राहुल के इस्तीफे में उलझी कांग्रेस को अब DMK ने भी दिया झटका

नई दिल्ली- राहुल गांधी के इस्तीफे पर बुरी तरह फंसी कांग्रेस को अब तमिलनाडु में उसकी सहयोगी डीएमके ने भी झटका दे दिया है। कांग्रेस को उम्मीद थी कि डीएमके पूर्व प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह को राज्यसभा पहुंचाने में मदद जरूर करेगी, लेकिन अंतिम समय में एमके स्टालिन की पार्टी ने उसे गच्चा दे दिया है।

डीएमके ने मनमोहन को नहीं दिया मौका

डीएमके ने मनमोहन को नहीं दिया मौका

डीएमके चीफ एमके स्टालिन ने लोकसभा चुनाव से पहले राहुल गांधी को प्रधानमंत्री बनाए जाने को लेकर जमकर बैटिंग की थी। लेकिन, अब उन्होंने ही कांग्रेस को पूर्व प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह को राज्यसभा पहुंचाने के लिए भी तरसा दिया है। एनडीटीवी की खबर के मुताबिक इस मुद्दे पर कांग्रेस और डीएमके बीच हुई बातचीत फेल हो गई है। डीएमके ने मंगलवार को तमिलनाडु की तीन राज्यसभा सीटों पर उम्मीदवारों की घोषणा कर दी, जिसमें एक सीट उसने अपनी सहयोगी एमडीएमके के वी गोपालस्वामी या वाइको के लिए छोड़ी है।

तो स्टालिन ने इसलिए नहीं छोड़ी मनमोहन के लिए सीट

तो स्टालिन ने इसलिए नहीं छोड़ी मनमोहन के लिए सीट

तमिलनाडु में 18 जुलाई को राज्यसभा की जिन 6 सीटों के लिए चुनाव होने हैं, जिसमें से तीन सीटों के लिए डीएमके और तीन सीटों के लिए सत्ताधारी एआईएडीएमके के पास पूरे विधायक हैं। पहले ऐसी खबरें थीं कि डीएमके एक सीट मनमोहन सिंह के लिए छोड़ेगी, जिनके लिए इसबार राज्यसभा में पहुंचने का रास्ता असम और गुजरात में पहले ही बंद हो चुका है। सूत्रों के मुताबिक एमके स्टालिन ने अपना रुख इसलिए बदला है, क्योंकि मनमोहन सिंह के लिए सोनिया गांधी या राहुल गांधी ने खुद कभी उनसे बात नहीं की, बल्कि इसके लिए सिर्फ अहमद पटेल और गुलाम नबी आजाद को लगाया था। शायद यही बात डीएमके लीडर को चुभ गई।

गुजरात में भी नहीं बन सकी बात

गुजरात में भी नहीं बन सकी बात

मनमोहन सिंह अबतक असम से राज्यसभा के सदस्य थे, जिनका कार्यकाल हाल ही में खत्म हुआ है। लेकिन, अब कांग्रेस के पास वहां इतने विधायक नहीं हैं कि उन्हें फिर से राज्यसभा में पहुंचा सके। खबरों के मुताबिक कांग्रेस ने उन्हें गुजरात से राज्यसभा पहुंचाने का सोचा था, जहां अमित शाह और स्मृति ईरानी की सीटें खाली हुई थीं। लेकिन, वहां दोनों ही सीटों पर एकसाथ उपचुनाव नहीं कराए जाने के चुनाव आयोग फैसले से कांग्रेस के मंसूबों पर पानी फिर गया। सुप्रीम कोर्ट ने भी वहां इकट्ठे चुनाव कराए जाने की कांग्रेस की मांग को खारिज कर दिया था।

अब राजस्थान का ही बचा है आसरा

अब राजस्थान का ही बचा है आसरा

अब खबरें हैं कि कांग्रेस मनमोहन सिंह को राजस्थान से राज्यसभा में पहुंचाने की कोशिश करेगी। यहां पर बीजेपी के प्रदेश अध्यक्ष मदन लाल सैनी के निधन से एक सीट हाल ही में खाली हुई है। उनका कार्यकाल 2024 के अप्रैल तक था, इसलिए उपचुनाव में जिसकी भी जीत होगी उसे पांच साल तक सांसद बने रहने का मौका मिलेगा। कांग्रेस को पूरा यकीन है कि अब उसके पास राजस्थान विधानसभा में इतनी बहुमत है कि उस सीट पर मनमोहन सिंह को जिताकर राज्यसभा में पहुंचा देगी।

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