'पीएम के पास मणिपुर जाने के लिए एक मिनट भी नहीं', कांग्रेस ने ड्रोन-रॉकेट हमलों पर केंद्र को घेरा
Manipur violence: पूर्वोत्तर राज्य मणिपुर में हिंसा का नया दौर शुरू हो गया है। उग्रवादी आबादी वाले इलाकों में ड्रोन से बम और आरपीजी के जरिए हमले कर रहे हैं। ऐसे में मणिपुर हिंसा को लेकर कांग्रेस ने मोदी सरकार पर अब तक का सबसे बड़ा हमला किया है।
कांग्रेस ने मणिपुर के लिए केंद्र सरकार को जिम्मेदार ठहराया है। पार्टी नेता सुप्रिया श्रीनेत ने कहा, "मणिपुर को जलते हुए 16 महीने बीत चुके हैं। इंटरनेट बंद है, कर्फ्यू लगा दिया गया है और परीक्षाएं रद्द कर दी गई हैं। इन सबके लिए कौन जिम्मेदार है? आरपीजी के ज़रिए हमले किए जा रहे हैं। यह कैसे संभव हो सकता है?"

कांग्रेस प्रवक्ता सुप्रिया श्रीनेत ने पार्टी के मणिपुर कांग्रेस प्रमुख के मेघचंद्र, मणिपुर सांसद ए बिमोल अकोईजाम और मणिपुर के एआईसीसी प्रभारी गिरीश चोडांकर के साथ एक संयुक्त प्रेस कॉन्फ्रेंस की। जिसमें कांग्रेस नेता ने कहा, "इस देश का एक राज्य पिछले 16 महीनों से जल रहा है और इस देश के प्रधानमंत्री के पास मणिपुर जाने के लिए एक मिनट भी नहीं है।"
उन्होंने यह भी कहा कि राहुल गांधी तीन बार मणिपुर गए और शांति की अपील की, जबकि प्रधानमंत्री मोदी ने ऐसा नहीं किया।
प्रधानमंत्री पर कांग्रेस का बड़ा आरोप
कांग्रेस नेता सुप्रिया श्रीनेत ने कहा, "मणिपुर को जलते हुए 16 महीने बीत चुके हैं। मणिपुर में एक नई तरह की हिंसा भड़क उठी है। पिछले 10 दिनों में मणिपुर में हिंसा में करीब 11-12 लोग मारे गए हैं। अब मणिपुर में आरपीजी लहराए जा रहे हैं। मणिपुर के गांवों में ड्रोन का इस्तेमाल किया जा रहा है। मणिपुर में एक पूर्व मुख्यमंत्री के घर पर रॉकेट से हमला किया जा रहा है। राज्यपाल के घर पर पत्थर फेंके जा रहे हैं।"
उन्होंने आगे कहा, "इस देश का एक राज्य पिछले 16 महीनों से जल रहा है और इस देश के प्रधानमंत्री के पास मणिपुर जाने के लिए एक मिनट भी नहीं है। वे अमेरिका, फ्रांस, ब्रिटेन, ग्रीस, रूस, यूक्रेन जाते हैं, लेकिन मणिपुर नहीं जाते। क्या लोकतंत्र में किसी भी सभ्य सरकार को यह स्वीकार्य है कि इस देश का प्रधानमंत्री एक राज्य को अपने हाल पर जलने के लिए छोड़ दे?"
बता दें कि 2 सितंबर के बाद मणिपुर में हिंसा का नया दौर शुरू हो चुका है। राज्य सरकार ने पूरे राज्य में इंटरनेट सेवाओं को पांच दिनों के लिए निलंबित कर दिया। इसी के साथ केंद्र ने सीआरपीएफ के 2 हजार जवानों को भी हिंसा ग्रस्त राज्य भेजने का फैसला किया है।












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