MUDA घोटाले में सिद्धारमैया के समर्थन में खड़े हुए दलित और पिछड़े वर्ग के नेता
दलित और पिछड़े वर्ग के संतों के एक समूह ने कर्नाटक के मुख्यमंत्री सिद्धारमैया से मुलाकात की। उन्होंने MUDA 'घोटाले' से संबंधित अभियोजन के लिए राज्यपाल की मंजूरी के बाद अपना बिना शर्त नैतिक समर्थन व्यक्त किया।
मुख्यमंत्री कार्यालय ने एक बयान जारी कर कहा कि सरकार को कृत्रिम रूप से अस्थिर करने की केंद्र सरकार और राजभवन की साजिशों की कड़ी निंदा करते हुए, स्वामीजी ने घोषणा की कि वे एकजुट होकर मुख्यमंत्री सिद्धारमैया के पक्ष में इस साजिश के खिलाफ लड़ेंगे।

विभिन्न द्रष्टाओं से समर्थन
प्रतिनिधिमंडल में कागिनेले कनक गुरु पीठ के जगद्गुरु श्री निरंजनानंद पुरी स्वामीजी, श्री जगद्गुरु कुंचितिगा महासंस्थान मठ - होसदुर्गा के जगद्गुरु श्री शांतावीरा महास्वामीजी, भोवी गुरुपीठ - चित्रदुर्ग के जगद्गुरु श्री इम्मादी सिद्धरामेश्वर स्वामीजी, और मदारा चेन्नई गुरुपीठ - चित्रदुर्ग के जगद्गुरु श्री बसवमूर्ति मदारा चेन्नई महास्वामीजी जैसी प्रमुख हस्तियां शामिल थीं।
राज्यपाल थावरचंद गहलोत ने 16 अगस्त को मैसूर शहरी विकास प्राधिकरण (MUDA) साइट आवंटन 'घोटाले' के संबंध में सिद्धारमैया पर मुकदमा चलाने की मंजूरी दे दी। इस फैसले ने करीब 15 महीने पुरानी कांग्रेस सरकार पर काफी असर डाला है।
कानूनी कार्यवाही और प्रतिक्रियाएं
राज्यपाल की मंजूरी भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम, 1988 की धारा 17ए और भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता, 2023 की धारा 218 के तहत दी गई थी। कथित अपराधों का विवरण कार्यकर्ता प्रदीप कुमार एसपी, टीजे अब्राहम और स्नेहमयी कृष्णा द्वारा दायर याचिकाओं में दिया गया था।
19 अगस्त को उच्च न्यायालय ने जनप्रतिनिधियों के लिए विशेष अदालत को निर्देश दिया कि वह MUDA साइट आवंटन 'घोटाले' के संबंध में सिद्धारमैया के खिलाफ अपनी कार्यवाही 29 अगस्त तक स्थगित कर दे।
इस घटनाक्रम ने महत्वपूर्ण राजनीतिक प्रतिक्रियाएं पैदा की हैं। विभिन्न संतों से मिल रहा समर्थन सिद्धारमैया सरकार को अस्थिर करने के प्रयासों के खिलाफ एकजुट रुख को दर्शाता है।












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