पी चिदंबरम बोले, प्रवर्तन निदेशालय के आरोप झूठ का पुलिंदा, कानूनी प्रक्रिया के तहत करेंगे कार्रवाई
पूर्व वित्त मंत्री पी चिदंबरम ने कहा अटैचमेंट ऑर्डर के खिलाफ वो कानूनी प्रकिया के तहत कार्रवाई करेंगे।
नई दिल्ली। कार्ती चिदंबरम के खिलाफ प्रवर्तन निदेशालय की कार्रवाई के बाद पूर्व वित्त मंत्री पी चिदंबरम ने अपनी प्रतिक्रिया दी है। उन्होंने कहा है कि कार्ती के खिलाफ कार्रवाई उनको चुप करने के लिए की गई है। पूर्व वित्त मंत्री ने कहा 'मेरे बेटे पर जो आरोप लगे है वो केवल अनुमानों और झूठ का पुलिंदा है'। पूर्व वित्त मंत्री ने कहा कि सरकार कार्रवाई के जरिए धमकाने की कोशिश कर रही है। लेकिन वो डरने वाले नहीं है।

पूर्व वित्त मंत्री पी चिदंबरम ने कहा अटैचमेंट ऑर्डर के खिलाफ वो कानूनी प्रकिया के तहत कार्रवाई करेंगे। आपको बता दें कि प्रवर्तन निदेशालय ने एयरसेल मैक्सिस केस में कार्ति चिदंबरम की कुछ संपत्ति, बैंक खाते और फिक्स डिपॉजिट को अटैच कर लिया है, जिनकी कुल कीमत 90 लाख रुपए है। छानबीन के दौरान ईडी ने पाया कि एयरसेल मैक्सिस केस में एफआईपीबी मंजूरी दी गई थी। यह मंजूरी पूर्व वित्त मंत्री पी चिदंबरम ने अपने अधिकार क्षेत्र से आगे बढ़कर दिया था।
छानबीन में यह भी बात सामने आई है कि एफआईपीबी मंजूरी को गलत तरीके से दिखाया गया ताकि कुछ जरूरी तथ्यों को छुपाया जा सके। इतना ही नहीं, छानबीन ने इस बात का भी खुलासा किया है कि कार्ति चिदंबरम और पी चिदंबरम के भतीजे द्वारा चलाई जा रही कंपनी ने मैक्सिस ग्रुप से सॉफ्टवेयर कंसल्टेंसी के रूप में 2 लाख डॉलर (1.30 करीब रुपए) लिए थे।
यूपीए के शासन के दौरान पी चिदंबरम वित्त मंत्री रहते हुए फॉरेन इन्वेस्टमेंट प्रमोशन बोर्ड (एफआईपीबी) ने आईएनएक्स मीडिया के फंड को मंजूरी दी थी। इसमें कार्ती के साथ इंद्राणी मुखर्जी और पीटर मुखर्जी का नाम भी शामिल था। कार्ती चिदंबरम पर इस मामले में संलिप्त होने का आरोप है। वहीं कार्ती पर विदेशी मुद्रा प्रबंधन अधिनियम (फेमा) के उल्लंघन के मामले में भी ईडी ने नोटिस जारी किया है।
कार्ती पर आरोप है कि वह वासन हेल्थकेयर प्राइवेट लिमिटेड नाम की कंपनी से कथित तौर पर जुड़े हुए हैं। इस कंपनी से जुड़े कई विदेशी निवेशकों से करीब 2100 करोड़ रुपये लिए गए। वहीं, 162 करोड़ रुपये अलग से भी लिए गए। आरोप है कि लेन देन में कार्ती चिदंबरम की कंपनी मैसर्स एडवांटेज स्ट्रेटजिक कंसल्टिंग प्राइवेट लिमिटेड सीधे तौर पर शामिल थी। इस कंपनी को इसमें करीब 45 करोड़ रुपए मिले थे।












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