कांग्रेस के 'न्याय पत्र' पर क्यों घिर गए हैं राहुल गांधी? जोड़-तोड़ की राजनीति पर उठे सवाल
Telangana Politics: तेलंगाना में भारत राष्ट्र समिति (BRS) के 6 एमएलसी के रातों-रातों रात दलबदल कर कांग्रेस में शामिल होने के बाद कांग्रेस और उसके नेता राहुल गांधी विपक्षी दलों के निशाने पर हैं।
इस घटना के बाद कांग्रेस पार्टी और लोकसभा में प्रतिपक्ष के नेता राहुल गांधी दोनों पर ही बीआरएस और भाजपा निशाना साध रही है। इनपर संविधान बचाने के नाम पर दोहरा रवैया अपनाने का आरोप लगा रही है।

बीआरएस ने कांग्रेस को मेनिफेस्टो दिखाकर दिखाया आईना
बीआरएस के नेता और तेलंगाना के पूर्व कैबिनेट मंत्री केटी रामाराव ने तो एक्स पर कांग्रेस के लोकसभा चुनावों के मेनिफेस्टो का स्क्रीनशॉट लगाकर राहुल गांधी को आईना दिखा दिया है। इसमें कांग्रेस ने संविधान की 10वीं अनुसूचित में संशोधन करके दलबदल-विरोधी कानून में बदलाव करके ऐसा करने वालों की संसद या विधानसभा की सदस्यता खुद-ब-खुद समाप्त हो जाने का प्रावधान करने का वादा किया था।
'क्या इस तरह से आप संविधान को बचाने जा रहे हैं'
अब केटीआर ने राहुल गांधी से सवाल किया है कि 'क्या इस तरह से आप संविधान को बचाने जा रहे हैं।' उन्होंने सवाल किया है, 'बीआरएस सांसद केशव राव ने कांग्रेस में शामिल होने के बाद इस्तीफा दे दिया। उनके फैसले का स्वागत है। उन बीआरएस एमएलए का क्या जो कांग्रेस के टिकट पर लोकसभा चुनाव लड़ा? उन आधा दर्जन अन्य बीआरएस विधायकों का क्या जो दलबदल कर कांग्रेस में चले गए?' उन्होंने राहुल से सवाल किया है कि 'देश आप पर कैसे विश्वास करेगा?'
क्या राहुल बाबा के लिए यही जय संविधान है?- बीजेपी
बीजेपी ने भी राहुल गांधी पर यह कहकर हमला किया है कि क्या यह 'जोड़-तोड़ की राजनीति' नहीं है? बीजेपी के राष्ट्रीय प्रवक्ता शहजाद पूनावाला ने एक्स पर लिखा है, 'जब कोई बीजेपी ज्वाइन करता है तो कांग्रेस इकोसिस्टम और यूट्यूब जमात के लिए ऑपरेशन लोटस है....जब कांग्रेस किसी पार्टी (इस केस में बीआरएस) से एमएलए, एमलसी, एमपी तोड़ती है तो ऑपरेशन पिन ड्रॉप साइलेंस? क्या राहुल बाबा के लिए यही जय संविधान है? क्या संवैधानिक नैतिकता के प्रचारक पहले इन सबसे इस्तीफा दिलवाएंगे?'
बीआरएस पर भी लग चुके हैं ऐसे ही आरोप
इससे पहले बीजेपी और बीआरएस पर इसी इसी तरह के आरोप लगते रहे हैं। कुछ रिपोर्ट के मुताबिक जब तेलंगाना में के चंद्रशेखर राव की सरकार थी तब 2014 से 2018 के बीच पहले कार्यकाल में दूसरे दलों से 4 सांसदों, 25 विधायकों और 18 एमएलसी को बीआरएस में शामिल कराया।
दूसरे कार्यकाल में बीआरएस में 14 एमएलए दूसरी पार्टियों से शामिल हुए। अभी जितने नेता भी बीआरएस छोड़कर कांग्रेस में गए हैं,उनमें से ज्यादातर पहले वहीं से पार्टी में आए थे।
भाजपा पर भी लगते रहे हैं दलबदल कराने के आरोप
इसी तरह से बीजेपी पर बीते 10 वर्षों में तेलंगाना के पड़ोसी कर्नाटक राज्य से लेकर, मध्य प्रदेश, गोवा और गुजरात जैसे राज्यों में दूसरे दलों के सांसद, विधायकों के दलबदल कराने के आरोप लग चुके हैं।
अब किस संविधान की दुहाई देगी कांग्रेस?
मतलब, दलबदल के मामले में कोई भी राजनीतिक दल खुद को बेदाग नहीं कह सकता। लेकिन, कांग्रेस ने जिससे खुद को हाल के दिनों में सबसे ज्यादा पीड़ित बताया है और उसे मेनिफेस्टो तक में जगह देकर संविधान की दुहाई देने की कोशिश की है, तेलंगाना की घटना से उसके इस नैरेटिव की हवा निकल रही है।












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