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भारत ने चुन लिया अपना पक्ष? खामेनई की मौत के 4 दिन बाद एस. जयशंकर ने ईरान के साथ की हाई-लेवल बातचीत

S Jaishankar: पश्चिम एशिया में गहराते युद्ध के बादलों के बीच भारत ने अपनी कूटनीतिक सक्रियता तेज कर दी है। क्षेत्रीय स्थिरता को लेकर भारत की चिंता का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने गुरुवार को ईरान और ओमान के अपने समकक्षों से महत्वपूर्ण टेलीफोनिक चर्चा की।

ईरान के विदेश मंत्री सैयद अब्बास अराघची के साथ पिछले छह दिनों में यह भारत का दूसरा सीधा संपर्क है, जो इस बात का संकेत है कि नई दिल्ली इस पूरे घटनाक्रम पर बेहद बारीकी से नजर रख रही है। भारत ने स्पष्ट किया है कि वह तनाव को कम करने और कूटनीतिक समाधान निकालने के पक्ष में है। शांति की इन कोशिशों में ओमान की भूमिका भी महत्वपूर्ण है, जिसे क्षेत्र में एक प्रमुख मध्यस्थ माना जाता है।

EAM Jaishankar

ईरान के साथ 6 दिन में दूसरी बड़ी बातचीत

विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर जानकारी साझा करते हुए बताया कि गुरुवार दोपहर ईरान के विदेश मंत्री सैयद अब्बास अराघची से उनकी लंबी बातचीत हुई। इस दौरान दोनों नेताओं ने पश्चिम एशिया की मौजूदा स्थिति और भविष्य में इसके संभावित असर पर विस्तार से विचार साझा किए। गौरतलब है कि छह दिनों के भीतर ईरान के साथ यह दूसरी हाई-लेवल बातचीत है, जिससे यह साफ होता है कि भारत इस क्षेत्र में शांति बहाली के लिए ईरान की भूमिका को कितना महत्वपूर्ण मान रहा है।

ओमान से भी साधा संपर्क, शांति प्रयासों में तेजी

ईरान के साथ-साथ एस. जयशंकर ने ओमान के विदेश मंत्री सैय्यद बद्र बिन हमद बिन हमूद अलबुसैदी से भी फोन पर चर्चा की। ओमान को पारंपरिक रूप से खाड़ी क्षेत्र में बातचीत और सुलह की कोशिशों के लिए एक अहम कड़ी माना जाता है। भारत ने ओमान के साथ स्थिति की समीक्षा कर यह संकेत दिया है कि वह क्षेत्रीय साझेदारों के साथ मिलकर तनाव घटाने की हर संभव कोशिश कर रहा है।

भारत का स्टैंड, संयम और संप्रभुता का सम्मान

विदेश मंत्रालय ने इस पूरे घटनाक्रम पर अपनी गहरी चिंता व्यक्त की है। भारत की ओर से जारी आधिकारिक रुख में सभी पक्षों से निम्नलिखित अपील की गई है:

सभी संबंधित पक्ष अधिकतम संयम बरतें।

हालात को और अधिक बिगड़ने से रोकने के लिए तत्काल कदम उठाएं।

एक-दूसरे की संप्रभुता और क्षेत्रीय अखंडता का पूरा सम्मान किया जाए।

भारत का यह कूटनीतिक कदम न केवल भारतीय हितों की रक्षा के लिए है, बल्कि दुनिया को यह संदेश देने के लिए भी है कि वह वैश्विक शांति और स्थिरता के लिए प्रतिबद्ध है।

With AI Inputs

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