किसानों का साथ देने के लिए पंजाब से दिल्ली पहुंचा बाज, जानिए क्यों लोग कर रहे इतनी चर्चा

नई दिल्ली। देश की राजधानी दिल्ली में किसानों का विरोध प्रदर्शन बीते करीब 20 दिनों से जारी है। किसानों की मांग है कि केंद्र सरकार सभी कृषि कानूनों को वापस ले। किसानों का कहना है कि जब तक उनकी मांगों को नहीं माना जाता, तब तक वह ऐसे ही अपना प्रदर्शन जारी रखेंगे। इस बीच खबर आई है कि यहां एक बाज भी किसानों से साथ प्रदर्शन में शामिल हुआ है। इस बाज को निहंग सिख अपने साथ लेकर आए हैं। ये बैरिकेडिंग पर अलर्ट देता रहता है। लोग इसके साथ तस्वीर लेने के लिए भी पहुंच रहे हैं।

निहंग सिखों के साथ पहुंचा बाज

निहंग सिखों के साथ पहुंचा बाज

जानकारी के मुताबिक पंजाब के रोपड़ जिले से निंहग सिख भी प्रदर्शन में शामिल हुए हैं और यही लोग इस बाज को अपने साथ लाए हैं। इनमें से एक व्यक्ति का कहना कि ये बाज बीते करीब तीन साल से निहंग सेना के साथ रह रहा है। जब निहंग सिख विरोध प्रदर्शन में पहुंचे तो ये बाज भी उनके साथ-साथ यहां तक आ गया। वह उड़ते हुए पूरा रास्ता तय कर दिल्ली पहुंच गया। ये बाज शाम तक बैरिकेडिंग के पास ही बैठा होता है और निहंग सेना के साथ रहता है।

किसानों का हौसला बढ़ाने पहुंच रहे लोग

किसानों का हौसला बढ़ाने पहुंच रहे लोग

आपको बता दें सिंघु सीमा पर पुलिस ने किसानों को रोकने के लिए कई तरह के इंतजाम किए हुए हैं। जैसे यहां बैरिकेडिंग लगाई गई है और ट्रक खड़े किए गए हैं। किसानों के प्रदर्शन में उनका हौसला बढ़ाने के लिए कई कलकारों से लेकर खिलाड़ी तक पहुंच रहे हैं। हाल ही में यहां पंजाबी अभिनेता और गायक दिलजीत दोसांझ को देखा गया था। उनके अलावा यहां राष्ट्रीय स्तर पर कबड्डी कमेंटेटर के तौर पर काम कर चुके अर्श गिल भी पहुंचे थे। वह अपनी गाड़ी के आगे प्ले कार्ड लेकर बैठे रहे, जिसपर लिखा था, मैं किसान नहीं हूं लेकिन किसानों के साथ हूं।

दिल्लीवासी भी आ रहे सेवा देने

दिल्लीवासी भी आ रहे सेवा देने

अर्श गिल का कहना है कि उन्होंने किसानों की बुरी हालत देखी जिसके बाद वह पंजाब से दिल्ली पहुंचे। वहीं राजधानी दिल्ली के लोग भी किसानों की सेवा के लिए यहां पहुंच रहे हैं। कोई इनके लिए खाना लेकर आ रहा है तो कोई चाय। वहीं कुछ लोग यहां साफ सफाई करने का काम भी कर रहे हैं। किसानों ने सोमवार को सभी सीमाओं पर एक दिन का उपवास रखने की बात भी कही है। उनका कहना है कि वह दिनभर उपवास रखने के लिए पूरी तरह से तैयार हैं। लेकिन चाहते हैं कि सरकार उनकी सभी मांगे मान ले और इन कानूनों को वापस ले।

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