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Delimitation Commission: उत्तर बनाम दक्षिण की लडाई परिसीमन पर आई! इस पर फिर से क्यों छिड़ी बहस ?

Delimitation Commission: देश में एक बार फिर से परिसीमन पर बहस छिड़ गई है और इसी के साथ राजनीतिक सरगर्मी भी तेज हो गई है। तमिलनाडु के सीएम एमके स्टॉलिन ने जब इस मुद्दे पर बात की तो परिसीमन पर नए सिरे से बहस शुरू हो गई है।हालांकि दक्षिणी राज्यों में यह कोई नया मुद्दा नहीं है, अक्सर इस पर केंद्र सरकार पर 'असमानता' का आरोप लगता रहता है।

क्या है परिसीमन ? एक बार फिर से इस पर क्यों छिड़ा विवाद ? आइए विस्तार से जानते हैं...

Delimitation-Commission

देश की सियासत में एक बार फिर से परिसीमन पर सवाल शुरू हो गया है और इसी के साथ उत्तर बनाम दक्षिण की राजनीति फिर तुल पकड़ रही है। कुछ दक्षिणी राज्यों का यह तर्क है कि इससे राष्ट्रीय स्तर पर उनकी आवाज और उपस्थिति कम हो जाएगी। हालांकि, यह एक जटिल मुद्दा है जिस पर बहस से परे विस्तार से चर्चा होनी चाहिए।

क्या है परिसीमन आयोग?

लोकसभा और राज्य विधानसभाओं के लिये निर्वाचन क्षेत्रों का परिसीमन 2026 की जनगणना के आधार पर किया जाना है। यह कार्य संसद के एक अधिनियम द्वारा स्थापित 'परिसीमन आयोग' (Delimitation Commission) द्वारा किया जाता है।

परिसीमन आयोग को भारतीय संविधान ने कई शक्तियां और स्वायत्तता दी हैं इसके लिए गए निर्णयों को देश की किसी भी अदालत में चुनौती नहीं दी जा सकती है।

अब तक भारत में 1952, 1963, 1973 और 2002 चार बार इस आयोग का गठन हो चुका है।

  • 1976 में इस आयोग पर इंदिरा गांधी ने 42वें संशोधन के तहत 25 साल के लिए रोक लगा दी।
  • 2001 में जनगणना हुई और 2002 में फिर से इस आयोग का गठन हुआ।
  • अटल बिहारी वाजपेयी ने 84वां संशोधन के जरिए इसे फिर से 25 साल के लिए टाल दिया।

इसके बाद 2021 में देश में जनगणना होनी थी जो कोविड महामारी के कारण आज तक नहीं हुई । अगर 2026 तक यही स्थिति बनी रहती है तो पहली जनगणना के आधार पर निर्वाचन क्षेत्रों की इस संख्या में फिर से फेरबदल हो सकता है।

Delimitation Commission: दक्षिण राज्यों में इस पर इतना विवाद क्यों ?

संविधान में कहा गया है कि लोकसभा और विधानसभा सीटों का बंटवारा राज्य की जनसंख्या के अनुसार किया जाएगा। यानी जिस राज्य में जितनी अधिक जनसंख्या होगी वहां सीटों की संख्या भी अधिक होगी, जहां कम जनसंख्या है वहां कम सीटें होंगी।

दखिए...पिछले पाँच दशकों में हमारे देश में असमान तरीके से भारी जनसंख्या विस्फोट हुआ है। इसमें उत्तर प्रदेश, बिहार, मध्य प्रदेश और राजस्थान जैसे बड़े राज्यों में जनसंख्या में तेजी से बढ़ोत्तरी हुई है लेकिन केरल, तमिलनाडु, कर्नाटक, आंध्र प्रदेश और तेलंगाना जैसे राज्यों में जनसंख्या में कम वृद्धि हुई है।

जनसंख्या की इसी असमानता ने उत्तर बनाम दक्षिण की नई बहस छेड़ दी है। अब दक्षिणी राज्यों को इस बात का डर है कि, अगर 2026 में सीटों का परिसीमन जनसंख्या के आधार पर होता है तो उनके क्षेत्र का प्रतिनिधित्व कम हो जाएगा और उनकी आवाज उत्तरी राज्यों के मुकाबले दब जाएगी। उनका कहना है कि इससे उनके इससे राष्ट्रीय स्तर पर उनके राज्य की आवाज और उपस्थिति पर खतरे की तलवार लटक रही है।

Delimitation Commission: एमके स्टॉलिन बनाम अमित शाह

तमिलनाडु के मुख्यमंत्री एमके स्टॉलिन ने कहा कि हमारी लोकसभा सीटों में कटौती होने जा रही है और हमारी 8 सीटें कम हो जाएंगी। तमिलनाडु अपने 39 लोकसभा सीटों के साथ निचले सदन में दमदार रुप से खड़ा है। स्टालिन का ये बयान इतना असरदार था कि गृहमंत्री अमित शाह ने तुरंत जवाब देते हुए कहा,"परिसीमन से किसी भी राज्य की सीटें कम नहीं होंगी।"

हालांकि, अमित शाह की इस टिप्पणी को स्टालिन ने गुमराह करने वाला बयान करार दिया और इस मुद्दे पर विस्तार से चर्चा करने के लिए राज्य में सर्वदलीय बैठक बुलाई है।

ये भी पढ़ें: Delimitation Row:'भाजपा सर्वदलीय बैठक में हिस्सा नहीं लेगी', स्टालिन पर भड़के अन्नामलाई

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