ट्रंप के कार्यकाल खत्म होने के पहले दी गई मौत की सजा, 130 साल की परंपरा टूटी
वाशिंगटन। अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट से अंतिम समय में क्षमा याचिका खारिज होने के बाद मौत की सज़ा पाए ब्रैंडन बर्नार्ड की सजा पर इंडियाना में अमल किया गया है। 40 वर्षीय बर्नार्ड को 1999 में हत्या का दोषी ठहराया गया था। उस समय वह एक किशोर था। बर्नार्ड पिछले 70 वर्षों में सबसे कम उम्र के अपराधी हैं जिन्हें मौत की सजा दी गई है।

जहर का इंजेक्शन दी गई मौत की सजा
बर्नार्ड को जहर का इंजेक्शन देकर मौत की सजा दी गई। इंजेक्शन दिए जाने के लिए पहले बर्नार्ड ने पीड़ित के परिजनों से कहा कि वह अपने किए पर दुखी है।
बता दें कि राष्ट्रपति ट्रंप का कार्यकाल खत्म होने से पहले चार और मौत की सजा के मामलों पर अमल किया जाना है। अगर इन पांचों मौत के सजा के मामलों पर अमल किया जाता है तो ट्रंप पिछली सदी के पहले ऐसे राष्ट्रपति होंगे जिसके कार्यकाल में मौत की इतनी सजा दी गई है। इसे मिलाकर जुलाई से लेकर अब तक 13 मौत की सजा के मामले हो चुके हैं।
डोनाल्ड ट्रंप ने राष्ट्रपति के सत्ता स्थानांतरण के दौरान मौत की सजा न देने की 130 साल पुरानी परंपरा को तोड़ दिया है। डोनाल्ड ट्रंप को नव निर्वाचित राष्ट्रपति जो बाइडेन को 20 जनवरी को सत्ता हस्तातंरित करनी है जिसके लिए प्रक्रिया शुरू हो गई है।
सजा देने में दो घंटे की देरी
बर्नार्ड को स्थानीय समय के अनुसार 9 बजकर 27 मिनट पर मृत घोषित किया गया। उनके वकील ने आखिरी समय में सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर की थी जिसके चलते अधिकारियों को उनकी मौत की सजा को अमल में लाने के लिए दो घंटे की देरी हुई।
जहरीली सुई देने से पहले बर्नार्ड को पीड़ित परिवार के लिए अपनी आखिरी बात रखने का मौका दिया गया। उन्होंने कहा मुझे दुख है। सिर्फ यही एक शब्द है जो मैं कह सकता हूं कि मैं कैसा आज महसूस कर रहा हूं और कैसा उस दिन महसूस कर रहा था।
1999 में की थी युगल की हत्या
बर्नार्ड को जून 1999 में टॉड और स्टेसी बैग्ली की हत्या में शामिल होने का दोषी पाया गया था। बर्नार्ड उन पांच किशोरों में थे जिन पर इस जोड़े को लूटने और टेक्सास में अपनी कार के बूट में जबरन रखने का आरोप लगाया था। बाद में बर्नार्ड ने कार को जला दिया था। जांच में पाया गया था कि कार को जलाने के पहले उनके एक साथ क्रिस्टोफर वायलवा ने उन्हें गोली भी मारी थी।
बचाव पक्ष के वकीलों ने कहा था कि दोनों की मौत कार में आग लगने से पहले ही हो गई थी। उन्होंने एक प्राइवेट इनवेस्टिगेटर भी किया था जिसने ये बताया कि स्टेसी मेडिकली डेथ घोषित हो चुकी है।
परीक्षण के दौरान सरकारी बयान में बताया कि हालांकि टॉड बागले की तुरंत मृत्यु हो गई थी। जबकि स्टैसी की सांस नली में कालिख मिली थी, जिससे ये पता चलता है कि उनकी मौत धुएं के चलते दम घुटने से हुई है। बर्नार्ड के वकील ने कहा कि उसने ये सब इसलिए किया क्योंकि उसे क्रस्टोफर वायलवा का डर था। क्रिस्टोफर को सितम्बर में मौत की सजा सुनाई गई थी।












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