कोवैक्सीन या कोविशील्ड की डोज लेने के बाद भी डेल्टा वेरिएंट कर सकता है संक्रमित, AIIMS की स्टडी में खुलासा
नई दिल्ली, जून 9। हाल ही में वैज्ञानिकों ने एक स्टडी के जरिए ये जाना था कि कोरोना के डेल्टा वेरिएंट के कारण ही दूसरी लहर इतनी घातक हुई थी। डेल्टा वेरिएंट के घातक होने का अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है कि कोरोना की दूसरी लहर में तीन महीने के अंदर देश में मौत का आंकड़ा साढ़े तीन लाख के करीब पहुंच गया है। कोरोना का डेल्टा वेरिएंट इतना ज्यादा घातक है कि इस पर वैक्सीन का भी प्रभाव अधिक नहीं है। ये बात एम्स की स्टडी में सामने आई है। दरअसल, राजधानी दिल्ली में स्थित एम्स और नेशनल सेंटर ऑफ डिसीज कंट्रोल के अलग-अलग अध्ययन में ये बात सामने आई है कि भारत में लगाई जा रही कोविशील्ड और कोवैक्सीन की डोज लेने के बाद भी कोरोना का डेल्टा वेरिएंट किसी को भी संक्रमित कर सकता है। हालांकि आपको बता दें कि अभी तक किसी स्टडी की समीक्षा नहीं की गई है।
Recommended Video

63 मरीजों पर किया गया अध्ययन
एम्स की स्टडी के मुताबिक, अल्फा वेरिएंट के मुकाबले डेल्टा वेरिएंट किसी भी व्यक्ति को 40 से 50 फीसदी अधिक संक्रमित कर सकता है, फिर भले ही व्यक्ति ने वैक्सीन की दोनों डोज ले रखी हों। एम्स-आईजीआईबी (इंस्टीट्यूट ऑफ जीनोमिक्स एंड इंटीग्रेटिव बायोलॉजी) का अध्ययन 63 संक्रमित मरीजों पर था। इन मरीजों को 5-7 दिन से तेज बुखार के बाद अस्पताल के इमरजेंसी वॉर्ड में रखा गया था। इन 63 लोगों में से 53 को कोवैक्सिन की कम से कम एक खुराक और बाकी को कोविशील्ड की कम से कम एक खुराक दी गई थी। इन 63 मरीजों में से 53 को कोवैक्सिन की और अन्य को कोविशील्ड की एक खुराक दी गई, जबकि 36 लोगों को वैक्सीन के दोनों डोज दिए जा चुके थे। डेल्टा वेरियंट संक्रमण के 76.9 फीसदी मामले ऐसे लोगों में दर्ज किए गए जिन्हें टीके की एक खुराक दी गई थी, जबकि दोनों डोज़ लगवाने वाले 60 फीसदी संक्रमित हुए।
कोविशील्ड को लेकर अधिक संशय
आपको बता दें कि एम्स की स्टडी में कोविशील्ड वैक्सीन को लेकर संशय अधिक नजर आया है। स्टडी में पता चला है कि डेल्टा वेरियंट के संक्रमण से ऐसे लोग ज्यादा संक्रमित हुए हैं, जिन्हें कोविशील्ड दी गई थी। डेल्टा वेरियंट संक्रमण उन 27 मरीजों को हुआ जिन्होंने वैक्सीन लगवाई थी, इनकी संक्रमण दर 70.3 फीसदी रही।
इसके अलावा स्टडी में ये सामने आया है कि कोविशील्ड और कोवैक्सिन अल्फा वेरिएंट पर अधिक असरदार है। ये दोनों वैक्सीन संक्रमण के अल्फा वेरियंट से बचाव करने में सक्षम हैं।












Click it and Unblock the Notifications