क्या कोरोना का डेल्टा प्लस वेरिएंट फेफड़ों के लिए है ज्यादा घातक? विशेषज्ञ ने दिया जवाब
नई दिल्ली, 27 जून: कोरोना वायरस लगातार म्यूटेट होकर खुद को बदल रहा है। अब उसका डेल्टा प्लस वेरिएंट कई राज्यों में मिला है। जिस वजह से सरकार की चिंता बढ़ गई है। वैक्सीनेशन पर राष्ट्रीय तकनीकी सलाहकार समूह के प्रमुख डॉ. एनके अरोड़ा के मुताबिक डेल्टा प्लस वेरिएंट फेफड़ों पर ज्यादा सक्रिय रहता है। इसके अलावा ऊतकों से इसका जुड़ाव ज्यादा रहता है, लेकिन इस बात की कोई गारंटी नहीं है कि इससे संक्रमित होने पर मरीज गंभीर हो जाएगा या फिर ये ज्यादा संक्रामक है। हालांकि कई देशों में इसके मामले तेजी से बढ़ रहे हैं।

पीटीआई को दिए एक इंटरव्यू में अरोड़ा ने कहा कि डेल्टा प्लस कोरोना वायरस श्लैष्मिक कोशिकाएं (Mucosal Cells) पर ज्यादा आकर्षित होता है, लेकिन ये फेफड़ों को कितना नुकसान पहुंचाएगा, इस बारे में अभी कुछ नहीं कहा जा सकता है। इसके अलावा डेल्टा प्लस से पॉजिटिव होने का ये मतलब नहीं है कि मरीज गंभीर अवस्था में पहुंच जाएगा। उनके मुताबिक डेल्टा प्लस स्ट्रेन का प्रभाव तभी स्पष्ट होगा जब अधिक मामलों की पहचान की जाएगी, लेकिन ऐसा लग रहा है कि जिन्होंने टीके की एक या दो खुराक ले रखी है उन पर ये कम असर दिखा रहा है।
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डॉ. अरोड़ा के मुताबिक अभी जितने केस की पहचान देशभर में हुई है, डेल्टा प्लस के मामले उससे ज्यादा भी हो सकते हैं, क्योंकि इसमें भी बिना लक्षण वाले मरीज होंगे। बिना लक्षण वाले लोग जांच नहीं करवाते, इस वजह से उनकी पहचान कम हो पाती है। फिलहाल अभी इस पर करीब से नजर बनाते हुए इसके प्रसार को देखने की जरूरत है।
तीसरी लहर का बनेगा कारण?
वहीं जब उनसे पूछा गया कि क्या डेल्टा प्लस वेरिएंट कोरोना की तीसरी लहर के लिए जिम्मेदार होगा, इस पर उन्होंने कहा कि अभी इसका आंकलन करना मुश्किल है। हर लहर वेरिएंट और म्यूटेशन से जुड़ी हुई होती है, लेकिन जब तक डेल्टा प्लस पर विस्तार से अध्ययन नहीं हो जाता, तब तक इस बातों का जवाब देना मुश्किल है।












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