कांग्रेस नेता कर्रा की सफाई, CWC बैठक में सरदार पटेल पर मेरे बयान को गलत तरह पेश किया

नई दिल्ली, 18 अक्टूबर: कांग्रेस कार्यसमिति की बैठक में सरदार पटेल पर दिए अपने बयान को लेकर विवाद के बाद पार्टी नेता तारीक हमीद कर्रा ने सफाई दी है। कश्मीर से आने वाले कर्रा ने कहा कि उन्होंने बैठक में सरदार पटेल के खिलाफ कुछ भी नहीं कहा है। ऐसा लगता है कि कुछ लोग जानबूझकर इसे गलत तरीके से पेश करना चाहते हैं। मैंने बंटवारे के दौरान की चर्चा में जवाहरलाल नेहरू और सरदार पटेल के नाम जरूर लिए लेकिन जो मीडिया में कहा गया, वो कभी नहीं कहा।

 CWC

तारिक अहमद कर्रा ने आज कहा, मैंने आज एक प्रमुख समाचार पत्र में अपने बयान पर पढ़ा, उन्होंने तथ्यों को गलत तरीके से प्रस्तुत किया है। ये भी महत्वपूर्ण बात है कि ये बातें बाहर किसने कहीं। मैं बता दूं कि बैठक में कश्मीर पर चर्चा करते हुए मैंने कहा था कि पंडित नेहरू ने जोर देकर कहा था कि जम्मू-कश्मीर को भारत का हिस्सा बनाया जाए, वह नहीं चाहते थे भारत को भी पाकिस्तान जैसे गैर सेक्युलर राष्ट्र के तौर पर देखा जाए। वहीं सरदार पटेल ने कहा था कि अगर जम्मू-कश्मीर पाक की ओर जाता है तो जूनागढ़ और हैदराबाद के संबंध में बातचीत हो सकती है। लेकिन नेहरू नहीं माने और कहा कि हम नहीं चाहते कि भारत को एक धार्मिक देश के रूप में लेबल किया जाए क्योंकि पाकिस्तान को लेबल किया गया है। मैंने यह बात बैठक में देश के बंटवारे और 'टू नेशन' थ्योरी पर एक चर्चा के दौरान कही थी। ये समझ ये परे है कि मैंने इसमें क्या गलत कहा।

भाजपा ने लगाए आरोप

कांग्रेस कार्यसमिति की 16 अक्टूबर को हुई बैठक को लेकर मीडिया में छपी एक रिपोर्ट में कहा गया है कि बैठक में कर्रा ने कहा कि सरदार पटेल कश्मीर को पाकिस्तान को देने के हिमायती थी। नेहरू के कारण ही कश्मीर आज भारत का हिस्सा है। इस पर भारतीय जनता पार्टी ने कांग्रेस को निशाने पर लेते हुए कहा है ये सरदार पटेल को बदनाम करने की कोशिश है। बीजेपी प्रवक्ता संबित पात्रा ने आज मीडिया रिपोर्ट के हवाला देते हुए बताया कि कांग्रेस कार्यसमिति की बैठक में पार्टी नेता तारीक हमीद कर्रा ने कहा था कि इस पूरे प्रयोजन में सरदार पटेल जिन्ना के साथ मिले हुए थे। कारा ने कहा कि जिन्ना के साथ मिलकर सरदार पटेल कश्मीर को हिंदुस्तान से अलग रखने की चेष्टा कर रहे थे।

पात्रा ने कहा कि जब पटेल को इस तरह से बदनाम किया जा रहा है तो क्या कांग्रेस पार्टी की अध्यक्ष सोनिया गांधी और राहुल गांधी इस पर आपत्ति जताई। क्या ये प्रश्न सोनिया गांधी और राहुल गांधी की तरफ से उठा कि इस प्रकार से कारा साहब को नहीं कहना चाहिए था। हम यह जानना चाहते हैं कि इस पर कांग्रेस के आलाकमान का क्या रुख है।

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