लॉकडाउन में फंसे लोगों के घर लौटने में नया संकट, 7 राज्यों ने कहा क्या मतलब जब महीनों लग जाए
नई दिल्ली- प्रवासी मजदूरों समेत लॉकडाउन में देश के अलग-अलग हिस्सों में फंसे हुए लाखों लोगों की घर वापसी में नई मुश्किल खड़ी हो गई है। बुधवार को ही केंद्र सरकार ने राज्य सरकार को यह छूट दी थी कि वह अपने-अपने प्रदेश के लोगों को चाहें तो वापस अपने में राज्यों बसों से ले जा सकते हैं। लेकिन, अब कई राज्यों ने केंद्र की इस योजना पर हाथ खड़े करने शुरू कर दिए हैं। इन राज्यों ने कहा है कि केंद्र की नई गाइडलाइंस के मुताबिक प्रवासियों को उनके गांवों तक मौजूदा माहौल में बसों से पहुंचने का फैसला व्यावहारिक नहीं है और इसे अमलीजामा पहनाने में महीनों लग जाएंगे। इन राज्यों ने केंद्र से मांग की है कि वह इस काम के लिए नॉन-स्टॉप ट्रेन चलाने पर विचार करें।

प्रवासी मजदूरों को बसों से निकालना असंभव- राज्य
केंद्र सरकार ने बुधवार को गाइडलाइंस जारी करके राज्यों से कहा था कि वह चाहें तो अपने प्रदेश के लोगों को बसों के जरिए लॉकडाउन के निर्धारित नियमों का पालन करते हुए उनके मूल स्थानों तक ले जा सकते हैं। लेकिन, कम से कम सात राज्यों ने केंद्र के इस फैसले का पालन कर पाने में हाथ खड़े कर दिए हैं। केंद्र के निर्देशों का विरोध करने वाले राज्यों में तेलंगाना, केरल, तमिलनाडु, महाराष्ट्र, राजस्थान, पंजाब और बिहार जैसे राज्य शामिल हैं। इन राज्यों की दलील है कि फंसे हुए लोगों की संख्या, दूरी और लॉजिस्टिक के नियम बसों से उन्हें लाने की बातों को अव्यावहारिक बना देते हैं। ये मामला कैबिनेट सचिव और राज्यों के मुख्य सचिवों की हुई वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग में भी उठा है और सरकार ने कहा है कि वह राज्यों की ओर से उठाए गए मुद्दों को देखेगी।

राज्यों ने की स्पेशल ट्रेन चलाने की मांग
केंद्र के फैसले पर सबसे पहले केरल ने सवाल उठाया है और उसने मांग की है कि लोगों को ले जाने के लिए नॉन-स्टॉप ट्रेनों का इंतजाम होना चाहिए। केरल के सीएम पिनराई विजयन का कहना है कि उनके राज्य में 20,000 जगहों पर 3.60 लाख कामगार फंसे हुए हैं। उनके मुताबिक, 'ऐसे बहुत ज्यादा लोग हैं, जो अपने राज्यों की ओर लौटना चाहते हैं। उन्हें दक्षिणी राज्य से जहां जाना है वह बहुत लंबा सफर है और बस से सफर करना बहुत ही थकाऊ होगा और इससे वायरस फैलने की भी आशंका है।' राजस्थान के सीएम अशोक गहलोत ने भी कहा है कि उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को लिखा है कि हजारों लोगों को बसों से इतनी दूर भेजना अव्यवहारिक है।
बसों से मजदूरों को लाने में महीनों लग जाएंगे- सुशील मोदी
इसी तरह पंजाब के मुख्यमंत्री कैप्टन अमरिंदर सिंह का कहना है कि अकेले लुधियाना में सात लाख से ज्यादा प्रवासी मजदूर हैं और पूरे पंजाब में तो उनकी संख्या 10 लाख से भी ज्यादा है। पंजाब में 70 फीसदी से ज्यादा मजदूर बिहार के हैं और इतने लोगों को ट्रेन से ही भेजा जाना संभव है। तेलंगाना सरकार का भी कहना है कि उसके यहां करीब 15 लाख प्रवासी मजदूर हैं। उन्हें बसों से बिहार, झारखंड और छत्तीसगढ़ तक जाने में तीन से पांच दिन तक लग सकते हैं। सबसे बड़ी बात है कि बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने बुधवार को केंद्र के फैसले के लिए पीएम मोदी की तारीफ की थी। लेकिन, उनके डिप्टी सुशील मोदी का कहना है कि 'अगर हम बसों पर निर्भर रहेंगे तो इस काम को पूरा करने में महीनों लग जाएंगे।' एक वीडियो मैसेज में उन्होंने केंद्र सरकार से अपील की है, 'इसलिए मैं केंद्र सरकार से अपील करता हूं कि वो स्पेशल ट्रेन चलाए। इसे नॉन-स्टॉप रखा जाए,प्रस्थान और आगवन वाले स्टेशों के बीच कोई हॉल्ट न हो। बैठने का इंतजाम ऐसे हो सकता है कि सोशल डिस्टेंसिंग का पालन हो। खाना और पानी ट्रेन में ही उपलब्ध करवाया जा सकता है।'

बाकी राज्यों ने भी जताई असमर्थता
इसी तरह तमिलनाडु ने कह दिया है कि केंद्र की योजना को लागू करना संभव नहीं हो पाएगा। उसने कहा है कि प्रदेश में करीब 4 लाख प्रवासी मजदूर हैं और ज्यादातर बिहार और पश्चिम बंगाल के रहने वाले हैं। इसी तरह महाराष्ट्र सरकार ने भी ऐसी ही इच्छा जताई है। महाराष्ट्र इस वक्त कोरोना वायरस से सबसे ज्यादा पीड़ित राज्य है और अकेले मुंबई में जितने प्रवासी मजदूर रहते हैं वह देश के किसी भी महानगर से ज्यादा है।












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