दिल्ली का 'बाबा का ढाबा' अब कंपनियों के विज्ञापनों से पटा, ऑर्डर करके भी मंगा सकेंगे खाना
नई दिल्ली। दिल्ली के मालवीय नगर स्थित बाबा का ढाबा इन दिनों चर्चा में है। इस ढाबे के चलाने वाला कांता प्रसाद का एक वीडियो बीते हफ्ते वायरल हुआ था। जिसमें वो रोते हुए कह रहे थे कि लॉकडाउन के बाद काम नहीं बचा है और उनको गुजारा करना मुश्किल हो रहा है।इस वीडियो के वायरल होने के बाद सैकड़ों लोग रोज उनके यहां खाना खा रहे हैं। जिसके बाद वो काफी खुश हैं। इतना ही नहीं बाबा का ढाबा जोमैटो पर भी लिस्टिड हो गया है, यानी आप ऑर्डर करके वहां से खाना मंगा सकते हैं। वहीं कई कंपनियां भी विज्ञापन के लिए पहुंच गई हैं।

बाबा का ढाबा पर नहीं बची विज्ञापन के लिए जगह
बाबा का ढाबा पर कई कंपनियों ने अपने इश्तहार लगा दिए हैं। इतने बैनर हैं कि अब कोई जगह खाली नहीं है। इतना ही नहीं कुछ टेंपररी काउंटर, जैसे कोविड इंश्योरेस का काउंटर भी ढाबे के पास दिख रहा है। कांता प्रसाद भी इससे खुश हैं, वो कहते हैं कि विज्ञापन भी है और इससे कमाई भी हो रही है।
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मुझे पैसे से मदद की अब जरूरत नहीं
कांता प्रसाद का ये भी कहना है कि अब उन्हें पैसे की जरूरत नहीं है। वो कहते हैं कि पहले एक किलो चावल भी रोज वो नहीं बेच पा रहे थे। अब 5 किलो चावल आधा दिन में बेच रहे है। वो कहते हैं कि कई और लोगों को भी मदद की जररूत है, ऐसे मे उनकी भी मदद हो, उनको अब पैसे की जरूरत नहीं है।

पत्नी के साथ चलाते हैं छोटा सा ढाबा
'बाबा का ढाबा' को कांता प्रसाद और उनकी पत्नी बादामी देवी मिलकर चलाते हैं। साउथ दिल्ली के मालवीय नगर की शिवालिक कॉलोनी में हनुमान मंदिर के सामने बी ब्लॉक में स्थित इस ढाबे पर चाय-नाश्ते से लेकर लंच तक मिलता है। कांता प्रसाद की उम्र करीब 80 है। वो 1988 से इस ढाबे को चला रहे हैं। उनका जो वीडियो वायरल हुआ था, उसमें वो कह रहे थे कि कमाई ना के बराबर है, ज्यादातर खाना बच जाता है, उसे लेकर घर चले जाते हैं। खाने में दाल, चावल, सब्जी, रोटी, परांठा, चाय सभी कुछ बनाते हैं। परिवार में दो बेटे और एक बेटी है, लेकिन कोई मदद नहीं करता। लॉकडाउन से पहले काम ठीक चलता था, लेकिन अब यहां ग्राहक बहुत कम आते हैं। इस वीडियो के बाद उनके ढाबे पर भीड़ है।
क्या है 'बाबा का ढाबा' की पूरी कहानी और कौन हैं इस ढाबे के मालिक कांता प्रसाद












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