FACT CHECK: जामिया का स्टूडेंट नहीं है बुर्कानशीं पत्थरबाज पुरुष, जानिए वायरल तस्वीर का सच
नई दिल्ली। नागरिकता संशोधन कानून को लेकर देश के कई हिस्सों में विरोध प्रदर्शन हुए लेकिन जामिया मिल्लिया इस्लामिया में सबसे ज्यादा बवाल हुआ। जमकर पत्थरबाजी हुई और कई वाहनों को आग के हवाले कर दिया गया। जामिया के प्रदर्शन के कई वीडियो और फोटो सोशल मीडिया पर वायरल हो रहे हैं। किसी वीडियो में पुलिस की बर्बरता दिखाई जा रही है तो किसी भी छात्रों का उग्र रूप। इन सबके अलावा कुछ तस्वीरें ऐसी भी वायरल हो रही हैं जो हिंसा को बढावा देने वाली हैं। ऐसी एक तस्वीर है बुर्का पहने पुरुष की। इस तस्वीर को लेकर दावा किया जा रहा है वो जामिया का स्टूडेंट हैं और महिलाओं के भेष में पत्थरबाजी करते पकड़ा गया है। इस फोटो को लेकर जब सच्चाई जानने की कोशिश (Fact Check) की गई तो मामला कुछ और ही निकला। इस Fact Check से पहले वनइंडिया आपसे अपील करता है कि सोशल मीडिया पर फैलाई जा रही किसी भी अफवाह पर ध्यान न दें और न ही उसे शेयर या फॉवर्ड करें।

जामिया से कोई लेनादेना नहीं, काहिरा का है फोटो में दिखने वाला पुरुष
फोटो की सच्चाई जानने के लिए की गई पड़ताल यह दावा झूठा निकला है जिसमें महिला के भेष में इस पुरुष वाले फोटो को जामिया का छात्र बताया जा रहा है। जो बात सामने आई है उसके मुताबिक फोटो में नजर आ रहा पुरुष मिस्र की राजधानी काहिरा का है और इसका जामिया से कोई संबंध नहीं। इस पुरुष को महिलाओं का भेष बनाकर मॉल्स से बच्चों का अपहरण करने के अपराध में गिरफ्तार किया गया था।
साल 2017 का है ये फोटो
यह मामला दो साल पुराना है। गूगल रिवर्स सर्चिंग में पता चला कि यह फोटो 2017 से ही वायरल है। अरबी समाचार वेबसाइट्स के मुताबिक, राहवासियों की शंका के आधार पर इस व्यक्ति को पकड़ा गया था। पूछताछ में पता चला कि, शख्स महिलाओं के भेष में बच्चों को चुराने का काम करता था।

क्या था पूरा मामला
प्रदर्शनकारियों का रविवार को पुलिस के साथ संघर्ष हो गया और उन्होंने दक्षिण पूर्व दिल्ली के न्यू फ्रेंड्स कॉलोनी में डीटीसी की कई बसों और एक अग्निशमन गाड़ी में आग लगा दी। पुलिस ने बताया कि इस हिंसक प्रदर्शन में एक सिपाही और दो दमकलकर्मी जख्मी हो गए। घायल सिपाही के सिर में गंभीर चोट है और फिलहाल वह आईसीयू में भर्ती है। हालांकि, जामिया मिल्लिया छात्रों के समूह ने बयान जारी कर नागरिकता अधिनियम के खिलाफ प्रदर्शन के दौरान हुई हिंसा से खुद को अलग किया।












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