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'असम समझौता 2026 के चुनावों के लिए राजनीतिक चाल', कांग्रेस नेता रिपुन बोरा का CM बिस्वा पर तंज

असम समझौते को लेकर हाल ही में असम के मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा के कदमों पर कांग्रेस नेता रिपुन बोरा ने आलोचना करते हुए इसे 2026 के विधानसभा चुनावों के लिए राजनीतिक रणनीति बताया है। बोरा, जो पूर्व सांसद भी रह चुके हैं, ने आरोप लगाया कि मुख्यमंत्री का असम समझौते पर ध्यान केवल आगामी चुनावों में वोट बटोरने का प्रयास है, न कि समझौते को सही मायनों में लागू करने का।

असम समझौता 1985 में हस्ताक्षरित हुआ था, जो राज्य की स्वदेशी आबादी के हितों की रक्षा के लिए किया गया था। इसमें खंड 6 विशेष रूप से असम की भाषा, संस्कृति, और भूमि की सुरक्षा को सुनिश्चित करने के लिए प्रावधान करता है। हाल ही में, राज्य सरकार ने न्यायमूर्ति बिप्लब कुमार सरमा की समिति की सिफारिशों को लागू करने की बात कही है, लेकिन रिपुन बोरा का आरोप है कि ये सिफारिशें अभी तक केंद्र सरकार को नहीं भेजी गई हैं।

ripun bora

कांग्रेस का आरोप: राजनीतिक चाल?
रिपुन बोरा ने अपनी प्रेस कॉन्फ्रेंस में कहा कि असम समझौते के खंड 6 को लागू करने में राज्य सरकार और भाजपा सरकार की नीयत पर संदेह किया जाना चाहिए। उनका मानना है कि यह कदम केवल राज्य स्तर पर सुझावों पर ध्यान केंद्रित करता है, जिससे असम समझौते के सभी पहलुओं को सही से लागू करने की प्रतिबद्धता नहीं दिखती। कांग्रेस, जो इस समझौते पर मूल रूप से हस्ताक्षरकर्ता थी, का कहना है कि वर्तमान सरकार के प्रयास अपर्याप्त हैं और सिर्फ राजनीतिक तुष्टिकरण का हिस्सा हैं।

न्यायमूर्ति बिप्लब सरमा समिति
असम समझौते के खंड 6 को लागू करने के लिए केंद्र सरकार ने 2020 में न्यायमूर्ति सेवानिवृत्त बिप्लब कुमार सरमा के नेतृत्व में एक उच्च स्तरीय समिति*(HLC) का गठन किया था। इस समिति ने अपनी रिपोर्ट तत्कालीन मुख्यमंत्री सर्बानंद सोनोवाल को सौंपी थी, ताकि इस पर आगे की कार्रवाई हो सके। हालांकि, कांग्रेस नेता बोरा का दावा है कि अभी तक केंद्र द्वारा इस पर कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया है।

हालिया कैबिनेट निर्णय
4 सितंबर को, मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा ने घोषणा की कि असम कैबिनेट ने खंड 6 की समिति की 67 सिफारिशों में से 57 को लागू करने का निर्णय लिया है। इन सिफारिशों में असम की स्वदेशी भूमि, भाषा और संस्कृति की सुरक्षा से जुड़े कई उपाय शामिल हैं। यह घोषणा एक ऐसे समय में आई है जब 2026 के चुनावों की तैयारी शुरू हो चुकी है, और विपक्ष ने इसे चुनावी राजनीति करार दिया है।

असम समझौते का ऐतिहासिक सार
असम समझौते पर 1985 में हस्ताक्षर हुए थे, जो राज्य के विदेशी विरोधी आंदोलन के बाद आया था। इसमें एक प्रमुख प्रावधान यह है कि 25 मार्च 1971 के बाद असम में प्रवेश करने वाले विदेशियों की पहचान की जाएगी, उन्हें मतदाता सूची से हटाया जाएगा, और उनके निर्वासन की प्रक्रिया शुरू की जाएगी। यह असम की स्वदेशी पहचान और संसाधनों की रक्षा करने के उद्देश्य से किया गया था, जो राज्य की राजनीति में आज भी एक अहम मुद्दा बना हुआ है। कांग्रेस नेता रिपुन बोरा की यह आलोचना कि असम समझौते पर मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा का ध्यान 2026 के चुनावों की राजनीतिक रणनीति है, ने राज्य की राजनीति में एक नई बहस छेड़ दी है।

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