नोटबंदी पर सुप्रीम कोर्ट ने पूछा, नोट जमा करने का दूसरा मौका क्यों नहीं
नई दिल्ली। सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र की मोदी सरकार और भारतीय रिजर्व बैंक से पूछा है कि क्या उन लोगों के लिए कोई सुविधा दी जा सकती है जिन्होंने अब तक विमुद्रीकृत किए गए 500 और 1,000 की करेंसी नोट्स को जमा नहीं कराया है।

वहीं सरकार ने सुप्रीम कोर्ट से कहा कि वो इस मसले पर एक हलफनामा दायर करेगी। इस मामले की सुनवाई 18 जुलाई को की जाएगी।
बता दें कि साल 2016 में 8 नवंबर को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने राष्ट्र के नाम संदेश के दौरान इस बात की घोषणा की थी कि 500 और 1,000 रुपए के पुराने करेंसी नोट्स बंद किए जाएंगे।
इसके बाद से ही देश भर में अफरतफरी का माहौल पैदा हो गया था। अभी अभी ऐसे कई लोग हैं जो अपने पुराने नोट, विदेश में होने या किसी अन्य कारण से अपना पुराना नोट नहीं जमा करा पाए हैं।
अदालत ने पूछा....
कोर्ट ने केंद्र से पूछा कि क्या यह एक नई विंडो खोल सकता है। अदालत ने केंद्र से कहा कि यह 2 सप्ताह में सूचित करे कि पुराने नोटों का आदान-प्रदान करने के लिए नई विंडो खोली जा सकती है?
यह कहा गया है कि पुरानी करेंसी का लेन-देन करने में वास्तविक कठिनाइयों वाले लोगों की याचिका पर विचार किया जाना चाहिए। अदालत ने कहा, 'आपने उन्हें एक विंडो का वादा किया था, अब आप उससे पीछे नहीं जा सकते। केंद्र ने कहा कि वो 18 जुलाई को इस आशय के हलफनामा दर्ज करेगा।'
अदालत ने कहा कि अगर कोई व्यक्ति यह साबित कर सकता है कि पैसा उसका था और 31 दिसंबर से पहले धन जमा करने में कठिनाई थी, तो दूसरा मौका दिया जाना चाहिए। आप इस तरह बर्बाद होने के लिए किसी व्यक्ति के वास्तविक पैसे को बर्बाद नहीं कर सकते।
केंद्र ने कहा कि यह प्रत्येक मामले की वास्तविकता को जांचने के लिए तैयार है, जिसमें पुरानी करेंसी शामिल है।हालांकि केंद्र ने अदालत को बताया कि उसे किसी के लिए सामान्य विंडो खोलने का निर्देश नहीं देना चाहिए।












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