केजरीवाल ने रेलवे से कहा- बिना पुनर्वास के नहीं हटाई जा सकती झुग्गियां
नई दिल्ली। दिल्ली सरकार ने रेलवे को चिट्ठी लिखी है। दिल्ली सरकार के बोर्ड दिल्ली शहरी आश्रय सुधार बोर्ड ने मामले में चिट्ठी लिखी है। चिट्ठी में कहा गया है कि राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र दिल्ली कानून (विशेष प्रावधान) (दूसरा संशोधन) अधिनियम 2014 के तहत जो झुग्गी झोपड़ी बस्ती 1 जनवरी 2006 से पहले बनी है। वह संरक्षित हैं और बिना रिलोकेशन या पुनर्वास के पर्याप्त इंतजाम के बिना नहीं हटाया जा सकती है। दिल्ली शहरी आश्रय सुधार बोर्ड की पॉलिसी है कि अगर कहीं झुग्गी झोपड़ी हटाई जाती है तो वहां रह रहे लोगों को रहने का वैकल्पिक इंतजाम दिया जाए।

चाहे उसी जमीन पर या फिर आसपास में 5 किलोमीटर दायरे में कहीं। जरूरत पड़ने पर 5 किलोमीटर से ज्याद की दूरी पर भी इंतजाम किया जा सकता है। चिट्ठी में कहा गया है - हमारी पॉलिसी में इस बात का भी प्रावधान है कि अगर झुग्गी झोपड़ी केंद्र सरकार की एजेंसी जैसे रेलवे, दिल्ली विकास प्राधिकरण, एनडीएमसी, दिल्ली कैंट बोर्ड और अन्य ऐसी एजेंसियों की जमीन पर हैं तो ये एजेंसी या झुग्गी झोपड़ी को उस जगह से शिफ्ट कहीं और शिफ्ट सकती हैं या उनके पुनर्वास की व्यवस्था खुद कर सकती हैं या फिर दिल्ली सरकार दिल्ली शहरी आश्रय सुधार बोर्ड (DUSIB) को यह काम दे सकती हैं।
पॉलिसी में यह भी कहा गया है की इन ज़मीनों की मालिक एजेंसी अगर DUSIB के समक्ष ऐसा कोई प्रस्ताव लाती है और DUSIB बोर्ड उसको मंजूर करता है तो जमीन की मालिक एजेंसी DUSIB को एडवांस पेमेंट करेगी जिसमें ये खर्च शामिल होंगे।
1. वैकल्पिक मकान या फ्लैट कंस्ट्रक्शन का खर्च
2. ज़मीन की कीमत ( इंस्टीट्यूशनल रेट जिस पर DUSIB ने ज़मीन खरीदी)
3. कॉस्ट ऑफ रीलोकेशन (7.55 लाख -11.30 लाख प्रति फ्लैट तक)
बोर्ड ने कहा है, ''हमारे संज्ञान में आया है कि रेलवे ने दिल्ली में कुछ झुग्गी तोड़ने के लिए नोटिस चिपकाए हैं। जिन झुग्गियों रेलवे तोड़ना चाह रही है वो कानून के तहत संरक्षित हैं। यहां रहे रहे लोग दिल्ली स्लम एंड जेजे रिहैबिलिटेशन एंड रीलोकेशन पॉलिसी 2015 के तहत वैकल्पिक आवंटन के हकदार हैं। आपसे निवेदन है कि दूसरी जगह रहने का इंतजाम किए बिना रेलवे की जमीन पर बनी झुग्गियां ना तोड़ें। ''












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