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आर्थिक विकास दर घटकर 7% रहने की उम्मीद, 2022-23 के लिए सरकार का अनुमान- रिपोर्ट

केंद्र सरकार ने वित्त वर्ष 2022-23 में आर्थिक विकास दर का अनुमान 8% से ज्यादा से घटाकर 7% कर दिया है। हालांकि, आरबीआई के प्रोजेक्शन से अभी भी ये ज्यादा है।

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नए साल की शुरुआत में आर्थिक मोर्चे पर एक निराशाजनक खबर है। रिपोर्ट के अनुसार सरकार का अनुमान है कि चालू वित्त वर्ष में आर्थिक विकास दर घटकर 7% ही रह सकता है। वित्त वर्ष 2022-23 में अब सिर्फ तीन महीने ही बचे हैं, ऐसे में यह अनुमान उम्मीदों से कम है और इसमें बहुत ज्यादा सुधार की गुंजाइश भी कम ही हो सकती है। 1 फरवरी को ही केंद्र की नरेंद्र मोदी सरकार को अपने मौजूदा कार्यकाल का अंतिम पूर्ण बजट पेश करना है। चालू वित्त वर्ष में सकल घरेलू उत्पाद (GDP) 7% के दर से बढ़ने की संभावना जताई गई है। जबकि, पिछले वित्त वर्ष में यह 8.7% रहा था।

आर्थिक विकास दर घटकर 7% रहने की उम्मीद-रिपोर्ट
न्यूज एजेंसी रॉयटर्स ने सांख्यिकी मंत्रालय के हवाले से दी गई रिपोर्ट में दावा किया है कि मौजूदा वित्त वर्ष में भारत का आर्थिक विकास दर घटकर 7% रहने का अनुमान है। अगर पिछले साल की तुलना करें तो यह 8.7% रहा था। सांख्यिकी मंत्रालय ने इस अवधि के लिए मैन्यूफैक्चरिंग ग्रोथ का अपना पहला पूर्वानुमान सिर्फ 1.6% रखा है। असल में सरकार का यह प्रोजेक्शन पहले के पूर्वानुमान 8% या 8.5% से कम है। हालांकि, यह रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया के प्रोजेक्शन 6.8% से अभी भी ज्यादा है।

1 फरवरी को मोदी सरकार के तीसरे कार्यकाल का अंतिम पूर्ण बजट
सरकार 1 फरवरी को पेश किए जाने वाले अपने अगले बजट से पहले इन आंकड़ों का विकास दर और वित्तीय पूर्वानुमानों के लिए इस्तेमाल करती है। केंद्र की नरेंद्र मोदी सरकार के दूसरे कार्यकाल का यह आखिरी पूर्ण बजट होगा। क्योंकि, 2024 के अप्रैल-मई में आम चुनाव होंगे और अगले साल सरकार आंशिक बजट ही पेश कर पाएगी।

आरबीआई को ब्जाज दरों में करनी पड़ी है बढ़ोतरी
2022 के मध्य से कोविड-19 से जुड़ी पाबंदियों में छूट दिए जाने के बाद से भारत की अर्थव्यवस्था तेजी से बढ़ने लगी थी, लेकिन रूस-यूक्रेन यु्द्ध की वजह से मुद्रास्फीति का दबाव भी बढ़ने लगा और आरबीआई को महामारी के समय अपनाई गई काफी ढीली मॉनिटरी पॉलिसी को सख्त करना पड़ गया। इसने पिछले साल मई से मुख्य ब्याज दर में 225 बेसिस प्वाइंट की बढ़ोतरी कर इसे 6.25% कर दिया है, जो तीन वर्षों में सबसे ज्यादा है। इस साल की शुरुआत में एक और बढ़ोतरी की संभावना है।

पिछले साल सितंबर से ही अर्थशास्त्री चालू वित्त वर्ष के लिए विकास दर के अपने अनुमानों में कटौती करते हुए इसे 7% के आसपास ही रख रहे हैं। क्योंकि, निर्यात धीमा हुआ है और मुद्रास्फीति बढ़ने के चलते परचेजिंग पावर घटने का जोखिम है।

पहले कंस्ट्रक्शन ग्रोथ 9.1%, बिजली 9%, कृषि 3.5%, मैन्यूफैक्चरिंग 1.6% और माइनिंग ग्रोथ 2.4% रहने का पूर्वानुमान था। (तस्वीर-प्रतीकात्मक)

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