कौन हैं इंदुराज नरवाल, जिन्होंने भाजपा प्रत्याशी पहलवान योगेश्वर दत्त को दी पटखनी
नई दिल्ली। हरियाणा की बरोदा विधानसभा सीट पर हुए उप-चुनाव में बीजेपी को शिकस्त खानी पड़ी है। बीजेपी के उम्मीदवार ओलंपिक पदक विजेता पहलवान योगेश्वर दत्त यहां से कांग्रेस प्रत्याशी इंदुराज नरवाल के सामने हार गए हैं। बरोदा विधानसभा सीट अप्रैल महीने में कांग्रेस विधायक श्रीकृष्ण हुड्डा के निधन की वजह से खाली हुई थी। इंदुराज सोनीपत जिला परिषद के पूर्व सदस्य रह चुके हैं। किसान परिवार से ताल्लुक रखने वाले इंदुराज लंबे समय से कांग्रेस से जुड़े हुए हैं।

भूपेंद्र हुड्डा की पहली पसंद कपूर नरवाल थे
यह उपचुनाव पूर्व मुख्यमंत्री भूपेंद्र सिंह हुड्डा के लिए प्रतिष्ठा की लड़ाई बन गई थी, क्योंकि जाट बहुल यह सीट, रोहतक जिले की गढ़ी सांपला किलोई सीट के पड़ोस में है जहां से वह स्वयं विधायक हैं। यह उपचुनाव इंडियन नेशनल लोकदल के लिए भी अहम था, क्योंकि पार्टी 2019 के विधानसभा चुनाव में 90 में से एक सीट जीत पाई थी। बता दें कि टिकट वितरण में पूर्व मुख्यमंत्री भूपेंद्र हुड्डा की पहली पसंद कपूर नरवाल थे।

2009 से लगातार कांग्रेस रही है बरोदा
वहीं कुमारी सैलजा और सुरजेवाला श्रीकृष्ण हुड्डा के परिवार को टिकट देने के पक्ष में थे। नेतृत्व ने दोनों गुटों को दरकिनार करते हुए इंदु राज नरवाल को टिकट दी। इंदु राज ने अपने नेतृत्व को निराश नहीं किया। इंदु राज नरवाल ने भाजपा ने योगेश्वर दत्त को पटखनी दी। बरोदा हलका जहां पहले इनेलो का गढ़ होता था, वहीं वर्ष 2009 से लगातार कांग्रेस ने कब्जा जमाया हुआ है। बरोदा को पूर्व सीएम भूपेंद्र हुड्डा का गढ़ माना जाता है और बरोदा से अभी तक कांग्रेस के श्रीकृष्ण हुड्डा विधायक थे।

इंदुराज की ये जीत हरियाणा में सत्ता परिवर्तन की शुरुआत करेगी: हुड्डा
रोहतक में प्रेस कॉन्फ्रेंस को संबोधित करते हुए भूपेंद्र सिंह हुड्डा ने कहा कि चुनाव से पहले उन्होंने मुख्यमंत्री को बरोदा से चुनाव लड़ने का न्यौता दिया था। लेकिन तब मुख्यमंत्री ने ख़ुद चुनाव लड़ने से इंकार कर दिया था। उन्होंने कहा था कि यहां से बीजेपी का साधारण कार्यकर्ता भी चुनाव जीत जाएगा। इसलिए मुख्यमंत्री को अब बताना चाहिए कि किस पार्टी का साधारण कार्यकर्ता चुनाव जीता है? हुड्डा ने कहा कि साधारण किसान परिवार के इंदुराज नरवाल की जीत प्रदेश की राजनीति में बहुत मायने रखती है। इससे लोगों में भरोसा जगा है कि साधारण परिवार के बच्चे भी राजनीति में आ सकते हैं और इतनी बड़ी जीत दर्ज़ कर सकते हैं। इंदुराज की ये जीत हरियाणा में सत्ता परिवर्तन की शुरुआत करेगी।












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