कांग्रेस ने अपने मुख्य चुनावी रणनीतिकार को लोकसभा चुनाव अभियान से हटाया, जानें क्या है बड़ा प्लान?

कांग्रेस पार्टी ने अपने मुख्य चुनावी रणनीतिकार को लोकसभा चुनाव की जिम्मेदारियों से मुक्त कर दिया है। सुनील कनुगोलू को कर्नाटक, तेलंगाना और यहां तक कि हिमाचल प्रदेश में भी कांग्रेस को जीत दिलाने का सबसे अहम किरदार माना जाता है।

एनडीटीवी की एक रिपोर्ट के मुताबिक सुनील कनुगोलू इस साल होने वाले लोकसभा चुनावों में कांग्रेस पार्टी के चुनावी अभियान में रणनीतिकार की भूमिका नहीं निभाएंगे।

congress election strategist removed

पहले 'टास्क फोर्स 2024' का हिस्सा थे-रिपोर्ट
सूत्रों के हवाले से दी गई रिपोर्ट के मुताबिक शुरू में वे कांग्रेस पार्टी के 'टास्क फोर्स 2024' का हिस्सा थे, लेकिन अब पार्टी ने उनकी जिम्मेदारियां सिर्फ महाराष्ट्र और हरियाणा तक सीमित कर दी है।

प्रशांत किशोर से भी नहीं बन पाई थी बात
प्रशांत किशोर के बाद सुनील कनुगोलू दूसरे ऐसे हाई-प्रोफाइल चुनावी रणनीतिकार हैं, जो लोकसभा चुनावों में कांग्रेस पार्टी की मदद करने से पहले ही किनारे हो गए हैं। दो साल पहले पीके से भी पार्टी की जम नहीं पाई थी और वह बातचीत से पीछे हट गए थे।

पीके के बारे में कहा जाता है कि वह कांग्रेस पार्टी के संगठन में जिस तरह का बदलाव चाहते थे, नेतृत्व उसके लिए राजी नहीं थी।

कर्नाटक और तेलंगाना में कांग्रेस की जीत के किरदार माने जाते हैं कनुगोलू
कांग्रेस पिछले साल कर्नाटक और तेलंगाना दोनों राज्यों में शानदार तरीके से जीती है। लोकसभा चुनावों के लिए भी दोनों राज्य उसके लिए अहम हैं। कनुगोलू की टीम भी वहां मौजूद है। फिर भी उन्हें लोकसभा चुनाव अभियान की रणनीतियों से दूर किया जाना चौंकाने वाला फैसला लग रहा है।

'लोकसभा चुनाव से उनका दूर रहना झटके की तरह'
कांग्रेस में महासचिव पद के रैंक एक वरिष्ठ नेता ने भी स्वीकार किया है कि लोकसभा चुनाव अभियान से उनका दूर रहना पार्टी के लिए एक 'झटके की तरह' है।

कांग्रेस राज्यों में जीत पर कर रही है फोकस?
लेकिन, उनके अनुसार कांग्रेस को लगता है कि अगर वह अपनी सूझबूझ से कांग्रेस के लिए बीजेपी से बड़े राज्य लेकर दिला सकें तो इससे पार्टी को दूरगामी फायदे होंगे।

कर्नाटक-तेलंगाना सरकार के लिए करते रहेंगे काम-रिपोर्ट
रिपोर्ट के अनुसार वैसे कनुगोलू कर्नाटक में कांग्रेस सराकर के लिए काम करते रहेंगे, जिन्हें वहां कैबिनेट मंत्री का दर्जा मिला हुआ है और वे मुख्यमंत्री सिद्दारमैया के प्राथमिक सलाहकार भी हैं। तेलंगाना में भी वह रेवंत रेड्डी सरकार की सहायता करते रहेंगे।

कांग्रेस में इनके महत्त्व को इसी बात से समझा जा सकता है कि पार्टी ने उन्हें मध्य प्रदेश और राजस्थान में रणनीति बनाने के काम पर लगाना चाहा था। लेकिन, कमलनाथ और अशोक गहलोत इनके बताए तरीके से काम करने के लिए राजी नहीं थे। दोनों राज्यों में कांग्रेस बुरी तरह हारी है।

जबकि, कर्नाटक और तेलंगाना दोनों राज्यों में कांग्रेस ने उन्हें खुली छूट दी थी और दोनों जगहों पर पार्टी को बड़ी कामयाबियां मिली हैं। लेकिन, लोकसभा चुनाव में पार्टी के सामने दिक्कत ये है कि उसे इंडिया ब्लॉक में कई दलों के साथ तालमेल करना है।

दूसरे दलों के लिए भी कर चुके हैं काम
वैसे वे 'आइडिया वाले इंसान माने जाते हैं, जो बड़ी जिम्मेदारियां संभाल सकते हैं'। वह 2019 में तमिलनाडु में कांग्रेस की सहयोगी डीएमके के साथ भी काम कर चुके हैं और यह गठबंधन वहां 39 में से 38 लोकसभा सीटें जीता था। 2014 में यह भाजपा के चुनाव अभियान का भी हिस्सा रह चुके हैं।

लगता है कि कांग्रेस पार्टी बहुत लंबे समय की रणनीति पर काम कर रही है। कनुगोलू की सहायता से पार्टी पिछले साल तीन राज्यों में तो जीत चुकी है। लेकिन, पिछले साल राजस्थान, छत्तीसगढ़ और मध्य प्रदेश के अलावा 2022 में पंजाब में बुरी तरह से पराजित हो चुकी है। 2017-2018 में चारों ही राज्यों में इसकी सरकारें बनी थीं।

चुनाव रणनीतिकार के लिए कुछ बड़ा सोच रही है कांग्रेस?
आज की तारीख में भाजपा की 12 राज्यों में अपनी सरकारें हैं, जबकि कांग्रेस के पास सिर्फ 3 रह गई हैं। ऐसे में लगता है कि पार्टी कनुगोलू की सेवा कुछ प्रमुख राज्यों जीतने के लिए लेना चाहती है।

हरियाणा में इसी साल विधानसभा चुनाव होने हैं और वहां लगातार दो कार्यकालों से बीजेपी के मुख्यमंत्री हैं। चुनाव महाराष्ट्र में भी होने हैं, जहां राजनीति उलझी हुई है और यहां भी कांग्रेस खुद के लिए बेहतर संभावनाएं देख रही है।

चुनाव तो आंध्र प्रदेश में भी इसी साल होना है, लेकिन अभी वहां कांग्रेस की जमीनी स्थिति बहुत कमजोर है। इसके अलावा ओडिशा, सिक्किम और अरुणाचल प्रदेश में भी चुनाव होने हैं, जहां कांग्रेस विपक्ष में है। झारखंड में कांग्रेस झारखंड मुक्ति मोर्चा की अगुवाई वाली गठबंधन सरकार में शामिल है और वहां भी इस साल इलेक्शन होने हैं।

इसके अलावा जम्मू और कश्मीर विधानसभा के लिए भी इस साल चुनाव करवाए जाने हैं। आर्टिकल 370 हटने के बाद यह पहला चुनाव होना है और इसलिए अगर कांग्रेस पार्टी ने कनुगोलू को यहां की जिम्मेदारी सौंपी तो यह उनके लिए बड़ा चैलेंज हो सकता।

Notifications
Settings
Clear Notifications
Notifications
Use the toggle to switch on notifications
  • Block for 8 hours
  • Block for 12 hours
  • Block for 24 hours
  • Don't block
Gender
Select your Gender
  • Male
  • Female
  • Others
Age
Select your Age Range
  • Under 18
  • 18 to 25
  • 26 to 35
  • 36 to 45
  • 45 to 55
  • 55+