कोविड-19 के खिलाफ सिंगल डोज वैक्सीन बेहद कम सुरक्षित- स्टडी में दावा
नई दिल्ली, 18 अगस्त। कोरोना वैक्सीन को लेकर किए गए एक अध्ययन में पाया गया है कि वैक्सीन की सिंगल डोज ने डेल्टा वेरिएंट के बढ़ने के दौरान कोरोना वायरस के एसिम्प्टोमेटिक मामलों के खिलाफ कोई सुरक्षा नहीं दी है। दिल्ली के गंगा राम अस्पताल में यह अध्ययन किया गया है।

यूरोपियन जर्नल ऑफ इंटरनल मेडिसिन में प्रकाशित अध्ययन में कहा गया है कि 30 दिनों के अंतर पर दी गई कोविशील्ड वैक्सीन की दो डोज एसिम्प्टोमेटिक मामलों में सिर्फ 28 प्रतिशत, मध्यम या गंभीर संक्रण में 67 प्रतिशत जबकि ऑक्सीजन सपोर्ट पर रह रहे मरीजों के लिए 76 प्रतिशत प्रभावी थी।
इसके अलावा अध्ययन में पाया गया है कि टीके की दो डोज कोविड-19 से मौत को रोकने में 97 प्रतिशत प्रभावी है।
क्या कहता है अध्ययन?
अध्ययन में कहा गया है "हाल ही में भारत में डेल्टा वेरिएंट के चलते कोविड-19 संक्रमण में एक अभूतपूर्व वृद्धि देखी गई थी। नई दिल्ली में अप्रैल और मई 2021 में रिपोर्ट किए गए कुल मामले महामारी की शुरुआत से मिले 13 महीनों में रिपोर्ट किए गए कुल मामलों से ज्यादा थे। हमने इस उछाल के दौरान कोविशील्ड के असर का अनुमान लगाया।"
सर गंगा राम अस्पताल के मुताबिक इस अध्ययन में अस्पताल में काम करने वाले कर्मचारियों को शामिल किया गया था। इनमें से 2716 को दोनों डोज दी गी थी और 623 को कोविशील्ड की केवल एक डोज दी गई थी। 927 लोग 30 अप्रैल तक बिना टीकाकरण के रहे जबकि 20 को कोवैक्सीन या फाइजर शॉट मिला था और उन्हें अध्ययन से बाहर रखा गया था।
अध्ययन के मुताबिक कुल 4,276 में से 560 (13.1%) कर्मचारी मार्च और मई के बीच कोविड -19 से संक्रमित हुए। इनमें से 9 (1.6%) फॉलो-अप के लिए नहीं पहुंचे, 10 (1.8%) में एसिम्प्टोमेटिक संक्रमण था, 458 (81.79%) में हल्की बीमारी और 57 (10.2%) में मध्यम और 26 (4.64%) में गंभीर संक्रमण था। इनमें से छह (1.06%) की मौत हुई थी।
सकारात्मक परीक्षण करने वालों में 61 अस्पताल में भर्ती हुए थे और 499 होम क्वारंटाइन में रहे।
पहले से संक्रमित लोग ज्यादा सुरक्षित
जो लोग कोरोना वायरस से पहले संक्रमित थे, वे अध्ययन के दौरान अधिक सुरक्षित पाए गए। इनमें एसिम्प्टोमेटिक के खिलाफ 93% और मध्यम से गंभीर बीमारी के खिलाफ 89% की प्रभावशीलता देखी गई थी।
अध्ययन में पाया गया कि दूसरी बीमारी से ग्रसित व्यक्तियों में कुल छह मौतें (बिना टीकाकरण के 5 और सिंगल डोज लेने वाले 1) 65-93 वर्ष के आयु वर्ग में हुईं। इसके अलावा सभी मौतें उन लोगों में हुईं, जिनके पास कोविड -19 संक्रमण का कोई रिकॉर्ड नहीं था।
अध्ययन में कहा गया है कि वैक्सीन की तुलना में कोविड -19 संक्रमण हो चुके लोगों में वायरस के खिलाफ अधिक सुरक्षा पाई गई।












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