राजस्थान: मंत्रिमंडल विस्तार से क्या ख़त्म हो जाएगी अशोक गहलोत और सचिन पायलट गुट की कलह?
राजस्थान के मंत्रिमंडल के फेरबदल का लंबे समय से हो रहा इंतज़ार रविवार को राजभवन में 11 कैबिनेट और 4 राज्य मंत्रियों के शपथ ग्रहण के साथ ही ख़त्म हो गया. लेकिन अब भी हर किसी के ज़ुबान पर यही सवाल है कि क्या अब अशोक गहलोत और सचिन पायलट के गुटों के बीच पिछले तीन साल से जारी रस्साकशी ख़त्म हो जाएगी.
राज्य में बने नए मंत्रिमंडल के चेहरों और गुटबाज़ी ख़त्म करने के लिए दोनों गुटों से मंत्री बनाने से अब काफ़ी कुछ स्पष्ट है. साथ ही ये भी साफ़ हो गया है कि राजस्थान कांग्रेस में जारी अंदरूनी कलह को मिटा कर 2023 विधानसभा चुनावों की तैयारी का आगाज़ किया जा चुका है.
नए मंत्रियों के शपथ ग्रहण से पहले मीडिया से हुई बातचीत में सचिन पायलट ने मामले के सुलझने के संकेत दिए हैं. वहीं शपथ के पहले पीसीसी में और शपथ ग्रहण के बाद मीडिया को दिए मुख्यमंत्री अशोक गहलोत के बयान से भी स्पष्ट नज़र आ रहा है कि पार्टी की नज़र अब राज्य में अगले चुनाव के बाद भी सत्ता में बने रहने पर होगी.
बहरहाल, कैबिनेट में शामिल हुए 11 मंत्रियों के नाम हैं- हेमाराम चौधरी, महेंद्रजीत सिंह मालवीय, रामलाल जाट, महेश जोशी, विश्वेंद्र सिंह, रमेश मीणा, ममता भूपेश, भजन लाल जाटव, टीकाराम जूली, गोविंद राम मेघवाल और शकुंतला रावत.
वहीं राज्य मंत्री बनने वालों में जाहिदा ख़ान, बृजेंद्र सिंह ओला, राजेंद्र गुढ़ा और मुरारी लाल मीणा हैं.
गहलोत और पायलट के एक सुर
मंत्रिमंडल के शपथ ग्रहण से पहले पूर्व उपमुख्यमंत्री सचिन पायलट ने मीडिया को बताया, "हमने जो मुद्दे उठाए थे उनका समाधान हो गया है."
उन्होंने ये भी कहा कि, "सभी नेताओं से चर्चा करने के बाद इतना बड़ा फेरबदल हुआ है. यहां लोग सोचते हैं कि राजस्थान में परिवर्तन होगा, हमें उस सोच को ख़त्म करना है. राजस्थान में 2023 में हम फिर सरकार बनाएंगे."
वहीं शपथ ग्रहण के बाद राजभवन से निकलते हुए मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने मीडिया से कहा, "सभी वर्गों और कार्यकर्ताओं का सम्मान करने के लिए नई कैबिनेट बनी है. प्रयास किया है कि एससी/एसटी, ओबीसी, अल्पसंख्यक सभी को कैबिनेट में लिया जाए. सभी लोग बहुत खुश हैं."
उन्होंने कहा, "अगले चुनाव की तैयारी आज से शुरू हो गई है हमारी. जनता की सरकार से जो अपेक्षाएं हैं, उन्हें पूरा करके दिखाएंगे. हम जनता की भावनाओं और अपेक्षाओं पर खरा उतरेंगे और अगली बार फिर से सरकार बनाने में कामयाब होंगे."
सीएम गहलोत ने शपथ ग्रहण के पहले विधायकों की बैठक के दौरान राज्य कांग्रेस के कार्यालय में कहा, "राजस्थान में बार-बार सरकार बदलती है, लेकिन इस बार सरकार रिपीट करके दिखाएंगे. पूरी कांग्रेस एकजुट है."
इस बारे में, राजस्थान के कांग्रेस प्रभारी अजय माकन ने भी कहा, "2023 के चुनावों में कई सालों के ट्रेंड को बदलना है."
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पायलट समर्थक चार विधायक बने मंत्री
सचिन पायलट अपने चार समर्थक विधायकों को मंत्रिमंडल में शामिल कराने में कामयाब हुए हैं.
पायलट समर्थक विश्वेंद्र सिंह और रमेश मीणा की कैबिनेट में वापसी हुई है. बगावत के दौरान दोनों के मंत्री पद छीन लिए गए थे. जबकि पायलट खेमे के बृजेंद्र ओला और मुरारी लाल मीणा को राज्यमंत्री बनाया गया है.
राज्य में दलित मंत्री न होने की बात कई बार सचिन पायलट ने उठाई थी और अब चार दलित विधायकों को मंत्री बनाया गया है.
मंत्रिमंडल फेरबदल में अपने समर्थक विधायकों को मंत्री बनाए जाने और उनकी मांगें माने जाने से सचिन पायलट भी आज संतुष्ट नज़र आए. अब वह राज्य में मिलकर काम करने और अगले विधानसभा चुनावों में कांग्रेस सरकार की वापसी की बात कर रहे हैं.
पायलट के समर्थक कुछ अन्य विधायकों को संसदीय सचिव, बोर्ड चैयरमैन और अन्य राजनीतिक नियुक्तियों में भी शामिल किया जा सकता है.
ऐसे में माना जा रहा है कि मंत्रिमंडल के ताज़ा फेरबदल में सचिन पायलट अपने समर्थकों को सम्मानजनक पद दिलाने में कामयाब रहे हैं.
कोई निर्दलीय विधायक नहीं बन पाए मंत्री
ख़ास बात यह है कि नए मंत्रिमंडल में किसी भी निर्दलीय विधायक को मंत्री नहीं बनाया गया है. ऐसे में माना जा रहा है कि सरकार बचाने में अहम भूमिका निभाने वाले ये विधायक विरोध कर सकते हैं.
इस पर निर्दलीय विधायक संयम लोढ़ा ने बीबीसी से कहा, "हमने भाजपा की नापाक हरकत को विफल करने के लिए हमेशा सरकार का समर्थन किया है और आगे भी करते रहेंगे."
दूसरी ओर, मंत्रिमंडल में जगह नहीं पाने वाले छह विधायकों को रविवार रात मुख्यमंत्री के सलाहकार पद पर नियुक्त किया गया है. इनमें तीन निर्दलीय विधायक संयम लोढ़ा, बाबू लाल नागर और रामकेश मीणा हैं. वहीं कांग्रेस के तीन विधायकों दानिश अबरार, जितेंद्र सिंह और राजकुमार शर्मा को मुख्यमंत्री का सलाहकार बनाया गया है. ये सभी सीएम अशोक गहलोत के समर्थक विधायक हैं.
सीएम अशोक गहलोत ने रविवार को पीसीसी की बैठक में कहा, "जो मंत्री नहीं बन पाए, उनकी भूमिका कम नहीं है. जो बच गए हैं उन्हें भी एडजस्ट किया जाएगा. हमारा प्रयास है कि अधिकतर विधायकों को एडजस्ट कर लें. हम उन्हें बोर्ड चैयरमैन, सीएम एडवाइजर बनाएंगे.''
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चुनाव के कारण सभी वर्गों के मंत्री
मंत्रिमंडल की बनावट को देखते हुए लगता है कि ताज़ा फेरबदल राज्य के 2023 में होने वाले विधानसभा चुनाव को ध्यान में रखते हुए किया गया है.
इसलिए सभी वर्गों के मंत्री बनने से लेकर महिला मंत्रियों की संख्या भी बढ़ाई गई है. भंवर लाल मेघवाल के निधन के बाद राज्य में कोई भी दलित कैबिनेट मंत्री नहीं था. ऐसे में अब दलित वोट बैंक साधने के लिए चार दलित विधायकों को मंत्री बनाया गया है. इनमें से तीन कैबिनेट और एक राज्यमंत्री हैं.
आदिवासी क्षेत्र में मज़बूत राजनीतिक पकड़ रखने वाले महेंद्रजीत सिंह मालवीय को कैबिनेट में शामिल किया गया है. साथ ही पायलट समर्थक एसटी वर्ग के रमेश मीणा और मुरारी मीणा को भी मंत्री बनाया गया है.
राज्य में पहले जहां ममता भूपेश अकेली महिला मंत्री थीं, लेकिन अब शकुंतला रावत को कैबिनेट और जाहिदा ख़ान को राज्य मंत्री बनाया गया है. यूपी में प्रियंका गांधी ने महिलाओं का प्रतिनिधित्व बढ़ाने की बात कही थी. और अब राजस्थान में तीन महिलाओं को मंत्री बनाया गया है.
ऐसे ही जाट नेता गोविंद सिंह डोटासरा की जगह राम लाल जाट और ब्राह्मण जाति के रघु शर्मा की जगह महेश जोशी को कैबिनेट मंत्री बनाया गया है. नया मंत्रिमंडल बनाने में क्षेत्र और वर्ग का ख़ास ध्यान रखा गया है, ये चीज़ साफ़ नज़र आ रही है.
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क्या आने वाले दिनों में दिखेगी नाराज़गी?
मंत्रिमंडल फेरबदल को लेकर अशोक गहलोत और सचिन पायलट के बयानों से स्पष्ट है कि अपने समर्थकों को पद दिलाने को लेकर जारी अंदरूनी कलह फिलहाल शांत हो गई है. लेकिन भाजपा का मानना है कि आने वाले दिनों में मंत्री नहीं बनाए जाने से नाराज़ विधायकों की नाराज़गी निश्चित रूप से देखने को मिलेगी.
भाजपा प्रवक्ता राम लाल शर्मा ने बीबीसी से कहा, "निश्चित रूप से विधायकों में नाराज़गी है. वरिष्ठ नेताओं की उम्मीद थी कि सरकार में हमें मान सम्मान मिलेगा. कांग्रेस ने दीपेंद्र शेखावत, भरत सिंह, राम नारायण जैसे वरिष्ठ नेताओं को दरकिनार कर दिया है. 13 निर्दलीय विधायकों में से एक भी मंत्री नहीं बनाए गए हैं. आने वाले समय में इन सबकी नाराज़गी देखने को मिलेगी."
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क्या राजनीतिक नियुक्तियों में बाक़ी बचे विधायकों को कहीं एडजस्ट किया जाएगा? इस बारे में प्रवक्ता ने बताया, "मंत्रिपरिषद से संदेश जाते हैं. इन लोगों को आश्वस्त किया था कि उन्हें मंत्रिपरिषद में शामिल करेंगे, लेकिन अब इन्हें निराशा हाथ लगी है. अब इन्हें सलाहकार बनाएंगे या संसदीय सचिव, अब कोई बात मायने नहीं रखती."
पायलट समर्थक विधायकों के मंत्री बनने पर राम लाल कहते हैं, "बृजेंद्र ओला पहले दमदार मंत्री रहे हैं. अब उन्हें राज्यमंत्री बनाया गया है. मुरारी लाल मीणा को राज्य मंत्री का दर्जा दिया गया है. इस तरह से पायलट गुट को साफ़ किया गया है."
उन्होंने कहा, "सचिन पायलट अपने राजनीतिक भविष्य के लिए भले चाहे जैसे बयान दें, लेकिन हक़ीक़त यही है कि पायलट समर्थक विधायकों को दरकिनार किया गया है."
विधानसभा में उपनेता प्रतिपक्ष राजेंद्र राठौड़ ने ट्वीट किया, "असंतुलित मंत्रिमंडल कब तक संतुलित होकर चलता है, यह तो आने वाला वक़्त ही बताएगा."
https://twitter.com/Rajendra4BJP/status/1462394681656971265?s=20
'कांग्रेस अलाकमान की अहम भूमिका'
राजस्थान में मंत्रिमंडल में हुए ताज़ा बदलाव को लेकर वरिष्ठ पत्रकार संजीव श्रीवास्तव ने बीबीसी संवाददाता वात्सल्य राय को बताया, "अच्छी शुरुआत है. ये सचिन पायलट और अशोक गहलोत गुट में तालमेल बैठाने का प्रयास है. इसमें कांग्रेस आलाकमान की निर्णायक भूमिका रही है."
उन्होंने कहा, "आज जो मंत्री बने हैं उनकी निष्ठा भले किसी और नेता के साथ रहे पर बुनियादी रूप से अलाकमान ने ये तय करने की कोशिश की है कि उनकी निष्ठा कांग्रेस और उनकी लीडरशिप के साथ ज़्यादा रहे."
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ये बदलाव क्या पहले से जारी खेमेबाज़ी रोक पाएगा. आलाकमान ने जो कोशिश की है क्या वो कामयाब हो पाएगी? संजीव श्रीवास्तव इस सवाल पर कहते हैं- "खेमेबाज़ी ख़त्म हो जाएगी ये भी एक किस्म का छलावा होगा जो कि हम सोचें."
वो आगे कहते हैं, "पिछले दिनों सचिन पायलट के जैसे बयान आए और आज भी मंत्रिमंडल के शपथ ग्रहण के पहले उनका बयान आया कि हम सबका लक्ष्य कांग्रेस सरकार की वापसी है. यही बात अशोक गहलोत भी कह रहे हैं कि यह एक प्रयास है सबको साथ लेकर चलने का."
विरोध में आवाज़ उठा रहे दूसरे विधायक
अलवर के रामगढ़ लक्ष्मणगढ विधायक जौहरी लाल मीणा ने अलवर विधायक टीका राम जूली को कैबिनेट मंत्री बनाने पर अपना विरोध दर्ज कराया है.
उन्होंने खुलेआम टीकाराम जूली पर भ्रष्टाचार के आरोप लगाते हुए कहा, "मैंने पार्टी नेतृत्व से उन्हें हटाने के लिए कहा और अब उन्हें प्रोमोट कर राज्य मंत्री से कैबिनेट मंत्री बना दिया गया. मैं अब उनके ख़िलाफ़ खड़ा हूं."
विधायक जौहरी लाल मीणा ने कहा, "पार्टी से नहीं बल्कि मंत्री से नाराज़गी है. मैं कांग्रेस भक्त और जन्मजात कांग्रेसी हूं. जूली तो भाजपा से कांग्रेस में आए हैं."
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उधर उदयपुर के खैरवाड़ा के कांग्रेस विधायक डॉक्टर दयाराम परमार ने नए मंत्रिमंडल पर तंज़ कसते हुए सीएम अशोक गहलोत को एक पत्र लिखा है.
इस पत्र में डॉक्टर परमार ने लिखा, "मंत्रिमंडल के गठन के बाद ऐसा लगता है कि मंत्री बनने के लिए कोई ख़ास योग्यता की ज़रूरत होती है. कृपया हमें बताने की कृपा करें कि वो विशेष योग्यता क्या है, ताकि उसे हासिल करके भविष्य में मंत्री बनने की कोशिश कर सकें."
मंत्रिमंडल के ताज़ा फेरबदल के बाद अब पायलट-गहलोत गुट में जहां सामंजस्य बनता नज़र आ रहा है, वहीं अब कांग्रेस के दूसरे विधायकों ने विरोध करना शुरू कर दिया है. अब देखना ये है कि आने वाले दिनों में राजनीतिक नियुक्तियां करके मुख्यमंत्री अपने ही विधायकों के विरोध के सुरों को कितना शांत कर पाते हैं.
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