राहुल की बजाय सोनिया तैयार कांग्रेस की हार की जिम्मेदारी लेने को तैयार

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125 वर्ष पुरानी कांग्रेस पार्टी शायद अब नेतृत्व की कमी का सामना कर रही है और इस बीच एग्जिट पोल के नतीजे कहीं न कहीं कांग्रेस पार्टी के साथ ही साथ राहुल गांधी पर भी सवाल खड़े करते हैं।
एग्जिट पोल को गलत करार देना रणनीति का हिस्सा
राहुल लोकसभा चुनावों के दौरान कांग्रेस की ओर से चुनावी प्रचार का चेहरा बनकर उभरे थे और एग्जिट पोल के नतीजे अगर सही साबित हो गए तो कांग्रेस को इतिहास की सबसे बड़ी हार का सामना करने को मजबूर होना पड़ेगा।
2009 के लोकसभा चुनावों में 206 सीटें हासिल करने वाली कांग्रेस सिर्फ दहाई की संख्या तक ही पहुंचती नजर आ रही है। ऐसे में सभी वरिष्ठ कांग्रेसी नेता एग्जिट पोल को गलत बताकर राहुल और सोनिया गांधी की साख को बचाने में जुट गए हैं।
अभी भी कायम उम्मीदें
वरिष्ठ कांग्रेसी नेता सत्यव्रत चतुर्वेदी का इस मसले में पर कहना है कि चुनावी नतीजे जो भी हों, उसकी जिम्मेदारी पार्टी नेतृत्व और सभी कार्यकर्ताओं की है। चतुर्वेदी के मुताबिक पहले भी जब-जब चुनावों में कांग्रेस को जीत हासिल हुई है तो पार्टी के नेतृत्व और कार्यकर्ताओं को उसका श्रेय दिया गया है।
अब अगर पार्टी को नतीजे उसकी आशा के अनुरूप हासिल नहीं हुए तो भी पार्टी के नेतृत्व और कार्यकर्ताओं की जिम्मेदारी बराबरी होगी। किसी को भी नजरअंदाज किए बिना आगे बढ़ना काफी मुश्किल है।
सोनिया तैयार हार की जिम्मेदारी के लिए !
सत्यव्रत चतुर्वेदी से पहले पार्टी के वरिष्ठ नेता शकील अहमद ने भी कहा था कि पार्टी के नतीजे पूरी पार्टी की जिम्मेदारी होगी। वहीं कांग्रेस प्रवक्ता अभिषेक मनु सिंघवी को भरोसा है कि एग्जिट पोल चसहे जो कहें, 16 मई के बाद कांग्रेस ही केंद्र में सरकार बनाएगी।
सिंघवी के मुताबिक अगर कांग्रेस सरकार बनाती है तो राहुल गांधी देश के प्रधानमंत्री होंगे। सत्यव्रत चतुर्वेदी के मुताबिक यह सच है कि राहुल गांधी ने लोकसभा चुनावों के दौरान प्रचार अभियान की अगुवाई की थी लेकिन पार्टी की मुखिया सोनिया गांधी हैं। वहीं कांग्रेस पार्टी ने बीजेपी के उस बयान से भी पल्ला झाड़ लिया है जिसमें पार्टी प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह की तारीफ की थी।












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