Delhi riots case: उमर खालिद की जमानत याचिका पर दिल्ली हाई कोर्ट आज सुनाएगा फैसला
Delhi riots case: उमर खालिद की जमानत याचिका पर दिल्ली हाई कोर्ट आज सुनाएगा फैसला
Umar Khalid bail in Delhi riots case: दिल्ली दंगों का आरोपी और न्यायालय जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय (जेएनयू) के पूर्व छात्र उमर खालिद की जमानत याचिका पर दिल्ली हाई कोर्ट आज फैसला सुनाएगा। उमर खालिद को 2020 में उत्तर पूर्वी दिल्ली में हुए दंगों को भड़काने और इसकी साजिश रचने के आरोप में गिरफ्तार किया गया था। उमर खालिद गैर कानूनी गतिविधि रोकथाम कानून (यूएपीए) के तहत दो साल से ज्यादा समय से जेल में बंद है। उमर खालिद को अक्टबूर 2020 को गिरफ्तार किया गया था। वह तिहाड़ जेल में बंद हैं।
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09 सितंबर को कोर्ट ने सुरक्षित रखा था फैसला
जस्टिस सिद्धार्थ मृदुल और जस्टिस रजनीश भटनागर ने 09 सितंबर 2022 को उमर खालिद की जमानत याचिका पर अपना फैसला सुरक्षित रख लिया था। दिल्ली हाई कोर्ट में बहस के दौरान, खालिद के वकील त्रिदीप पेस ने तर्क दिया था कि उमर खालिद के भाषणों में अहिंसा के लिए साफ तौर पर आह्वान देखा जा सकता है। खालिद के वकील ने कहा कि उत्तर पूर्वी दिल्ली में हुई हिंसा में उमर खालिद कोई भी आपराधिक भूमिका नहीं है और न ही वह साजिश करने वाले अन्य आरोपियों से जुड़े हुए हैं।
उमर खालिद के वकील ने कहा कि अभियोजन के पास अपने मामलों को साबित करने के लिए कोई ठोस सबूत नहीं है। उमर खालिद का फरवरी 2020 में दिया अमरावती का भाषण अगर आप देखेंगे तो आपको पता चलेगा कि उसमें उन्होंने अहिंसा का आह्वान किया।
दिल्ली पुलिस ने कोर्ट में दिया ये तर्क
दिल्ली पुलिस ने उमर खालिद की जमानत याचिका का विरोध किया है। दिल्ली पुलिस ने कहा कि उमर खालिद का भाषण बहुत नपा-तुला और भड़काऊ था। खालिद ने अपने भाषण में तीन तलाक, कश्मीर, बाबरी मस्जिद, मुसलमानों का कथित उत्पीड़न, संशोधित नागरिकता कानून (सीएए) और राष्ट्रीय नागरिक पंजी (एनआरसी) जैसे मुद्दों का जिक्र किया था।
दिल्ली पुलिस ने यह भी कहा है कि दिल्ली दंगे 2 चरण में हुए, पहला दिसंबर 2019 में और दूसरा फरवरी 2020 में। दंगों के दौरान लोगों में झूठी जानकारी फैलाई गई थी। सड़कों और ट्रैफिक को बाधित किया गया था। पुलिस और अर्धसैनिक बलों पर हमला किया गया था।
दिसंबर 2019 और फरवरी 2020 में हुए पूर्वोत्तर दिल्ली दंगों में उमर खालिद, शारजील इमाम, और कई अन्य लोगों को दिल्ली के जामिया इलाके में विरोध प्रदर्शन और दंगों का "मास्टरमाइंड" बताया गया है। दिल्ली पुलिस ने इन सभी पर आतंकवाद विरोधी कानून -गैरकानूनी गतिविधियां (रोकथाम) अधिनियम (यूएपीए) के तहत केस दर्ज किया था। बता दें कि दिल्ली दंगों में 53 लोगों की मौत हुई थी और 700 से ज्यादा लोग घायल हुए थे।












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