Bengal: नंदीग्राम में वोटिंग से पहले महासंग्राम! पुलिस ऑब्जर्वर पर चला EC का हंटर, ममता बनर्जी ने खोला मोर्चा!

West Bengal Election 2026: नंदीग्राम विधानसभा सीट पर 23 अप्रैल को होने वाले मतदान से महज 48 घंटे पहले निर्वाचन आयोग (EC) ने एक बड़ा और चौंकाने वाला फैसला लिया है। आयोग ने नंदीग्राम के मौजूदा पुलिस ऑब्जर्वर, मध्य प्रदेश कैडर के आईपीएस अधिकारी हितेश चौधरी को तत्काल प्रभाव से हटा दिया है। उनकी जगह अब असम कैडर के सीनियर अधिकारी अखिलेश सिंह को नया पुलिस ऑब्जर्वर नियुक्त किया गया है।

चुनाव आयोग ने अपने आदेश में चौधरी को पूर्व मेदिनीपुर छोड़कर तुरंत कोलकाता स्थित मुख्य निर्वाचन अधिकारी (CEO) के कार्यालय में रिपोर्ट करने का निर्देश दिया है। हालांकि, इस अचानक किए गए फेरबदल के पीछे आयोग ने कोई आधिकारिक कारण स्पष्ट नहीं किया है, लेकिन मतदान से ठीक पहले इस कदम ने बंगाल की राजनीति में उबाल ला दिया है। आइए जानतें हैं ममता बनर्जी ने चुनाव आयोग के इस फैसले पर क्या प्रतिक्रिया दी।

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ममता बनर्जी ने चुनाव आयोग पर लगाया आरोप

हल्दिया में एक चुनावी जनसभा को संबोधित करते हुए मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने इस बदलाव पर कड़ा ऐतराज जताया। उन्होंने आरोप लगाया कि पुलिस ऑब्जर्वर को इसलिए हटाया गया क्योंकि वह 'निष्पक्ष' तरीके से काम कर रहे थे। मुख्यमंत्री ने सीधे तौर पर केंद्रीय एजेंसियों पर नंदीग्राम में डराने-धमकाने का आरोप लगाया।

उन्होंने कहा कि 'पिछली बार भी नंदीग्राम के लोगों ने विपक्षी उम्मीदवार को वोट नहीं दिया था और वह मामला अभी भी कोर्ट में लंबित है। ममता बनर्जी ने यह भी दावा किया कि एनआईए (NIA) द्वारा तृणमूल के 40 कार्यकर्ताओं को नोटिस भेजे गए हैं, जिसे उन्होंने राजनीतिक प्रतिशोध करार दिया।'

चुनाव आयोग में शिकायत दर्ज

दूसरी ओर, तृणमूल कांग्रेस ने चुनाव आयोग में एक औपचारिक शिकायत भी दर्ज कराई है। पार्टी का आरोप है कि नंदीग्राम थाने के प्रभारी (OC) और अन्य पुलिसकर्मी टीएमसी कार्यकर्ताओं की शिकायतों को नजरअंदाज कर रहे हैं, जबकि भाजपा की शिकायतों पर तुरंत कार्रवाई की जा रही है। पार्टी ने ऐसे नौ मामलों का हवाला दिया है जहां मारपीट और हत्या के प्रयास जैसे गंभीर आरोपों पर भी पुलिस ने ढुलमुल रवैया अपनाया।

मोहम्मदपुर ग्राम पंचायत के TMC प्रमुख की गिरफ्तारी

इस तनावपूर्ण माहौल के बीच, मोहम्मदपुर ग्राम पंचायत के टीएमसी प्रमुख शेख हबीबुल्लाह रहमान की गिरफ्तारी ने आग में घी डालने का काम किया है। भाजपा कार्यकर्ताओं ने उन पर मतदाताओं को पैसे बांटने का आरोप लगाया था, जिसके बाद पुलिस ने उन्हें हिरासत में लिया। टीएमसी ने इसे राजनीति से प्रेरित बताया है, जबकि पुलिस का कहना है कि कार्रवाई सबूतों के आधार पर की गई है। चुनाव को देखते हुए जिला मजिस्ट्रेट निरंजन कुमार ने पूरे पूर्व मेदिनीपुर में निषेधाज्ञा लागू कर दी है और ओडिशा से लगी सीमाओं को सील कर दिया गया है।

कौन होता है पुलिस ऑब्जर्वर?

चुनाव आयोग द्वारा नियुक्त पुलिस ऑब्जर्वर (Police Observer) आमतौर पर एक सीनियर आईपीएस (IPS) अधिकारी होता है, जिसका मुख्य कार्य संबंधित चुनाव क्षेत्र में कानून-व्यवस्था की कड़ी निगरानी करना और निष्पक्ष मतदान सुनिश्चित करना होता है। यह अधिकारी सीधे चुनाव आयोग को रिपोर्ट करता है और जिले के पुलिस प्रशासन व केंद्रीय सुरक्षा बलों के बीच एक सेतु का काम करता है। इनका काम संवेदनशील मतदान केंद्रों की पहचान करना, सुरक्षा बलों की तैनाती की रणनीति की जांच करना और यह देखना होता है कि स्थानीय पुलिस किसी राजनीतिक दबाव में काम तो नहीं कर रही।

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