उत्‍तर प्रदेश के पश्चिमी शहरों में चुनाव बाद भड़क सकती हैं हिंसा, मेरठ के हालात में सुधार

riots
मेरठ। गत दिन शनिवार को मेरठ जिले में एक प्‍याऊ के मामले को लेकर हुए बवाल के बाद हिंसा भड़की थी लेकिन मुजफ्फरनगर की हिंसा से सबक ले चुके लोग वापस से सड़कों पर नहीं उतरना चाहते थे इसलिए बवाल थोड़ी ही देर में थम गया। प्रशासन की इतनी सख्‍ती के बाद हिंसा हो जाना जिसमें तीन लोगों का मौके पर मारा जाना व स्‍वयं पुलिस प्रशासन के ऊपर ताबड़तोड़ फायरिंग कर देना कहीं न कहीं फिर से सांप्रदायिक दंगे का सवाल उठाता है।

खुफिया एजेंसियों ने दावा किया है कि लोक सभा चुनाव 2014 के बाद एक बार फिर से उत्‍तर प्रदेश के पश्चिमी जिलों को दंगों की आग में झोंकने की योजना है। एजेंसियों ने यह भी कहा है कि यह दंगा आने वाली सरकार को बदनाम करने के लिए एक साजिश होगी। उधर, सुरक्षा एजेंसियों ने आशंका जताई है कि लोकसभा चुनाव के बाद उत्‍तर प्रदेश का माहौल फिर से बिगड़ सकता है। गृह विभाग के सूत्रों की मानें तो इस बार चुनाव नतीजों के फौरन बाद ही कई जगहों पर संघर्ष की स्थिति पैदा हो सकती है। खास तौर पर ऐसी जगहों पर जहां सांप्रदायिक संवेदनशीलता हो या किसी वर्ग विशेष की अधिकता हो।

शनिवार को मेरठ में हुई सांप्रदायिक झड़प के बाद माहौल फिलहाल शांत है। गौरतलब है कि हिंसा में 50 से ज्‍यादा लोग घायल हुए हैं। इलाके में भारी तादाद में सुरक्षा बलों की तैनाती की गई है। दूसरी जगहों से भी सुरक्षा बलों को बुलाया गया है। हालात की समीक्षा के लिए प्रमुख सचिव गृह और डीजीपी मेरठ (यूपी) पहुंचे हैं। जांच के बाद वह मुख्‍यमंत्री अखिलेश यादव को रिपोर्ट देंगे। झड़प के सिलसिले में कई लोगों के खिलाफ मामला दर्ज किया गया है। इन पर सांप्रदायिक सौहार्द बिगाड़ने का आरोप है।

दंगा भड़का तो बिगड़ सकता है भाजपा का खेल:

यूपी के पश्चिमी जिलों में अगर एक बार फिर दंगा भड़कता है तो शायद ये भाजपा के लिए अच्‍छी खबर नहीं होगी। सभी राजनीतिक दलों द्वारा चुनाव पहले से ही यह आरापे लगाए जा रहे हैं कि भाजपा एक अगर सरकार में आई तो देश दंगों की आग में झुलसेगा। ऐसे में अगर मेरठ दंगा वापस भड़कता है तो भाजपा की छवि को काफी चोट लग सकती है। हालांकि यूपी में तैनात सपा सरकार ने अपनी ओर से जिला प्रशासन को सख्‍त ख्‍ेतावनी देते हुए कहा है कि हालात को जल्‍द से जल्‍द काबू में ले लिया जाए और किसी भी तरह से सांप्रदायिक ताकतों को सड़कों पर उतरने का मौका न दिया जाए।

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