अब जन्म प्रमाण पत्र के लिए भागदौड़ नहीं! अस्पताल में छुट्टी से पहले ही मिलेगा सर्टिफिकेट, सरकार ने दिए निर्देश
भारत के रजिस्ट्रार जनरल (Registrar General of India) ने सभी राज्यों को निर्देश दिया है कि नवजात शिशु के जन्म के बाद मां को अस्पताल से छुट्टी देने से पहले ही जन्म प्रमाण पत्र (Birth Certificate) सौंपा जाए, खासकर सरकारी अस्पतालों में। देश के 50% से ज्यादा संस्थागत प्रसव इन्हीं अस्पतालों में होते हैं।
RGI कार्यालय ने साफ किया कि जन्म का रजिस्ट्रेशन जैसे ही पूरा हो, सात दिनों के भीतर डिजिटल या किसी अन्य फॉर्मेट में सर्टिफिकेट जारी कर दिया जाए। RGI ने यह निर्देश 12 जून 2025 को एक पत्र के जरिए भेजा।

इसके लिए सिविल रजिस्ट्रेशन सिस्टम (CRS) को पहले से ज्यादा सक्षम बनाया गया है। जन्म प्रमाण पत्र की बढ़ती उपयोगिता को देखते हुए यह प्रक्रिया और तेज करने की जरूरत है।
सरकारी अस्पताल और CHC/PHC बने हैं रजिस्ट्रेशन यूनिट
सरकारी अस्पताल, कम्युनिटी हेल्थ सेंटर (CHC) और प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र (PHC) अब रजिस्ट्रेशन यूनिट के रूप में काम कर रहे हैं। इन्हें प्रशिक्षित और जागरूक किया जाएगा कि जन्म प्रमाण पत्र को तुरंत जारी करना कितना जरूरी है।
जन्म प्रमाण पत्र बना सबूतों का सबूत
1 अक्टूबर 2023 से डिजिटल जन्म प्रमाण पत्र ही एकमात्र वैध दस्तावेज माना जाता है। इसे स्कूल में एडमिशन, सरकारी नौकरी, पासपोर्ट, विवाह रजिस्ट्रेशन जैसे हर काम के लिए वैध माना जाता है। 2023 में संशोधित RBD एक्ट के तहत अब सभी जन्म/मृत्यु का पंजीकरण केंद्र सरकार के पोर्टल पर अनिवार्य है।
NPR से लेकर वोटर लिस्ट तक डेटा जुड़ेगा
यह केंद्रीय पोर्टल अब नेशनल पॉपुलेशन रजिस्टर (NPR), राशन कार्ड, प्रॉपर्टी रजिस्ट्रेशन, वोटर लिस्ट जैसी कई बड़ी स्कीम्स के डेटा से लिंक रहेगा। यानी अब जन्म प्रमाण पत्र केवल एक कागज नहीं बल्कि डिजिटल पहचान की नींव बन चुका है।












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