कांस्टेबल ने सुनाई आपबीती, 'वकील मेरे मुंह पर लात-घूसों से मार रहे थे, मैं कहता रहा छोड़ दो मेरे छोटे बच्चे हैं'

नई दिल्ली। बीते शनिवार (2 नवंबर) को हुए दिल्ली पुलिस के जवान और वकीलों के बीच झड़प में दोनों पक्षों के लोग घायल हुए। एक तरफ जहां गोली लगने से दो वकीलों की जान जाते-जाते बची वहीं, कुछ पुलिसवालों को भी अपनी जान जाने के डर से कोर्ट परिसर में छुपना पड़ा। घटना को आज छठा दिन है लेकिन यह विवाद अभी शांत नहीं हुआ है। किसी ने नहीं सोचा होगा कि एक दिन न्याय दिलाने वाले वकील ही न्याय मांगेंगे और आम जनता की सुरक्षा करने वाली पुलिस को ही अपनी सुरक्षा के लिए आवाज उठाना पड़ेगा।

पार्किंग से शुरू हुआ विवाद

पार्किंग से शुरू हुआ विवाद

शनिवार को पार्किंग से शुरू हुआ विवाद अब विरोध प्रदर्शन और धरने तक पहुंच गया है। झड़प में वकील और पुलिसवाले दोनों घायल हुए लेकिन खबरों में सिर्फ घायल हुए वकीलों की बात ही की जा रही है। इस विवाद में कई पुलिसवाले भी घायल हुए और वह भीड़ का शिकार बन गए। वकीलों के गुस्से का शिकार हुए एक दिल्ली पुलिस के जवान ने यहां तक कह दिया कि अगर पुलिस की नौकरी ऐसी है तो इससे बेहतर प्राइवेट जॉब ही है।

लॉकअप में बंद कर बचाई जान

लॉकअप में बंद कर बचाई जान

दिल्ली पुलिस के एक जवान ने झड़प वाले दिन की आपबीती बताते हुए कहा कि, उस दिन वकीलों से घेरे जाने के बाद हमने लॉकअप में खुद को बंद कर अपनी जान बचाई। गुस्साए वकील हमारी गाड़ियों को आग के हवाले कर रहे थे और पुलिस वालों को ढूंढ कर मार रहे थे। मैं और मेरा एक सहकर्मी अपनी गाड़ीं में बैठे थे तभी वकीलों का एक झुंड वहां आया और हमें अपनी जान बचाने के लिए भागना पड़ा। वकीलों से घिर जाने के बाद हमें अपने हथियार भी उनको सौपना पड़ा।

लगा कि नहीं बच पाउंगा: कांस्टेबल

लगा कि नहीं बच पाउंगा: कांस्टेबल

मीडिया से बात करते हुए 31 वर्षीय पुलिसकर्मी ने बताया कि, शनिवार का वह दिन बहुत भयानक था। घटना की जानकारी मिलते ही जब मैं 3 बजे तीस हजारी कोर्ट के परिसर में पहुंचा तो देखा वहां पुलिस के कुछ जवान घायल पड़े हुए हैं । मैं जब तक यह समझ पाता की हुआ क्या है इतने में करीब 30 वकीलों ने मुझपर हमला कर दिया। मुझे नहीं पता था कि वह मुझे क्यों मार रहे हैं। मैंने उनसे कहा कि मेरे बच्चे हैं मुझे छोड़ दो, लेकिन उनमें से किसी ने नहीं सुना। कांस्टेबल को कई जगह अंदरूनी चोटें आई हैं और वह 3 दिन से अस्पताल में भर्ती हैं। उन्होंने कहा कि, अगर पुलिस की नौकरी ऐसी है तो इससे अच्छा प्राइवेट जॉब ही है।

बच्चे नहीं चाहते पुलिस की नौकरी

बच्चे नहीं चाहते पुलिस की नौकरी

झड़प में घायल हुए दिल्ली पुलिस के 30 साल के कांस्टेबल को भी गंभीर चोटें आई हैं। वकीलों द्वारा पीटे जाने से उनके सर में चोट आई और कंधा व हाथ टूट गया है। अस्पताल में इलाज के बाद डॉक्टरों ने उन्हें मंगलवार को डिस्चार्ज कर दिया अभी वह मेडिकल लीव पर हैं। कांस्टेबल की पत्नी ने कहा कि, मैं भागवान की शुक्रगुजार हूं जो पति की जान बच गई। मैंने वकीलों द्वारा पुलिसकर्मियों को पीटे जाने का वीडियो देखा वह बहुत भयानक मंजर था, मेरे बच्चे अब नहीं चाहते की उनके पिता यह नौकरी करें।

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