कांग्रेस के नए 'संकटमोचक' डीके शिवकुमार, आगामी पांच चुनावों में दिखा सकते हैं अपना जलवा
DK Shivakumar: कर्नाटक में भारी बहुमत से जीत के बाद कांग्रेस पार्टी में सबसे अधिक किसी की चर्चा है तो वह हैं डीके शिवकुमार। भले सिद्धारमैया ने मुख्यमंत्री की कुर्सी संभाल ली हो लेकिन डीके शिवकुमार को कांग्रेस आलाकमान की तरफ से अधिक महत्व दिया जा रहा है।
डीके शिवकुमार ने कर्नाटक चुनाव को जीतने के लिए अपने स्तर पर सबसे अधिक मेहनत की थी। गली-चौराहे में जा-जाकर लोगों से संवाद करना और उसके बाद पार्टी के लिए रणनीति बनाने में हर तरह से भूमिका निभाई। अब अन्य राज्यों में भी भाजपा की काट निकालने के लिए कांग्रेस पार्टी डीके शिवकुमार को कमान देने के मूड में नजर आ रही है।

आगामी पांच चुनावों में कांग्रेस जता रही भरोसा
बता दें कि आने वाले पांच राज्यों के चुनाव कांग्रेस पार्टी के लिए बेहद महत्वपूर्ण हैं क्योंकि यहीं से 2024 का रास्ता बनेगा। इसलिए कर्नाटक में डीके शिवकुमार के शानदार प्रदर्शन से खुश कांग्रेस के बड़े नेता इनपर भरोसा जता रहे हैं। डीके शिवकुमार के पुराने रिकॉर्ड को देखते हुए कांग्रेस पार्टी समझ चुकी है कि डीके आगामी चुनाव में काफी मदद कर सकते हैं।
मध्य प्रदेश और तेलंगाना में दिखा सकते हैं अपना दम
मध्य प्रदेश और तेलंगाना में एंटी-इनकंबेंसी के बीच डीके शिवकुमार अपनी रणनीति से कांग्रेस का बेड़ा पार लगा सकते हैं। क्योंकि कर्नाटक में जिस तरह से उन्होंने रणनीति बनाई और भाजपा जैसी मजबूत पार्टी को पटखनी दे दी, उसकी हर जगह तारीफ हुई। कांग्रेस को भी लग रहा है कि डीके शिवकुमार इन दोनों राज्यों में हाथ को मजबूत कर सकते हैं। हाल में डीके शिवकुमार ने मध्य प्रदेश का भी दौरा किया था। उन्होंने कमलनाथ के साथ राज्य में ताजा स्थिति का जायजा लिया था।
जानें कब-कब कांग्रेस को संकट से उबारा
कहा जा रहा है कि डीके शिवकुमार की रणनीति कांग्रेस के दिवंगत नेता अहमद पटेल से भी ज्यादा धारदार है। कांग्रेस को कई बार उन्होंने संकट से उबारा है। महाराष्ट्र में 2002 में विलासराव देशमुख के नेतृत्व वाली सरकार के अविश्वास प्रस्ताव जीतने में इनकी अहम भूमिका रही थी। डीके शिवकुमार ने ही तब देशमुख कैंप के विधायकों की अपने बेंगलुरु रिसॉर्ट में मेजबानी की थी। इसी तरह से साल 2017 में अहमद पटेल को राज्यसभा चुनाव जीतने में सक्षम बनाया था। इसके बाद साल 2018 में जेडीएस के साथ गठबंधन करके भाजपा को शासन करने का मौका देने से इनकार कर दिया।












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