जजों की सैलरी के बजाए अपनी सैलरी बढ़ोतरी के लिए लड़ने लगे सांसद
नई दिल्ली। लोकसभा में जजों की सैलरी बढ़ोतरी के विधेयक पर चर्चा करने के बजाए सांसद अपनी सैलरी बढ़ोतरी को लेकर ही हंगामा करने लगे। मंगलवार को लोकसभा की कार्रवाई हंगामे से भरी हुई थी। सांसद जजों की सैलरी के मुद्दे पर बहस करने के बजाए अपनी सैलरी को लेकर हंगामा करते हुए सरकार पर वेतन बढ़ोतरी के लिए दवाब डाल रहे थे। इस हंगामे में केवल विपक्ष के सांसद नहीं बल्कि सत्ता पक्ष के सांसद भी शामिल थे। सांसदों का कहना था कि जब तक उनकी सैलरी नहीं बढ़ेगी वो दूसरों की सैलरी भी नहीं बढ़ने देंगे।

सैलरी बढ़ोतरी पर सदन में हंगामा
आपको बता दें कि केंद्रीय कानून मंत्री रविशंकर प्रसाद लोकसभा में सुप्रीम कोर्ट और देश के 24 उच्च न्यायालयों के जजों का वेतन बढ़ोतरी सं संबंधित विधेयक कर चर्चा शुरू कर रहे थे। जैसे ही उन्होंने विधेयक सदन में पेश किया सत्ता और विपक्ष दोनों ही पक्ष के सांसदों ने हंगामा शुरू कर दिया। सांसदों का कहना था कि उनके सैलरी का क्या? जब तक उनकी सैलरी नहीं बढ़ेगी वो दूसरों की सैलरी बढ़ोतरी नहीं होने देंगे।

सदन में जोरदार हंगामा
सैलरी बढ़ोतरी को लेकर सांसद में जोरदार हंगामा हुआ। सांसदों के गुस्से को देखते हुए कानून मंत्री को दखल देना पड़ा और उन्होंने कहा कि हमें यह समझना चाहिए कि हम देश चलाने के लिए बैठे है। उन्होंने कहा कि हमें देश देख रहा है, ऐसे में हमें बड़ा दिल दिखाना चाहिए। उन्होंने सांसदों से कहा कि वो ये छवि पेश न करें कि जब तक हमारा वेतन नहीं बढ़ेगा, हम दूसरों का वेतन नहीं बढ़ाने देंगे।

जजों की सैलरी बढ़ोतरी का विधेयक
आपको बता दें कि कानून मंत्री ने सुप्रीम कोर्ट के चीफ जस्टिस और देशभर के 22 हाईकोर्ट के जजों की वेतन बढ़ोतरी से संबंधिक विधेयक सदन में पेश किया। इस विधेयक के पारित होने के बाद सुप्रीम कोर्ट के चीफ जस्टिस की सैलरी 2,80,000 रुपए प्रति माह होगी। वहीं हाई कोर्ट के चीफ जस्टिस की सैलरी 2,25,000 रुपए प्रति माह लहोगा। आपको बता दें कि सुप्रीम कोर्ट और हाई कोर्ट के जजों की सैलरी में बढ़ोतरी कानून के द्वारा होती है, इसलिए ये विधेयक पारित किया गया ।












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