UP में कोविड संकट: CM योगी ने टीम-11 की जगह बनाई टीम-9, मंत्रियों को दी बड़ी जिम्मेदारी
लखनऊ, मई 1। कोरोना वायरस के संक्रमण से ठीक होने के बाद उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने जो एक बड़ा काम किया वह कोविड-19 संक्रमण को डील करने के लिए बनी नौकरशाहो की टीम-11 को खत्म करना है। पिछले एक साल से कोरोना महामारी के पहुंचने के समय से ही नौकरशाहों की यही टीम प्रदेश में कोरोना संक्रमण को डील कर रही थी। पिछले दिनों प्रदेश में फैले कोविड संकट से निपटने में इस टीम-11 की नाकामी के चलते योगी सरकार की खासी आलोचना हो रही है जिसके बाद सीएम ने इस टीम को भंग करके नई टीम बनाई है।

टीम 11 की जगह होगी टीम 9
शुक्रवार को सीएम योगी ने टीम-11 का पुनर्गठन कर टीम-9 में बदल दिया है। इसकी खास बात यह है कि इसमें वरिष्ठ अधिकारियों के साथ मंत्रियों को भी जगह दी गई है। 9 सदस्यीय इस टीम को टीम-9 कहा जा रहा है।
इस टीम में अब स्वास्थ्य मंत्री और चिकित्सा शिक्षा मंत्री को भी शामिल किया गया है। ऐसा इसलिए किया गया है ताकि कोविड संकट से निपटने में मंत्रियों और अधिकारियों के बीच बेहतर तालमेल स्थापित किया जा सके।
अतिरिक्त मुख्य सचिव नवनीत सहगल को टीम 9 के साथ सहयोग स्थापित करने और इसकी जानकारी मीडिया तक पहुंचाने की जिम्मेदारी दी गई है।
मुख्यमंत्री कार्यालय के सूत्रों की मानें तो सीएम योगी टीम में केवल उन सदस्यों को रखना चाहते हैं जो "संकट में अधिक उपयोगी हों।" यह भी चर्चा है कि ऐसा इसलिए किया गया है ताकि बाहर जा रहे इस मैसेज को बदला जा सके कि सरकार में केवल नौकरशाहों की चल रही है और बाकी लोगों को किनारे कर दिया गया है।

टीम में मंत्रियों को बड़ी जिम्मेदारी
सीएम योगी की नई टीम में मंत्रियों को बड़ी जिम्मेदारी दी गई है। चिकित्सा शिक्षा मंत्री सुरेश खन्ना और स्वास्थ्य मंत्री जय प्रताप सिंह टीम 9 का नेतृत्व करेंगे। खन्ना टीम 9 के पहले सदस्य के रूप में काम करेंगे। उनके ऊपर अस्पतालों में बेड की उपलब्धता देखने और प्रदेश में टीकाकरण अभियान को लेकर कोऑर्डिनेट करने की जिम्मेदारी है।
उनके साथ तीन सदस्य होंगे जिनमें चिकित्सा शिक्षा राज्य मंत्री, अतिरिक्त मुख्य सचिव चिकित्सा शिक्षा और प्रधान सचिव चिकित्सा शिक्षा उनके अधीन काम करेंगे।
स्वास्थ्य मंत्री जय प्रताप सिंह टीम के दूसरे प्रमुख सदस्य होंगे। उनकी जिम्मेदारी मेडिकल किट, टेस्टिंग किट और स्वास्थ्य सेवाओं को सुनिश्चित कराने की होगी। इनकी टीम में राज्यमंत्री स्वास्थ्य, अतिरिक्त मुख्य सचिव स्वास्थ्य सहायता के लिए मौजूद रहेंगे। वहीं प्रमुख सचिव आरके तिवारी टीम के तीसरे सदस्य होंगे। उनकी जिम्मेदारी केंद्र और राज्य के बीच सहयोग और तालमेल को सुनिश्चित करने की होगी।

अवनीश अवस्थी देखेंगे ऑक्सीजन की जिम्मेदारी
इंफ्रास्ट्रक्चर और औद्योगिक विकास विभाग के आयुक्त संजीव मित्तल टीम के चौथे सदस्य होंगे। वह कोविड संकट के बीच औद्योगिक गतिविधियों की जिम्मेदारी संभालेंगे। कृषि उत्पादन आयुक्त आलोक सिन्हा टीम के पांचवें सदस्य हैं। वह राज्य में कृषि गतिविधियों की देखभाल की कमान संभालेंगे।
अतिरिक्त मुख्य सचिव अवनीश अवस्थी टीम के छठे सदस्य होंगे। वह खाद्य सुरक्षा और औषधि प्रशासन और परिवहन विभाग के प्रमुख सचिवों की मदद से ऑक्सीजन की उपलब्धता के लिए समन्वय स्थापित करेंगे।
अतिरिक्त मुख्य सचिव (राजस्व) रेणुका कुमार सातवें सदस्य हैं, जो प्रवासी श्रमिकों की टेस्टिंग और क्वारंटाइन सुविधाओं की जिम्मेदारी संभालेंगे।
प्रदेश के पुलिस महानिदेशक एच.सी. अवस्थी टीम के आठवें सदस्य हैं। वह कंटेनमेंट जोन, वीकेंड लॉकडाउन और कोविड प्रोटोकॉल का पालन सुनिश्चित करवाने की जिम्मेदारी संभालेंगे। अतिरिक्त मुख्य सचिव, ग्रामीण विकास और पंचायती राज विभाग, मनोज कुमार सिंह टीम के नौवें सदस्य होंगे। वह फॉगिंग और सैनिटेशन कार्यों की देखभाल करेंगे।

इन लोगों की टीम से हुई छुट्टी
पुरानी टीम से जिन लोगों की छुट्टी की गई है वे प्रमुख सचिव (कृषि) देवेश चतुर्वेदी और प्रमुख सचिव (पशुपालन) भुवनेश कुमार हैं।
पिछले दिनों प्रदेश की राजधानी लखनऊ में ऑक्सीजन और दवाओं की कमी की खबरों के बीच मचे हाहाकार के बाद टीम-11 की भारी आलोचना हो रही थी। सूत्रों के मुताबिक पार्टी की तरफ से भी कोविड प्रबंधन टीम में मंत्रियों को शामिल करने की मांग उठ रही थी।
इस बदलाव के पीछे इस नैरेटिव को बदलने की कोशिश भी है जिसमें कहा जा रहा है कि सरकार में केवल नौकरशाहों की चल रही है और मंत्रियों व जनप्रतिनिधियों को किनारे कर दिया गया है। वहीं राज्य में पिछले दो सप्ताह में जिस तरह से चीजों को संभाला गया है उससे मुख्यमंत्री को काफी निराशा हुई है। यही वजह है कि जब शुक्रवार को मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की कोविड रिपोर्ट निगेटिव आई तो उन्होंने पहली ही बैठक में इस टीम का पुनर्गठन किया और केवल उन लोगों को टीम में रखा जो संकट के समय में अधिक उपयोगी हैं।












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