Made in India: भारत की सुरक्षा होगी और मजबूत, 18 महीने में सेना को मिलेंगी 200 स्वदेशी हॉवित्जर तोपें
नई दिल्ली: पिछले 6 महीनों से लद्दाख में चीन के साथ भारत का सीमा विवाद जारी है। वहीं आए दिन पाकिस्तान भी अंतरराष्ट्रीय सीमा और एलओसी पर नापाक हरकतों को अंजाम देता रहता है। इस बीच भारत अपनी रक्षा जरूरतों को तेजी से पूरा करने में लगा है। साथ ही भारतीय सेना देश में ही बने उपकरणों को शामिल करने पर ज्यादा जोर दे रही है। मौजूदा वक्त में भारत को 400 तोपों की जरूरत है, जिसकी सप्लाई को पूरा करने के लिए डीआरडीओ तैयार है। मौजूदा वक्त में मेड इन इंडिया प्रोजेक्ट के तहत बन रहे DRDO के एडवांस टोड आर्टिलरी गन सिस्टम (ATAGS हॉवित्जर) पहले विकल्प के रूप में देखे जा रहे हैं।
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अच्छी तरह से काम कर रहा ATAGS
दरअसल मौजूदा वक्त में डीआरडीओ के अधिकारी महाराष्ट्र में हॉवित्जर तोप का परीक्षण कर रहे हैं। उनका कहना है कि वे 18 महीनों के अंदर भारतीय सेना को 200 ATAGS हॉवित्जर उपलब्ध करवा देंगे। भारतीय सेना भी इसे अन्य विदेशी तोपों के बेहतर विकल्प के रूप में देख रही है। डीआरडीओ के सूत्रों ने बताया कि ATAGS अच्छी तरह से काम कर रहा है। साथ ही ये लंबी दूरी तक फायर भी कर सकता है। मौजूदा वक्त में भारत में इसके उत्पादन की सभी सुविधाएं मौजूद हैं। ऐसे में 18 से 24 महीने के अंदर 200 तोपों को तैयार कर लिया जाएगा।

इजराइल से आने में लगता है वक्त
सूत्रों के मुताबिक सितंबर में टेस्टिंग के दौरान एक दुर्घटना हो गई थी, जहां पर गोला दागते वक्त बैरल फट गया। बाद में उसकी जांच की गई और ट्रायल फिर से शुरू किया गया। डीआरडीओ के अधिकारियों के मुताबिक वैसे तो हॉवित्जर इजराइल से मंगवाई जाती है, लेकिन उसमें काफी वक्त और लंबी प्रक्रिया की जरूरत होती है। ऐसे में मेड इन इंडिया एटीएजीएस हॉवित्जर बेहतर विकल्प है। इस मांग को भी जल्द पूरा किया जा सकता है। वहीं भारतीय सेना भी जल्द से जल्द इस एडवांस तोप को चाहती है, ताकी इसे चीन और पाकिस्तान की सीमा पर तैनात किया जा सके।

95 फीसदी स्वदेशी सामान
एक दिन पहले भारत में तैयार हो रही हॉवित्जर तोप का वीडियो जारी हुआ था, जो महाराष्ट्र के अहमदनगर में ट्रायल के दौरान का था। इस हाईटेक तोप को बनाने में 95 प्रतिशत सामान भारत का लगा है। ये गन 50 किलोमीटर तक आसानी से मार कर सकती है। साथ ही इसे कहीं भी आसानी से ले जाया जा सकता है। बोफोर्स की तरह ऊंचाई वाले इलाकों में भी स्वदेशी हॉवित्जर काफी करगर साबित होगी।












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