राहुल गांधी पर किस मुंह से कार्रवाई करता चुनाव आयोग

असल में राहुल गांधी ने अमेठी में पोलिंग के दिन घूम-घूम कर पोलिंग बूथ तक जाना मीडिया को अखरा पर भारतीय जनता पार्टी को नहीं। यही कारण है कि भाजपा ने इस बात का पुरजोर विरोध नहीं किया। क्योंकि भाजपा जानती थी कि राहुल के महज ईवीएम तक चले जाने से बहुत बड़ा फर्क नहीं पड़ने वाला। हालांकि औपचारिकता वश भाजपा ने चुनाव आयोग में राहुल के खिलाफ शिकायत दर्ज करा दी, जिस पर आयोग ने उन्हें क्लीन चिट दे दी।
क्लीन चिट तो देनी ही थी, क्योंकि अगर राहुल के खिलाफ कोई कार्रवाई होती, तो पहले भाजपा पर करनी पड़ती, क्योंकि मतदान के दिन ही भाजपा ने अपना घोषणा पत्र जारी किया था और चुनाव आयोग ने उसके खिलाफ कोई ऐक्शन नहीं लिया था। जबकि नियमों के अनुसार मतदान के वक्त कोई भी पार्टी घोषणापत्र जारी नहीं कर सकती है।
जाहिर सी बात है जब आयोग तब कुछ नहीं बोला तो राहुल के ईवीएम तक जाने पर क्या बोलता। असल में आयोग ने भी भाजपा के घोषणापत्र के टीवी प्रसारण की इजाजत ऐन वक्त पर देनी पड़ी, क्योंकि तर्क यह था कि उन शहरों में या घोषणा पत्र नहीं जारी किया जा रहा है, जहां पर मतदान हो रहा है। खैर कुछ भी कहिये इस चुनाव में कहीं न कहीं इलेक्शन कमीशन ने भाजपा और कांग्रेस दोनों पार्टियों का ध्यान रखाा है।












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