कोरोना की डेल्टा स्ट्रेन से लड़ने में कम प्रभावी है फाइजर की वैक्सीन, लांसेट की रिपोर्ट में खुलासा
कोरोना की डेल्टा स्ट्रेन से लड़ने में कम प्रभावी है फाइजर की वैक्सीन, लांसेट की रिपोर्ट में खुलासा
नई दिल्ली, जून 4 । कोरोना की दूसरी लहर में मची तबाही के बाद सरकार का फोकस कोरोना वैक्सीनेशन की रफ्तार पर है। केंद्र और राज्य सरकारी चाहती हैं कि जल्ज से जल्द लोगों को वैक्सीन लगाकर कोरोना वायरस के खिलाफ लड़ाई को मजबूत किया जा सके, लेकिन द लांसेट मैगजीन की ताजा रिपोर्ट चौंकने वाली है। फाइजर के कोरोना वैक्सीन का इंतजार कर रहे भारतीयों के लिए इसे बुरी खबर कहा जाए तो गलत नहीं होगा। द लांसेट मैगजीन के एक रिसर्च में ये पाया गया है कि फाइजर-बायोएनटेक वैक्सीन भारत में पाए गए कोरोना वायरस के स्ट्रेन डेल्टा (बी.1.617.2) पर कम प्रभावशाली साबित हो रहा है।

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फाइजर के वैक्सीन पर उठे सवाल
द लांसेट की रिपोर्ट के मुताबिक फाइजर की वैक्सीन कोरोना वायरस के डेल्टा स्ट्रेन से लड़ने के लिए कम प्रभावशाली है। रिपोर्ट के मुताबिक फाइजर वैक्सीन डेल्टा स्वरूप से लड़ने के लिए कम एंटीबॉडी पैदा कर पा रहा है। यही नहीं एंटीबॉडीज डेवलप करने के लिए उम्र का फैक्टर भी काम कर रहा है, यानी डेल्टा से लड़ने के लिए एंटीबॉडी बढ़ती उम्र के साथ कमजोर होता जा रहा है और ये लेवल समय के साथ लगातार गिरता हुआ भी देखा गया है।
लांसेट की रिपोर्ट में उठे सवाल
लांसेट की रिपोर्ट में जिक्र है कि फाइजर-बायोएनटेक वैक्सीन की सिंगल डोज भी डेल्टा स्ट्रेन से लड़ने के लिए नाकाफी है। इसका मतलब है कि सिर्फ एक खुराक से लोगों में डेल्टा से लड़ने के लिए जरूरी एंटीबॉडी पैदा हो जाए इसकी संभावना कम है जबकि कोरोना वायरस के ही पहले स्ट्रेन अल्फा से लड़ने के लिए एंडीबॉडी जेनरेट कर पा रहा है। ब्रिटेन के फ्रांसिस क्रीक इंस्टीट्यूट में रिसर्चर्स ने अध्ययन किया और पाया कि किसी वैक्सीन के लिए एंटीबॉडी का स्तर विकसित करना ही टीके को प्रभावशाली नहीं बनाता बल्कि इसके लिए संभावित रोगियों पर भी अध्ययन किया जाना चाहिए था। शोधकर्ताओं ने कोरोना से लड़ने के लिए तैयार फाइजर-बायोएनटेक वैक्सीन की एक या दोनों डोज़ ले चुके 250 लोगों पर रिसर्च किया था। इसमें पहली डोज लेने वालों पर तीन महीने बाद तक एंटीबॉडी का क्या असर रहा ये भी अध्ययन किया गया।












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