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संविधान को अपनाने की 75वीं वर्षगांठ पर बोले कांग्रेस नेता जयराम रमेश, कहा-'RSS के मुखपत्र ने इसकी आलोचना की'

कांग्रेस नेता जयराम रमेश ने संविधान सभा में डॉ. बीआर अंबेडकर के ऐतिहासिक भाषण को याद करते हुए संविधान निर्माण प्रक्रिया में कांग्रेस पार्टी की महत्वपूर्ण भूमिका को रेखांकित किया। 25 नवंबर को रमेश ने 1948 में अंबेडकर द्वारा दिए गए भाषण की 75वीं वर्षगांठ पर उनके बयानों को साझा किया। जिसमें अंबेडकर ने संविधान के मसौदे को अपनाने और कांग्रेस के योगदान की प्रशंसा की थी।

अंबेडकर का कांग्रेस के प्रति सम्मान

डॉ. अंबेडकर ने अपने भाषण में कांग्रेस पार्टी की सराहना करते हुए कहा था कि उसकी अनुशासनात्मक भूमिका के कारण ही संविधान सभा में कार्य व्यवस्थित और कुशलतापूर्वक संपन्न हो सका। उन्होंने कहा कि यदि कांग्रेस का अनुशासन न होता तो संविधान सभा में अराजकता फैल सकती थी।

jairam ramesh

अंबेडकर ने मसौदा संविधान को सुचारू रूप से पारित करने में कांग्रेस के योगदान को महत्वपूर्ण बताया और इसे एक ऐसा संरचित वातावरण प्रदान करने का श्रेय दिया जिसने प्रत्येक अनुच्छेद और संशोधन पर सूचित निर्णय लेने की प्रक्रिया को सक्षम बनाया।

आरएसएस और ऑर्गनाइजर का विरोध

कांग्रेस नेता जयराम रमेश ने अंबेडकर के भाषण को याद करते हुए आरएसएस के मुखपत्र ऑर्गनाइजर द्वारा संविधान की आलोचना पर भी प्रकाश डाला। उन्होंने बताया कि 30 नवंबर 1949 को ऑर्गनाइजर ने संविधान को मनुस्मृति से प्रेरणा नहीं लेने के लिए आलोचना की थी। रमेश ने यह भी कहा कि 11 जनवरी 1950 को जब भारत गणराज्य बनने के लिए तैयार था। ऑर्गनाइजर ने डॉ. अंबेडकर की भी आलोचना की थी। यह नजरिया आरएसएस की उस समय की संविधान विरोधी स्थिति को दर्शाता है।

संविधान को अपनाने के 75 वर्ष का उत्सव

भारत सरकार ने घोषणा की है कि 26 नवंबर को भारत के संविधान को अपनाने की 75वीं वर्षगांठ पर एक विशेष समारोह आयोजित किया जाएगा। यह आयोजन संविधान भवन में होगा। इस ऐतिहासिक कार्यक्रम में राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू के साथ उपराष्ट्रपति जगदीप धनखड़, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और लोकसभा अध्यक्ष ओम बिड़ला भी शामिल होंगे।

इस अवसर पर संविधान के निर्माण में अंबेडकर की दृष्टि और कांग्रेस पार्टी की भूमिका को रेखांकित किया जाएगा। यह उत्सव न केवल भारत के संविधान की ताकत को प्रदर्शित करेगा। बल्कि उन संघर्षों और विचारों को भी याद करेगा। जिन्होंने भारत को एक लोकतांत्रिक गणराज्य बनाया।

संविधान को अपनाने की इस वर्षगांठ ने एक बार फिर उस ऐतिहासिक योगदान को उजागर किया है। जिसने भारत को दुनिया के सबसे बड़े लोकतंत्र के रूप में स्थापित किया।

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