गर्मी और उमस से खत्‍म हो जाएगा कोरोना वायरस का संक्रमण? जानिए क्‍या कहता है ये नया शोध

नई दिल्‍ली। कोरोना वायरस का पहला मामला बीते साल दिसंबर में चीन के वुहान में सामने आया था। उसके बाद से ये वायरस धीरे-धीरे दुनिया के 168 देशों में अपने पैर पसार चुका है। बात अगर भारत की करें तो इस जानलेवा वायरय से अबतक 650 लोग संक्रमित हो चुके हैं और 13 लोगों की मौत हो चुकी है। इसे लेकर दुनिया भर में सरकारें अपने नागरिकों को सतर्क कर रही हैं और इस वायरस के संक्रमण से बचने के लिए जानकारी साझा कर रही हैं। लेकिन इसे लेकर अफवाहों का बाजार भी गर्म है, और इस कारण लोगों के मन में कई तरह के सवाल हैं। सबसे बड़ा सवाल ये कि क्‍या तापमान बढ़ने से कोरोना वायरस खत्‍म हो जाएगा?

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    कोरोना वायरस का पहला मामला बीते साल दिसंबर में चीन के वुहान में सामने आया था। उसके बाद से ये वायरस धीरे-धीरे दुनिया के 168 देशों में अपने पैर पसार चुका है।

    एक नए अध्ययन में पाया गया है कि SARS-CoV-2 नाम का नया कोरोनावायरस, गर्म और आद्रता वाली जगहों पर उस तरह नहीं फैलता जितना कि ठंडे क्षेत्रों में फैलता है। हालांकि, सामाजिक विज्ञान अनुसंधान नेटवर्क में प्रकाशित प्रारंभिक विश्लेषण इस मामले को लेकर अभी भी समीक्षा कर रही है। आने वाले समय में इसका सटीक जवाब मिल सकता है। दुनियाभर में 22 मार्च तक संक्रमण का आंकड़ों का विश्लेषण कर मैसाचुसैट्स इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी (MIT) के दो शोधकर्ताओं ने बताया कि इस महामारी के मामलों का तापमान और उमस से सीधा संबंध हैं।

    शोध में पता चला कि 90 प्रतिशत मामले उन देशों में सामने आए हैं जहां तापमान 3 से 17 डिग्री सेल्सियस के बीच था और अब्सल्यूट ह्यूमिडिटी 4 और 9g/m3 के बीच थी। आपको बता दें कि अब्सल्यूट ह्यूमिडिटी प्रति वर्ग मीटर क्षेत्र में जल वाष्प की माप होता है। इन शोधकर्ताओं में से एक युसुफ जमील ले बताया कि तापमान, उमस और संक्रमण का संबंध लगातार बढ़ता जा रहा है। तापमान और वायरस के संक्रमण का संबंध कमजोर दिख रहा है क्योंकि ब्राजील, भारत और मलेशिया जैसे देशों से भी मामले सामने आ रहे हैं। उन्होंने कहा कि अब्सल्यूट ह्यूमिडिटी एक महत्वूर्ण कारक हो सकती है, लेकिन इसे प्रयोगशाला में मापने के बाद ही इसके बारे में कुछ कहा जा सकता है।

    पहले के शोध में क्या कहा गया था?

    COVID-19 बीमारी Sars-CoV-2 नामक वायरस से होती है। यह 2003 में फैले SARS-Cov से जुड़ा है। SARS-Cov अधिक तापमान पर जीवित नहीं रह पाया था। इससे पहले किए गए दो शोध में पता चला था कि कोरोना वायरस के संक्रमण पर मौसम का असर पड़ता है और यह ठंड और सूखे मौसम में तेजी से फैलता है। ये शोध चीन और स्पेन, पुर्तगाल और फिनलैंड के शोधकर्ताओं ने किए थे। इससे हटकर MIT का शोध यह कहता है कि अकेले तापमान से कोरोना के संक्रमण को नहीं रोका जा सकता। इसके लिए उमस भी एक महत्वपूर्ण कारक है। उमस के महत्वपूर्ण होने के कारण अमेरिका और यूरोप में मौसम की वजह से इस वायरस को रोक पाना मुश्किल नजर आ रहा है क्योंकि यहां तापमान तो बढ़ेगा लेकिन मौसम सूखा रहेगा। अगले कुछ महीनों तक यही हाल भारत का रहने वाला है।

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