Chandrayaan 3 Launch: कांग्रेस ने इसरो वैज्ञानिकों को बधाई दी, पूर्व प्रधानमंत्रियों का जिक्र क्यों?
Chandrayaan 3 Launch: इसरो ने आंध्र प्रदेश के श्रीहरिकोटा से चंद्रयान तीन का सफल प्रक्षेपण किया। सतीश धवन अंतरिक्ष केंद्र से तीसरा मून मिशन लॉन्च किया गया। कांग्रेस ने इसरो वैज्ञानिकों को बधाई दी। साथ में पूर्व प्रधानमंत्रियों को भी याद किया।
कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे ने शुक्रवार को वैज्ञानिकों, इंजीनियरों और चंद्रयान 3 मिशन के प्रक्षेपण में शामिल पूरी टीम की सराहना की। उन्होंने ट्विटर पर लिखा, ''हमारी सामूहिक खुशी सातवें आसमान पर है!!''

खड़गे ने कहा, हमारे वैज्ञानिकों, इंजीनियरों और #चंद्रयान3 मिशन के सफल प्रक्षेपण में शामिल सभी लोगों की जबरदस्त प्रतिभा, समर्पण, कौशल और कड़ी मेहनत को धन्यवाद।''
कांग्रेस चीफ ने कहा, "इस उल्लेखनीय उपलब्धि के लिए हमें आपमें से प्रत्येक पर बेहद गर्व है। कांग्रेस पार्टी की ओर से, हम @Isro की असाधारण टीम के प्रति अपनी हार्दिक कृतज्ञता व्यक्त करते हैं।"
चंद्रयान-1 और 2 की उपलब्धियों के बारे में आगे ट्वीट करते हुए खड़गे ने कहा, "भारत का चंद्र मिशन 2008 में चंद्रयान-1 के साथ शुरू हुआ, जिसने चंद्रमा पर पानी के अणुओं की मौजूदगी की पुष्टि की! यह हमारे देश की एक ऐतिहासिक उपलब्धि थी!"
बकौल खड़गे, "...चंद्रयान-2 ने रिमोट सेंसिंग के माध्यम से पहली बार क्रोमियम, मैंगनीज और सोडियम की उपस्थिति का भी पता लगाया। हमारे वैज्ञानिकों की दृढ़ता व्यर्थ नहीं गई।"
नेहरू से लोकर डॉ मनमोहन सिंह तक का जिक्र
देश के पूर्व प्रधानमंत्रियों का जिक्र करते हुए खड़गे ने कहा, चंद्रयान -3 पंडित नेहरू, लाल बहादुर शास्त्री, इंदिरा गांधी , पीवी नरसिम्हा राव, राजीव गांधी, अटल बिहारी वाजपेयी और डॉ. मनमोहन सिंह सहित हमारे सभी पूर्व प्रधानमंत्रियों की दूरदर्शिता, दृढ़ संकल्प का प्रमाण है।
खड़गे की टिप्पणी उस दिन आई है जब भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (इसरो) ने श्रीहरिकोटा के सतीश धवन अंतरिक्ष केंद्र से तीसरा चंद्र अंतरिक्ष यान लॉन्च किया गया, खास बात ये कि इसमें पीएम मोदी के कार्यकाल का जिक्र नहीं किया गया।
चंद्रयान-3 अंतरिक्ष यान ले जाने वाला लॉन्च व्हीकल मार्क-3, जिसे पहले जियोसिंक्रोनस सैटेलाइट लॉन्च व्हीकल एमके-III के नाम से जाना जाता था, शुक्रवार को दोपहर 2:35 बजे के आसपास लॉन्च किया गया ।
चंद्रयान-3, चंद्रयान-2 की विफलता के करीब चार साल बाद शुरू किया गया महत्वाकांक्षी मिशन है। इसका मकसद चंद्रमा की सतह पर सुरक्षित लैंडिंग और घूमने की क्षमता का प्रदर्शन करना है। लैंडर अपनी गतिशीलता के दौरान चंद्रमा की सतह का इन-सीटू रासायनिक विश्लेषण करेगा।












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