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ED vs Mamata Banerjee: बंगाल में संवैधानिक टकराव? दीदी के खिलाफ SC पहुंची ईडी, ममता सरकार लगाए गंभीर आरोप

ED vs Mamata Banerjee: पश्चिम बंगाल में जैसे-जैसे चुनावी माहौल नजदीक आ रहा है वैसे-वैसे राज्य की राजनीति में हंगामा बढ़ते जा रहा है। हाल ही में ममता बनर्जी की चुनावी कैंपेन कंपनी I-PAC पर ईडी के छापे के बाद जबरदस्त सियासी तुफान देखने को मिला। अब प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाते हुए गंभीर आरोप लगाए हैं।

केंद्रीय जांच एजेंसी ने दावा किया है कि 8 जनवरी को कोलकाता में I-PAC (इंडियन पॉलिटिकल एक्शन कमेटी) से जुड़े ठिकानों पर चल रही तलाशी के दौरान मुख्यमंत्री ममता बनर्जी और वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों ने जांच में सीधे तौर पर बाधा डाली। इसी आधार पर ED ने इस पूरे मामले की CBI जांच की मांग की है।

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ED ने याचिका में क्या आरोप लगाए?

ED ने अपनी याचिका में मुख्यमंत्री ममता बनर्जी पर तीखा हमला करते हुए आरोप लगाया है कि जब भी किसी जांच से ऐसे तथ्य सामने आते हैं, जो मुख्यमंत्री को 'नापसंद' होते हैं, तो राज्य की पुलिस और प्रशासन का इस्तेमाल कर जांच को रोकने की कोशिश की जाती है।

एजेंसी ने इसे एक "बार-बार दोहराया जाने वाला पैटर्न" बताया है। याचिका में पश्चिम बंगाल के मुख्य सचिव, डीजीपी और कोलकाता पुलिस कमिश्नर का भी नाम लिया गया है। ED का आरोप है कि ये सभी अधिकारी उस समय उन परिसरों में पहुंचे, जहां PMLA (प्रिवेंशन ऑफ मनी लॉन्ड्रिंग एक्ट) के तहत कानूनी तलाशी चल रही थी, और उन्होंने जांच प्रक्रिया में हस्तक्षेप किया।

एजेंसी ने अपनी याचिका में कहा है कि जब देश के उच्च संवैधानिक पदों पर बैठे लोग सरेआम जब्त किए गए सबूत छीनते हैं और उनका मीडिया में प्रदर्शन करते हैं, तो यह सीधे तौर पर संविधान और कानून के शासन का अपमान है। ED का कहना है कि इस तरह की घटनाएं जांच एजेंसियों के कामकाज को कमजोर करती हैं और कानून के पालन में बाधा बनती हैं।

अवैध कोयला खनन मामले से जुड़ा है मामला

ED ने कोर्ट को बताया कि वह ₹2,742 करोड़ के अवैध कोयला खनन से जुड़े मनी लॉन्ड्रिंग मामले की जांच कर रही थी। इस मामले में एजेंसी को I-PAC के सह-संस्थापक प्रतीक जैन के पास करीब ₹20 करोड़ के 'प्रोसीड्स ऑफ क्राइम' होने के संकेत मिले थे। इसी सिलसिले में तलाशी अभियान चलाया जा रहा था। ED का आरोप है कि तलाशी के दौरान मुख्यमंत्री और उनके साथ मौजूद वरिष्ठ अधिकारियों ने जांच अधिकारियों को धमकाया, और उनके पास से इलेक्ट्रॉनिक सबूत और फाइलें छीन लीं, जिन्हें कानून के तहत पहले ही जब्त किया जा चुका था।

CCTV फुटेज जब्त करने पर भी सवाल

ED ने पश्चिम बंगाल पुलिस की भूमिका पर भी गंभीर सवाल खड़े किए हैं। एजेंसी का दावा है कि बंगाल पुलिस ने FIR के नाम पर उन CCTV कैमरों को जब्त कर लिया, जिनमें कथित तौर पर मुख्यमंत्री और अधिकारियों द्वारा जांच में बाधा डालने की पूरी रिकॉर्डिंग मौजूद थी। ED ने इसे साक्ष्यों को नष्ट करने की कोशिश करार दिया है। एजेंसी का यह भी कहना है कि केंद्रीय अधिकारियों को डराने और भविष्य में जांच से रोकने के लिए उनके खिलाफ झूठी और कई FIR दर्ज की जाती हैं, ताकि वे दबाव में आकर अपना काम न कर सकें।

सुप्रीम कोर्ट से CBI जांच की मांग

ED ने अपनी याचिका में इस पूरे प्रकरण को दुर्लभ और असाधारण मामला बताते हुए कहा है कि स्थानीय पुलिस पर भरोसा नहीं किया जा सकता। चूंकि खुद बड़े पुलिस अधिकारी इस कथित घटना में शामिल बताए जा रहे हैं, इसलिए स्थानीय स्तर पर निष्पक्ष जांच की उम्मीद नहीं है। एजेंसी ने सुप्रीम कोर्ट से इस मामले में हस्तक्षेप करने और CBI जांच के आदेश देने की मांग की है। इसके साथ ही, ED ने कोलकाता हाई कोर्ट में हुई नारेबाजी और हंगामे का भी जिक्र किया है, जिसके चलते वहां इस मामले की सुनवाई नहीं हो सकी थी।

चुनाव से पहले सियासी हलचल तेज

ED की इस याचिका के बाद पश्चिम बंगाल की राजनीति और देश के कानूनी हलकों में हलचल तेज हो गई है। विपक्ष इसे कानून-व्यवस्था और संवैधानिक संस्थाओं के टकराव का गंभीर मामला बता रहा है, जबकि तृणमूल कांग्रेस की ओर से इस पर कड़ी प्रतिक्रिया आने की संभावना जताई जा रही है। अब सबकी नजर सुप्रीम कोर्ट पर है, जो इस संवेदनशील मामले में अगला कदम तय करेगा।

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