दलाई लामा ने चीन को फटकारा, कहा भारत ने कभी नहीं किया उनका प्रयोग
दलाई लामा ने दिया अरुणाचल प्रदेश के लोगों को अपना आर्शीवाद और चीन को लगाई फटकार। कहा कोई फर्क नहीं पड़ता अगर चीन उन्हें शैतान समझता है।
तवांग। तिब्बती धर्मगुरु दलाई लामा ने अरुणाचल प्रदेश पहुंचने के बाद यहां के नागरिकों को आर्शीवाद दिया है। इसके साथ ही उन्होंने चीन को उनके दौरे पर दी जा रही धमकियों के लिए फटकार लगाई है। दलाई लामा पांच दिनों तक अरुणाचल प्रदेश का दौरा करेंगे।

'भारत ने रखा है मेरा ख्याल'
तिब्बमी धर्म गुरु दलाई लामा दो दिन देर से अरुणाचल पहुंचे हैं और उनका पहला पड़ाव बोमदिला था। यहां पर उन्होंने कहा कि भारत सरकार ने उनका काफी ध्यान रखा था। इसके साथ ही उन्होंने यह बात भी कही कि अरुणाचल प्रदेश आकर उन्हें काफी अच्छा लगा। इसके साथ दलाई लामा ने कहा कि उन्हें इस बात से कोई समस्या नहीं है अगर चीन उन्हें शैतान समझता है। दलाई लामा ने चीन की मीडिया को फटकार लगाते हुए कहा कि भारत ने कभी उनका प्रयोग चीन के खिलाफ नहीं किया है। दलाई लामा ने कहा कि चीन में तिब्बती बौद्ध धर्मगुरुओं की सबसे ज्यादा संख्या है और कई चीनी बौद्धिक लोग उनके संघर्ष का समर्थन करते हैं। दलाई लामा से जब चीनियों के गुस्से को लेकर सवाल किया गया तो उन्होंने जवाब दिया, 'कृप्या ऐसा न कहें क्योंकि चीन में कई लोग हैं जो भारत से प्यार करते हैं। ये सिर्फ संकुचित मानसिकता वाले राजनेता हैं जो भारत को एक अलग नजरिए से देखते हैं। यह बिल्कुल वैसा ही है जैसे कि वे मुझे एक राक्षस या शैतान के तौर पर देखते हैं। मैं शैतान तो नहीं हूं।'
तिब्बत के विकास की बात
दलाई लामा ने बोमदिला में मीडिया से बात करते हुए आगे कहा कि उन्हें आजादी नहीं चाहिए और वे लोग चीन के लोगों के साथ ही रहना चाहते हैं। तिब्बत भले ही भौतिक रूप से पिछड़ा हो लेकिन आध्यात्मिक तौर पर काफी आगे है। दलाई लामा का कहना था कि वह सिर्फ भौतिक तौर पर तिब्बत को विकसित करने की लड़ाई लड़ रहे हैं और चीन के साथ ही रहना चाहते हैं। चीन को भी इसी तरह से सोचना चाहिए ताकि आपसी फायदा मिल सके। इस मौके पर उन्होंने 58 वर्ष पहले उस पल को भी याद किया जिसके तहत वह चीन से अपनी जान बचाकर बोमदिला के रास्ते तवांग पहुंचे थे।












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