बीजेपी प्रत्याशी ने सिर्फ एक साल में कर ली एमकॉम!
भोपाल। मध्य प्रदेश के भोजपुर विधानसभा क्षेत्र से बीजेपी के प्रत्याशी सुरेंद्र पटवा नामांकन में गलत जानकारी देने के कारण विवादों में फंस गए हैं। इस बार चुनाव आयोग के पास जमा कराए गए शपथ पत्र में पटवा ने जानकारी दी है कि उन्होंने 1984 में एमकॉम की डिग्री प्राप्त की है, जबकि 2013 के शपथ पत्र में उन्होंने बताया था कि 1983 में उन्होंने एमकॉम किया था। अब विपक्षी आरोप लगा रहे हैं कि आखिर सुरेंद्र पटवा ने एक साल में कैसे एमकॉम कर ली।

नामांकन शैक्षणिक डिग्री के अलावा बैंक से संबंधित जानकारी के लेकर भी सुरेंद्र पटवा सवालों के घेरे में है। सुरेंद्र पटवा पर आरोप है कि उन्होंने पत्नी पर कर्ज से जुड़ी जानकारी चुनाव आयोग को नहीं दी है। सुरेन्द्र पटवा के खिलाफ दो निर्दलीय प्रत्याशियों ने आपत्ति दर्ज कराई है। इनके नाम हैं- मान सिंह रघुवंशी और रविन्द साहू। इनका दावा है कि सुरेंद्र पटवा ने नामांकन पत्र के एक भाग में अपने ऊपर 34 और पत्नी पर सवा दो करोड़ का कर्ज दिखाया है, लेकिन इसी शपथ पत्र के दूसरे भाग में पटवा ने खुद पर 14 करोड़ और पत्नी के नाम कोई कर्ज न होने की बात कही है।
निर्दलीय उम्मीदवारों की आपत्ति के बाद रिटर्निंग ऑफिसर ने सुरेंद्र पटवा के नामांकन को मंजूर नहीं किया है। अब मंगलवार को उनके नामांकन पर फैसला किया जाएगा। सुरेंद्र पटवा की ही तरह उदयपुरा से कांग्रेस प्रत्याशी देवेन्द्र पटेल का नामांकन पत्र भी अटक गया था। उनके खिलाफ बीजेपी की शिकायत थी कि उन्होंने शपथ पत्र में कम पैसे के टिकट लगाए। हालांकि, मंगलवार को निर्वाचन आयोग ने आपत्ति को खारिज कर दिया।
भोपाल दक्षिण-पश्चिम से कांग्रेस प्रत्याशी पीसी शर्मा के नामांकन को लेकर भी चुनाव आयोग के पास शिकायत की गई है। उन पर शपथ पत्र में अपराध छिपाने की शिकायत हुई है। दूसरी ओर पीसी शर्मा का दावा है कि उन्होंने शपथ पत्र में पूरी जानकारी दी है। अशोकनगर से कांग्रेस प्रत्याशी जजपाल सिंह जज्जी के नामांकन पर भी आपत्ति जताई गई है। भाजपा प्रत्याशी लड्डूराम कोरी समेत तीन निर्दलीय उम्मीदवारों ने आयोग की स्क्रूटनी समिति के समक्ष आपत्ति दर्ज कराई है।
याचिकाकर्ताओं ने जज्जी के जाति प्रमाण पत्र समेत 6 तथ्यों पर आपत्ति जताई। जज्जी पहले खुद को सामान्य जाति का बताकर चुनाव लड़ चुके हैं। उनके शैक्षणिक रिकॉर्ड और शस्त्र लाइसेंस में भी सामान्य जाति दर्ज है। वहीं, वे अनुसूचित जाति प्रमाण पत्र बनवाने के लिए खुद को हिंदू सिख घोषित कर चुके हैं। जब उन्होंने नगर पालिका अध्यक्ष का चुनाव लड़ा तो खुद को पिछड़ी जाति का बताया था। इस प्रमाण पत्र की जांच हुई तो उसे निरस्त किया गया। वहीं, अब उन्होंने खुद को अनुसूचित जाति का बताया है।












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