Indian Railways को कोरोना ने दिया है बड़ा झटका, अब उठ रही है ऐसी मांग
नई दिल्ली, 11 मार्च: पिछले करीब एक साल में भारतीय रेलवे ने कोविड महामारी की वजह से अपने करीब 2 हजार कर्मचारियों को खो दिया है और इस समय रोजाना करीब एक हजार की तादाद में रेलकर्मी इससे पीड़ित हो रहे हैं। रेल मंत्रालय ने सोमवार को यह जानकारी दी है। अब रेल कर्मचारी खुद को भी कोरोना वॉरियर्स का दर्जा देने और उन्हीं की तरह मुआवजा देने की मांग कर रहे हैं। यही नहीं रेलवे इस कोशिश में भी लगा है कि उसके कर्मचारियों को जल्दी टीका लग जाए, साथ ही वह अपने अस्पतालों की सुविधाओं को भी दुरुस्त कर रहा है, ताकि बड़ी तादाद में बीमार हो रहे है रेलकर्मियों और उनके परिजनों को फौरन इलाज मिल सके।

अभी तक 1,952 रेलकर्मियों की कोरोना ने ली जान
कोरोना महामारी की शुरुआत के दिनों से अबतक 1,952 रेल कर्मचारियों की जान जा चुकी है, जिसमें स्टेशन मास्टर जैसे फ्रंटलाइन स्टाफ भी शामिल हैं। रेलवे बोर्ड के चेयरमैन सुनीत शर्मा ने कहा है, 'इस समय 4,000 बेड पर हमारे स्टाफ और उनके परिवार वाले हैं। हमारी कोशिश है कि वो जल्द से जल्द ठीक हों। कल तक 1,952 रेल कर्मचारियों की पिछले साल मार्च से लेकर अबतक कोविड-19 की वजह से मौत हो चुकी है।' उन्होंने कहा है, 'रेलवे भी किसी राज्य या क्षेत्र से अलग नहीं है और हमें भी कोविड हो रहा है.....हमें माल और लोगों को लेकर चलना है। रोजाना करीब 1,000 मामले सामने आ रहे हैं। हमनें बेड की संख्या बढ़ाई है, हमने रेल अस्पतालों में ऑक्सीजन प्लांट बनाए हैं। हम अपने कर्मचारियों का ख्याल रखते हैं..... '

50 लाख रुपये की इंश्योरेंस कवर की मांग
ऑल इंडिया स्टेशन मास्टर एसोसिएशन (एआईएसएमए) के मुताबिक अबतक 113 स्टेशन मास्टरों की इस महामारी की वजह से मौत हो चुकी है और ज्यादातर इस साल दूसरी लहर में हुई है। रेलवे प्रोटेक्शन फोर्स (आरपीएफ) ने भी 50 लोगों को खो दिया है। अब एसोसिएशन ने रेलवे बोर्ड के अलावा कई रेल डिविजनों को खत लिखकर उनमें से हर एक के लिए 50 लाख रुपये का स्पेशल इंश्योरेंस कवर और तत्काल वैक्सीनेशन की मांग की है। इस खत में यह भी कहा गया है कि क्योंकि कई स्टेशन मास्टर बीमार पड़ रहे हैं, बचे हुए कर्मचारियों को बहुत ज्यादा काम करना पड़ रहा है, क्योंकि स्टेशनों को बिना स्टेशन मास्टरों के नहीं छोड़ा जा सकता।

कर्मचारी संगठन रेल मंत्री को भी लिख चुके हैं खत
उधर रेलवे के कर्मचारी यूनियनों ने भी कहा है कि करीब 1 लाख कर्मचारी कोरोना वायरस की चपेट में आ चुके हैं, जिनमें से अबतक दो-तिहाई ठीक हो चुके हैं। रेलवे बोर्ड को लिखी चिट्ठी में एआईएसएमए के महासचिव सुनील कुमार ने कहा है कि 'महामारी और लॉकडाउन की शुरुआत से स्टेशन मास्टरों के अलावा बाकी रेल कर्मचारी और फ्रंटलाइन स्टाफ कोरोना वॉरियर्स की तरह लड़ रहे हैं और राष्ट्र का पहिया जारी रखने के लिए हम अपनी सेवाएं दे रहे हैं......लेकिन, दुख के साथ कहना पड़ रहा है कि अभी तक किसी ने हमारी बातों पर सकारात्मक ध्यान नहीं दिया है।' कुछ दिन पहले ही रेलवे के सबसे बड़े यूनियन ऑल इंडिया रेलवेमेंस फेडरेशन ने रेल मंत्री पीयूष गोयल को खत लिखकर कोविड की वजह से जान गंवाने वाले रेल कर्मचारियों को फ्रंटलाइन वर्कर की तरह ही मुआवजा देने की मांग की थी। इसने कहा था कि रेल कर्मचारियों को भी 50 लाख रुपये बतौर मुआवजा मिलनी चाहिए, ना कि 25 लाख रुपये जो कि दिए जा रहे हैं।

फिलहाल कर्मचारियों के वैक्सीनेशन पर है रेलवे का फोकस
इस बीच रेल अधिकारियों का कहना है कि इस समय रेल कर्मचारियों के वैक्सीनेशन पर फोकस है। दिल्ली के डिविजनल रेलवे मैनेजर एससी जैन ने कहा है, 'हमारे सभी स्टाफ को वैक्सीन लग जाए यह हमारी सबसे बड़ी प्राथमिकता है। हम राज्य सरकारों से लगातार समन्वय बनाए हुए हैं।' बता दें कि जब फ्रंटलाइन वर्कर्स को वैक्सीन की डोज शुरू की गई थी तो रेलवे के मेडिकल स्टाफ के साथ-साथ आरपीएफ पर्सनल को भी टीके लगाए गए थे। लेकिन, टिकट चेकर, स्टेशन मास्टर, रेलवे के ड्राइवर और गार्ड जैसे कर्मचारी उससे छूट गए थे।












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