सीएम उमर अब्दुल्ला की धमकी से बढ़ी कांग्रेस की सांसे

जम्मू एवं कश्मीर के मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला ने जोर देकर कहा है कि राज्य में नई प्रशासनिक इकाइयां बनाने को लेकर वह कटिबद्ध हैं। मालूम हो कि कश्मीर में अक्टूबर-नवंबर में विधानसभा चुनाव होने वाले हैं जिसके लिए सीएम उमर 700 प्रस्तावित प्रशासनिक इकाइयों का गठन करनी चाहते हैं जिसके कारण सत्तारूढ़ नेशनल कांफ्रेंस और कांग्रेस के बीच गंभीर मतभेद उभर जाने से स्थगित हो गई।
कांग्रेस के एक दल का कहना है कि उमर मंत्रिमंडल की एक उपसमिति जम्मू और लद्दाख क्षेत्र के साथ भेदभाव कर रही है और कश्मीर घाटी का साथ दे रही है। इस मसले पर ही सोमवार को कांग्रेस महासचिव एवं पार्टी मामलों की प्रदेश प्रभारी अंबिका सोनी, प्रदेशाध्यक्ष सैफुद्दीन सोज, केंद्रीय मंत्री गुलाम नबी आजाद और उमर के बीच एक बैठक हुई लेकिन वह असफल ही रही जिसके बाद चर्चा गर्म है कि सीएम अब्दुल्ला इस्तीफा दे सकते हैं।
उमर ने हालांकि कहा कि वह किसी भी कीमत पर अपने फैसले को लेकर दृढ़ रहेंगे। उन्होंने ट्विटर पर लिखा कि उपसमिति के सदस्यों ने उनसे मुलाकात की और अपनी सिफारिशों को पूरा करने के लिए एक सप्ताह की मोहलत मांगी। उसके बाद सिफारिशों पर मंत्रिमंडल में चर्चा की जाएगी। यह दुर्भाग्यपूर्ण है कि यह काम जून से चल रहा है, लेकिन मैं बिना किसी की परवाह किए जनता की इस मांग को पूरा करने के प्रति बचनबद्ध हूं।"
अगर वाकई में सीएम अब्दुल्ला इस्तीफा देते हैं तो राजनैतिक पंडितों का कहना है कि इस कदम से नेशनल कांग्रेस को तो फायदा होगा लेकिन कांग्रेस के लिए लोकसभा चुनावों में मु्श्किलें पैदा हो जायेंगी।
लेकिन इसमें कोई शक नहीं है कि सीएम अब्दुल्ला के इस धमकी से कांग्रेस के अंदर बुरी तरह से खलबली मच गयी है। राहुल गांधी के बेहद करीबी माने जाने वाले उमर अब्दुल्ला का इस्तीफा आगामी लोकसभा चुनावों में कांग्रेस के लिेए काफी हानिकारक साबित हो सकता है।












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