मुफ्त उपहार जैसे मुद्दों पर कांग्रेस का EC को जवाब, कहा-आयोग के पास इसका अधिकार नहीं
हिमाचल प्रदेश और गुजरात में आगामी विधानसभा चुनावों से पहले कांग्रेस ने शुक्रवार को कहा कि चुनाव आयोग (EC) के पास मुफ्त उपहार जैसे मुद्दों को विनियमित करने का अधिकार नहीं है। साथ ही देश की सबसे पुरानी पार्टी कांग्रेस ने आयोग से चुनावी कानूनों को ठीक से लागू करके निष्पक्ष चुनाव कराने का भी आग्रह किया।

4 अक्टूबर को चुनाव आयोग के पैनल ने राजनीतिक दलों को अपने चुनावी वादों की वित्तीय स्थिरता के बारे में मतदाताओं को ईमानदारी से सूचित करने के लिए मॉडल कोड को संशोधित करने का प्रस्ताव दिया था। यह प्रस्ताव मुफ्तखोरी बनाम कल्याणकारी योजनाओं की चर्चा के बीच आया है। जिसने एक नए विवाद को भी जन्म दे दिया है। चुनाव आयोग को कांग्रेस पार्टी ने तर्क दिया कि इस तरह की चिंताएं एक स्वस्थ लोकतांत्रिक व्यवस्था की द्वंद्वात्मकता का एक आवश्यक हिस्सा हैं और मतदाताओं की बुद्धिमत्ता, निर्णय और विश्लेषण पर निर्भर करती हैं।
आयोग को कांग्रेस की तरफ से जयराम रमेश ने पत्र लिखा। इस पत्र के जरिए उन्होंने कहा कि यह वास्तव में कुछ ऐसा है, जिसे तय किया जाना है। चाहे वह चुनाव से पहले हो या चुनाव के बाद। उन्होंने कहा कि चुनावी सजा या चुनावी स्वीकृति और इनाम के रूप में हो कि मतदाता ऐसे चुनावी वादों या अभियान आश्वासनों की समझदारी का फैसला करता है। इसके अलावा रमेश ने कहा कि आयोग की तरफ से पहले बहुत सामंजस्य के साथ काम किया गया है।
वहीं, एक कॉन्फ्रेंस को संबोधित करते हुए कांग्रेस प्रवक्ता सुप्रिया श्रीनेत ने कहा कि यह मामला सबसे पहले तब उठा, जब प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 16 जुलाई को मुफ्त उपहार का मुद्दा उठाया था। इसके बाद चुनाव आयोग ने इस मुद्दे को उठाया और पार्टियों को उनकी प्रतिक्रिया के लिए लिखा। उन्होंने कहा कि लोकतंत्र में मुफ्त उपहार के मुद्दे पर बहस करना ठीक नहीं है। क्योंकि किसी भी सरकार का यह कर्तव्य है कि वह गरीब और उत्पीड़ित वर्गों की देखभाल करे और उनके उत्थान के लिए योजनाएं तैयार करे।
कांग्रेस ने चुनाव आयोग के प्रस्ताव के जवाब में कहा है कि यह मुद्दा चुनाव बॉडी के अधिकार क्षेत्र में नहीं आता है। इसके अलावा कांग्रेस ने सवाल पूछते हुए कहा कि चुनाव आयोग मुफ्त की परिभाषा पर कैसे फैसला कर सकता है। ऐसे में आयोग को मौजूदा चुनाव कानूनों को ठीक से लागू करना चाहिए। इसके अलावा अन्य ज्वलंत मुद्दे भी हैं जिन पर आयोग को ध्यान देने की जरूरत है।
चुनाव आयोग को पार्टी की प्रतिक्रिया में जयराम रमेश ने कहा कि आयोग ने अतीत में इस शक्ति के प्रयोग में बहुत समझदारी और संयम का प्रदर्शन किया है। इसके अलावा उन्होंने कहा कि दूसरे शब्दों में भारतीय दंड संहिता, 1860 के अध्याय IXA और जनप्रतिनिधित्व अधिनियम, 1951 में उल्लिखित चुनावी अपराध आयोग को यह निर्धारित करने में मदद करते हैं कि क्या कानूनी और अवैध है? उन्होंने कहा कि वास्तव में सांप्रदायिक बयानबाजी, अभद्र भाषा और अनुचित प्रभाव पर विशेष प्रतिबंध, अन्य सभी इन विधियों से आते हैं। ऐसे में अगर चुनाव आयोग इस तरह के प्रतिबंध पर विचार करता है, तो उसे पहले संसदीय मस्टर पास करने की आवश्यकता होगी।
इसके अलावा उन्होंने कहा कि राजनीतिक दलों और उम्मीदवारों के मार्गदर्शन के लिए आदर्श आचार संहिता, 2015 के भाग आठ में ईसीआई सामान्य दिशानिर्देश रखता है। वहीं, रमेश ने इस मुद्दे को लेकर कांग्रेस को अलग से समय दिए जाने की मांग की। उन्होंने कहा कि अगर भविष्य में आयोग की तरफ से इस मुद्दे पर कांग्रेस को अलग से समय दिया जाएगा, तो इन मुद्दों को आयोग को विस्तार से बताया जा सकेगा।
ये भी पढ़ें- UP में कांग्रेस जल्द करेगी नई टीम का गठन, प्रदेश अध्यक्ष की प्रियंका गांधी से मुलाकात में तय होगा फार्मूला












Click it and Unblock the Notifications