुना अधिक होगा।

10 'मानक' कोच होंगे

10 'मानक' कोच होंगे

खरे ने कहा कि एक ट्रेन सेट में 10 'मानक' कोच होंगे, जिनमें से एक बिजनेस क्लास होगा। खरे ने कहा कि इस परियोजना के तहत निर्माण कार्य इस साल दिसंबर तक शुरू हो सकता है, इस समय तक भूमि अधिग्रहण खत्म होने की उम्मीद है। मंत्रालय को इस परियोजना के लिए 1,415 हेक्टेयर भूमि की आवश्यकता होगी और इसके अधिग्रहण के लिए 10,000 करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया है। 'महाराष्ट्र सरकार ने पहले ही भूमि अधिग्रहण के लिए अधिसूचना जारी कर दी है और जो लोग अपनी जमीन के अधिग्रहण के लिए सहमति देते हैं, उन्हें राज्य सरकार या बाजार दर, जो भी ज्यादा होगा दोनों में से कोई एक दी जाएगी।

भारत की हिस्सेदारी ज्यादा

भारत की हिस्सेदारी ज्यादा

अधिकारी ने यह भी कहा कि 3,000-4,000 लोगों को प्रत्यक्ष रूप से प्राधिकरण द्वारा नौकरी दी जाएगी जबकि परियोजना के निर्माण चरण के दौरान करीब 30,000-40,000 श्रमिक लगेंगे। परियोजना में जापान की बड़ी भागीदारी की खबरों को खारिज करते हुए खरे ने कहा कि उनकी कुल भागीदारी केवल 18.6 फीसदी है। उनका योगदान परियोजना के कुछ हिस्सों तक सीमित होगा, जिसमें अहमदाबाद और वडोदरा के बीच गलियारा और समुद्र के नीचे सुरंग का काम शामिल है।

भारतीय ठेकेदार ने 460 किलोमीटर का निर्माण करेंगे

भारतीय ठेकेदार ने 460 किलोमीटर का निर्माण करेंगे

उन्होंने कहा कि भारतीय ठेकेदार ने 460 किलोमीटर का निर्माण करेंगे, जबकि जापान समुद्र के नीचे केवल 21 किलोमीटर के निर्माण में शामिल होगा। सुरक्षा और पाबंदी हाई-स्पीड कॉरीडोर की पहचान होगी। जापान की उच्च गति बुलेट ट्रेनों की सुरक्षा और समय की पाबंदी के लिए भी जाना जाता है।

360 लोगों को प्रशिक्षित करने के लिए जापान भेजा जाएगा

360 लोगों को प्रशिक्षित करने के लिए जापान भेजा जाएगा

खरे ने कहा कि भारत के 360 लोगों को प्रशिक्षित करने के लिए जापान भेजा जाएगा, जिनमें से 80 को नौकरी दी जाएगी। करीब 80 जापानी नागरिक पहले ही भारतीय अधिकारियों के साथ काम कर रहे हैं, उन्होंने कहा, 'जहां तक बुलेट ट्रेन की देरी का सवाल है, यह 40 सेकंड से ज्यादा नहीं होगा। प्रस्तावित बुलेट ट्रेन लगभग 320 किमी प्रति घंटे की रफ्तार से चलेगी जिसके 2022 तक चलने की उम्मीद है।

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