आखों के सामने चिल्लाते हुए मर गई बेटी, कुछ नहीं कर सके पिता, स्ट्रेचर पर लेटे-लेट किया अंतिम संस्कार
सत्येन्द्र सिंह आधे घंटे तक अपनी 26 साल की बेटी के चीखने-चिल्लाने और मदद मांगने की आवाज सुनते रहे, लेकिन चाह कर भी मदद नहीं कर सके।
भोपाल। हाल ही में कानपुर के पास हुए इंदौर-पटना एक्सप्रेस ट्रेन हादसे में जीवित बचे एक शख्स ने अपनी ऐसी आपबीती सुनाई है कि सुनने वालों का दिल ही दहल गया। इस हादसे में 55 साल के सत्येन्द्र सिंह भी घायल हुए हैं।

सत्येन्द्र सिंह आधे घंटे तक अपनी 26 साल की बेटी के चीखने-चिल्लाने और मदद मांगने की आवाज सुनते रहे, लेकिन चाह कर भी मदद नहीं कर सके। दरअसल, वह अपनी बर्थ की स्टील के बुरी तरह से मुड़ जाने के चलते उसी में फंस गए थे।
सत्येन्द्र सिंह की 26 साल की बेटी आधे घंटे तक 'पापा बचाओ... कोई है? प्लीज बचाओ...'। उन्हें पता था कि आसपास ही कहीं उनकी पत्नी भी स्टील में फंसी हुई हैं, लेकिन वह कुछ नहीं कर सकते थे।
सांस भी नहीं ले पा रहे थे सिंह
सिंह के बेटे ने बताया कि उनके पिता को तो इस बात का अंदाजा भी नहीं था कि उस बोगी में जिंदा बचने वाले वह अकेले हैं। सिंह बी3 कोच में एक लोअर बर्थ पर थे।
इस घटना में सिंह इतनी बुरी तरह से घायल हो गए ते कि वह अपनी उंगली भी नहीं हिला पा रहे थे। उनका चेहरा स्टील में बुरी तरह से फंस गया था। वह ठीक से सांस भी नहीं ले पा रहे थे।
स्ट्रेचर पर लेटे-लेटे किया अंतिम संस्कार
उनके हाथ और पैर स्टील में बुरी तरह से फंस गए थे, जिसके चलते वह हिल-डुल भी नहीं पा रहे थे। जब तक बचाव दल ने सिंह की बेटी को निकाला तब तक उसकी मौत हो चुकी थी। सिंह की 54 वर्षीय पत्नी गीता की भी मौत हो चुकी थी।
सिंह को कानपुर से भोपाल लाया गया, जहां पर उन्होंने अपनी पत्नी और बेटी का अंतिम संस्कार स्ट्रेचर पर लेटे-लेटे ही किया। इसके बाद उन्हें वापस अस्पताल ले जाया गया, ताकि उनका इलाज किया जा सके।












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