Coronavirus फैलाने का कलंक झेल रहा ये परिवार, रिश्तेदारों ने दिया था अस्पताल से जिंदा नहीं लौटने का श्राप
नई दिल्ली। कोरोना वायरस से दुनियाभर में करोड़ों लोग लॉकडाउन के चलते अपने घरों में बंद है। भारत में महामारी के प्रकोप को देखते हुए केंद्र सरकार ने देशव्यापी लॉकडाउन को 3 मई तक के लिए बढ़ा दिया है। खुद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने लोगों से हाथ जोड़कर घरों में अपील की थी। देश में कोरोना वायरस के अधिक मामले मार्च के शुरुआत में आए जिसके बाद सरकार ने लोगों को सामाजिक दूरी का पालन करने की अपली की लेकिन कई लोगों ने इस पर भी ध्यान नहीं दिया।

केरल के एनआरआई परिवार ने दिया ये मैसेज
इटली से आए केरल के नॉन रेजिडेंट इंडियन (एनआरआई) परिवार ने भी नियमों को अनदेखा करते हुए पारिवारिक कार्यक्रमों में हिस्सा लिया, लेकिन उनके साथ जो हुआ उसके बाद अब वह दूसरों से लॉकडाउन का पालन करने की अपील कर रहे हैं। इटली में रहने वाला यह परिवार तीन सप्ताह की छुट्टी पर 29 फरवरी को केरल के गांव रान्नी में अपने घर आया था। केरल पहुंचने के एक हफ्ते बाद उन्हें पता चला कि वह कोरोना पॉजिटिव हैं।

पारिवारिक उत्सवों में लिया था भाग
कोरोना का टेस्ट कराने से पहले वह कई पारिवारिक उत्सवों में भी सम्मिलित हुए थे। इटली में काम करने वाले परिवार के सदस्य 26 वर्षीय रिजो मॉन्सी ने कहा, हमने बहुत बड़ी गलती की, यह अज्ञानता और नियमों को नजरअंदाज करने से हुआ। उन्होंने कहा, जब से पता चला है कि हमें कोरोना है, हमारे परिवार के अन्य सदस्यों ने हमसे नाता तोड़ लिया। कई ने हमें श्राप दिया कि हम अस्पताल से जिंदा नहीं आएंगे।

94 वर्षीय दादा-दादी समेत सभी संक्रमित
मॉन्सी ने बताया कि मध्य केरल के पहाड़ी जिले पठानमथिट्टा में हमें 'सुपर स्प्रेडर' करार दिया गया, हमारे कोरोना पॉजिटिव मिलने पर उस क्षेत्र को कोविद -19 हॉटस्पॉट घोषित कर दिया गया था। इसके अलावा कतर से उनके साथ यात्रा करने वाले 182 यात्रियों को भी क्वारंटाइन कर दिया गया। मॉन्सी ने बताया कि उनके 94 वर्षीय दादा और 88 वर्षीय दादी में भी कोरोना पॉजिटिव पाया गया था।

बदनामी के डर से घरों ने निकलना छोड़ा
रिजो मॉन्सी ने बताया कि जब उनके पिता को दादा-दादी के संक्रमित होने की बाद पता चली तो वह पूरी तरह टूट चुके थे, बदनामी के डर से घर से बाहर निकलना छोड़ दिया था। कोर्सी मेडिकल कॉलेज अस्पताल में आईसोलेशल के दौरान मॉन्सी ने कहा, अधिक कलंक और अपराध ने उन्हें घायल कर रहा है।

सोशल मीडिया पर झेलनी पड़ी आलोचना
मॉन्सी ने कहा, उनके परिवार को समाज से बहिष्कृत किया गया और सोशल मीडिया पर भी ट्रोल किया गया। मुझे अपने मोबाइल का उपयोग करने की अनुमति दी गई थी लेकिन मैंने दुनिया के अन्य हिस्सों से आलोचना और बुरी खबरों से बचने के लिए सोशल मीडिया को छोड़ दिया, जिससे मैं परेशान रहने लगा था। एक समय पर मुझे लगा कि इन सब से बाहर आना मुश्किल है। परिवार ने अस्पताल में 25 दिन बिताए।
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