मिलिए शहीद की बेटी को गोद लेने वाले आईएएस से, दुर्गाशक्ति नागपाल के हैं बैचमेट, आंखें कर चुके दान
कुल्लू के डीएम युनूस खान पंजाब के रहनेवाले हैं। वो सख्त मिजाज और काम के प्रति समर्पित अफसर माने जाते हैं। खनन माफिया में उनका खौफ है। वो दुर्गाशक्ति नागपाल के बैचमेट हैं।
शिमला। शहीद परमजीत सिंह के परिवार की ओर मदद का हाथ आगे बढ़ाने वाले युवा आईएएस अफसर हिमाचल प्रदेश के जिला कुल्लू के डीएम युनूस खान अपनी अलग छवि रखते हैं। पंजाब के मलेरकोटला से ताल्लुक रखने वाले युनूस अपने काम के प्रति जुनून व सख्त मिजाज अफसर के रूप में जाने जाते हैं। उनके बारे में कई किस्से कहानियां आपको शिमला से लेकर ऊना व कुल्लू तक आपको सुनने को मिल जायेंगी।

आम आदमी के डीएम, राजनेताओं से नहींं पटी
युनूस आम आदमी के लिये वह हर समय हाजिर रहते हैं। यही उनकी खासियत है जिसके लोग कायल हैं। राजनेताओं से उनकी पटरी कम ही बैठ पाई। वर्ष 2010 बैच के आईएएस अफसर युनूस खान खनन माफिया से लोहा ले चुके हैं। यही वजह है कि उनके काम को लोग याद करते हैं। यूनूस उस महिला आईएएस दुर्गाशक्ति नागपाल के बैचमेट हैं, जिन्होंने यूपी में खनन माफिया को नाकों चने चबवाए थे।

खनन माफिया में है डीएम का खौफ
युनूस खान का भी कुछ ऐसा ही कैरियर हिमाचल प्रदेश में रहा है। उनकी पोस्टिंग जब सोलन जिला के नालागढ़ में हुई थी तो उन्होंने इलाके के खनन माफिया के लिये अपना खौफ पैदा कर दिया था। शिमला के एडीसी रहते हुए एक नवीन पहल की थी। हिंदू मान्यता के अनुसार मकर संक्रांति दान पर्व कहलाता है। युनूस ने दो साल पहले मकर संक्रांति के दिन अपने नेत्रदान किए थे। नेत्रदान शिविर में खास मेहमान के तौर पर पधारे युनूस ने सबसे पहले नेत्रदान का पर्चा भरा था।

सोलन में भी अवैध खनन पर लगाई रोक
इस युवा आईएएस अफसर की नियुक्ति कुछ साल पहले सोलन जिला के नालागढ़ में बतौर एसडीएम थी। नालागढ़ इलाका अवैध खनन के लिए पहचाना जाता है। यहां तैनाती के दौरान युनूस ने खनन माफिया पर सख्त कार्रवाई की थी। उन पर खनन माफिया ने हमला भी किया था।

सर्दी में ठिठुर रहे बुजुर्ग की मदद
युवा आईएएस अपने सेवाभाव के लिए भी जाने जाते हैं। शिमला के एडीसी रहते हुए युनूस के ऑफिस में किसी ने फोन करके कहा कि एक बुजुर्ग दयनीय हालात में भारतीय उच्च अध्ययन संस्थान के बाहर पड़ा है। सर्दियों का समय था और बुजुर्ग ठिठुर रहा था। फोन सुनते ही युनूस ने जिला कल्याण अधिकारी को बुलाया और उन्हें साथ लेकर मौके पर पहुंचे।

शहीद की बेटी को गोद लेकर पेश की मिसाल
यूनुस ने सर्दी से कांप रहे बुजुर्ग को मौके पर ही मदद दी और उसे अपने साथ आईजीएमसी अस्पताल लाए। यहां उन्होंने अस्पताल प्रशासन को इस बुजुर्ग व्यक्ति का निशुल्क उपचार करने के निर्देश दिए। युनूस का कहना है कि प्रशासनिक सेवा में रहते किसी भी अधिकारी का पहला कर्तव्य और प्राथमिकता जनता की सेवा करना है। फिलहाल सीमा पर पाकिस्तान के कायराना हमले में शहीद हुए पंजाब के परमजीत सिंह की बेटी को गोद लेकर इस युवा आईएएस अफसर ने मिसाल पेश की है।












Click it and Unblock the Notifications