स्पेशल एसी ट्रेनों से घर जाने वालों को क्वारंटीन में रहना पड़ सकता है ? सफर से पहले जान लें नियम
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निर्धारित राज्यों के हेल्थ प्रोटोकॉल को मानना होगा
केंद्रीय गृहमंत्राल ने पिछले रविवार की रात में जो स्पेशल ट्रेनों के संचालन के लिए नया आदेश जारी किया है, उसमें पैसेंजरों को क्वारंटीन में रहने को लेकर स्पष्ट दिशा-निर्देश दिए गए हैं। गृह मंत्रालय का आदेश कहता है कि गंतव्य रेलवे स्टेशनों पर पहुंचने के बाद यात्रियों को संबंधित राज्यों या केंद्र शासित प्रदेशों के निर्धारित प्रोटोकॉल के तहत क्वारंटीन में भेजा जा सकता है। इसके मुताबिक, 'गंतव्य पर पहुंचने के बाद यात्रा करने वाले पैसेंजरों को उस राज्य या संघ शासित प्रदेशों की ओर से निर्धारित हेल्थ प्रोटोकॉल को मानना होगा। ' गृहमंत्रालय की इस गाइडलाइंस के मद्देनजर रेल मंत्रालय ने भी यात्रियों से यात्रा शुरू करने से पहले संबंधित गंतव्य राज्यों के निर्धारित प्रोटॉकॉल के बारे में जान लेने की सलाह दी है। बता दें कि कई राज्यों के मेडिकल प्रॉटोकॉल स्पष्ट रूप से ये कहता है कि बाहर से आने वाले लोगों को निश्चित अवधि तक क्वारंटीन में रहना अनिवार्य है।

अलग-अलग राज्यों में अलग-अलग हैं नियम
मसलन, मणिपुर के मुख्यमंत्री एन बीरेन सिंह ने हाल ही में अपनी सरकार के फैसले के बारे में जानकारी सार्वजनिक की थी। उन्होंने कहा था, 'ट्रेन से आने वाले प्रत्येक व्यक्ति को सरकारी और सामुदायिक क्वारंटीन सेंटर में 14 दिन क्वारंटीन रहना अनिवार्य होगा।' इसी तरह गोवा सरकार ने फैसला किया है कि इन स्पेशल ट्रेनों से जो भी लोग वहां पहुंचेंगे उन सबको कोविड-19 टेस्ट करवाना अनिवार्य होगा। गोवा सरकार के मुताबिक ट्रेन से गोवा आने वाले सभी यात्रियों को पहले एक निर्धारित जगह पर ले जाएगा और उन सबके गले से स्वैब का सैंपल लिया जाएगा। उसके बाद सबको क्वारंटीन फैसिलिटी में ठहराया जाएगा। सिर्फ उन्हीं यात्रियों को अपने घर जाने की इजाजत मिलेगी, जिनका कोविड-19 टेस्ट निगेटिव आएगा। यानि रिपोर्ट आने तक सबको क्वारंटीन फैसिलिटी में रहना ही होगा।

बिहार में होम क्वारंटीन में रहना पड़ सकता है
हालांकि, सभी राज्यों ने अभी तक इन स्पेशल एसी ट्रेनों से आने वाले यात्रियों के लिए नई गाइडलाइंस की घोषणा नहीं की है। वैसे बिहार में अभी तक जो प्रक्रिया अपनाई जा रही है, उसके मुताबिक श्रमिक स्पेशल ट्रेनों से जो मजदूर वहां पहुंच रहे हैं, उन सबको उनके गृह क्षेत्र के ब्लॉक में बने क्वारंटीन सेंटर पर अनिवार्य रूप से 21 दिनों के क्वारंटीन का इंतजाम है। यह अवधि पूरा होने पर ही किसी को घर जाने की इजाजत दी जाएगी। लेकिन, वहां जो स्टूडेंट्स कोटा से स्पेशल ट्रेनों से लाए गए हैं, उन्हें 14 दिनों तक अपने घरों में ही होम क्वारंटीन में रहने को कहा गया है।

लक्षणों को देखकर यूपी में होता है फैसला
जबकि उत्तर प्रदेश में अभी तक यह व्यवस्था है कि अपने निर्धारित स्टेशनों पर श्रमिक स्पेशल ट्रेनों से पहुंचने के बाद प्रवासी मजदूरों की पहले अच्छे से स्क्रीनिंग की जाती है। जिन मजदूरों में कोरोना वायरस के संक्रमण का कोई लक्षण दिखता है, उन्हें तो सरकारी क्वारंटीन फैसिलिटी में भेज दिया जाता है, लेकिन जिनमें किसी तरह का लक्षण नजर नहीं आता, उन्हें होम क्वारंटीन किया जाता है। यानि, आपको ट्रेन में सवार होने से पहले अपने गृह राज्य के निर्धारित प्रोटोकॉल की जानकारी अवश्य प्राप्त कर लेनी चाहिए। या फिर वहां पहुंचने पर क्वारंटीन किए जाने के लिए तैयार रहना चाहिए।

ट्रेनों में कैटरिंग की सुविधा नहीं, कंबल भी साथ लेकर चलें
इसके अलावा पैसेंजरों के लिए यह भी जान लेना अनिवार्य है कि इन विशेष एसी ट्रेनों में उन्हें रेलवे की तरफ से कोई खाना-पानी मुहैया नहीं करवाया जाएगा। न ही उन्हें ट्रेनों में कंबल, चादर या तकिये अथवा तौलिये ही उपलब्ध करवाए जाएंगे। यात्री ट्रेनों में बाहर से भी खाना नहीं मंगवा सकेंगे। इसलिए उन्हें सलाह दी जाती है कि वह इन सारी चीजों का इंतजाम खुद अपने साथ करके चलें। यही नहीं यात्रियों को पूरी यात्रा के दौरान मास्क लगाए रखना अनिवार्य होगा और सोशल डिस्टेंसिंग का भी पालन करना पड़ेगा 12 मई से देश की राजधानी नई दिल्ली से देश के विभिन्न शहरों के लिए 15 जोड़ी स्पेशल एसी ट्रेनों का संचालन शुरू हो रहा है। जिन प्रमुख स्टेशन के लिए नई दिल्ली से ट्रेनें चल रही हैं वो हैं, पटना, रांची, मुंबई, हावड़ी, जम्मू-तवी और अहमदाबाद।












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