'हेमा समिति की रिपोर्ट के आधार पर करें कार्रवाई', कांग्रेस की केरल सरकार से डिमांड
कांग्रेस पार्टी ने केरल सरकार से हेमा समिति की रिपोर्ट के आधार पर निर्णायक कार्रवाई करने का आग्रह किया है, जिसमें मलयालम फिल्म उद्योग में महिलाओं के खिलाफ अत्याचारों के बारे में बताया गया है।
केपीसीसी अध्यक्ष के सुधाकरन ने कहा कि अगर कांग्रेस 2026 में सत्ता में आती है, तो वे सुनिश्चित करेंगे कि जिम्मेदार लोगों के खिलाफ सख्त कदम उठाए जाएं। उन्होंने रिपोर्ट के निष्कर्षों को संबोधित करने में लंबे समय तक देरी की आलोचना की।

सुधाकरन ने फेसबुक पोस्ट के माध्यम से अपनी नाराजगी व्यक्त की, जिसमें उन्होंने जोर देकर कहा कि रिपोर्ट को वर्षों तक लंबित रखने का निर्णय अस्वीकार्य है। उन्होंने दोहराया, "कांग्रेस हेमा समिति की रिपोर्ट पर सख्त अनुवर्ती कार्रवाई की मांग करती है।"
रिपोर्ट में उद्योग में महिलाओं और नाबालिगों के खिलाफ विभिन्न प्रकार के दुर्व्यवहार के गंभीर आरोप हैं।
रिपोर्ट जारी करने पर विपक्ष का रुख
विपक्ष के नेता वीडी सतीशन ने दावा किया कि न्यायमूर्ति हेमा ने कभी भी राज्य सरकार को रिपोर्ट रोकने का निर्देश नहीं दिया। उन्होंने सरकार पर रिपोर्ट जारी न करके अपराधियों को बचाने का आरोप लगाया।
सतीशन ने कहा, "हेमा समिति ने सरकार से कभी भी रिपोर्ट जारी न करने के लिए नहीं कहा, बल्कि ऐसा करते समय सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों का पालन करने के लिए कहा।"
सतीशन ने आगे आरोप लगाया कि शिकायत मिलने पर ही मामले दर्ज करने का सरकार का रुख दोषपूर्ण है। उन्होंने प्रस्तावित सिनेमा सम्मेलन की आलोचना करते हुए कहा कि इससे आरोपी व्यक्तियों को पीड़ितों के साथ भाग लेने की अनुमति मिल जाएगी, जिससे नारीत्व का अपमान होगा।
सरकार की प्रतिक्रिया और कार्रवाई
राज्य के वित्त मंत्री केएन बालगोपाल ने नई दिल्ली में मीडिया को संबोधित करते हुए कहा कि बयान दर्ज करने और रिपोर्ट प्रस्तुत करने के दौरान कानूनी पहलुओं पर विचार किया गया।
बालगोपाल ने कहा, "हमारे पास शिकायत दर्ज किए बिना भी मौजूदा कानूनों के आधार पर मामले दर्ज करने के प्रावधान हैं।" उन्होंने इस बात पर प्रकाश डाला कि इस रिपोर्ट में महिला कलाकारों की शिकायतों से अतिरिक्त जानकारी शामिल है।
मुख्यमंत्री पिनाराई विजयन ने उन दावों का खंडन किया कि उनके प्रशासन ने न्यायमूर्ति हेमा समिति की रिपोर्ट पर कार्रवाई में चार साल से अधिक समय तक देरी की। उन्होंने जोर देकर कहा कि उनकी सरकार ने पैनल की सिफारिशों को लागू करने को प्राथमिकता दी और पीड़ितों को निरंतर सहायता का आश्वासन दिया। विजयन ने उल्लेख किया कि जब भी फिल्म उद्योग से संबंधित शिकायतें प्राप्त हुईं, पुलिस ने कार्रवाई की।
राजनीतिक प्रतिक्रियाएं और आरोप
विपक्षी यूडीएफ ने मुख्यमंत्री विजयन के इस दावे को झूठ और पाखंड करार देते हुए खारिज कर दिया कि न्यायमूर्ति हेमा ने विशेषज्ञ पैनल के निष्कर्षों का खुलासा न करने का अनुरोध किया था। उन्होंने इस संवेदनशील मुद्दे के संबंध में सरकार से पारदर्शिता और जवाबदेही की मांग करते हुए अपना रुख बरकरार रखा।
न्यायमूर्ति हेमा समिति के निष्कर्षों ने केरल में महत्वपूर्ण राजनीतिक बहस छेड़ दी है, जिसमें सिनेमा में महिला पेशेवरों द्वारा सामना किए जाने वाले उत्पीड़न और शोषण के गंभीर मामलों का खुलासा किया गया है। विवाद जारी है क्योंकि विभिन्न राजनीतिक गुट इन खुलासों के आधार पर तत्काल और सख्त कार्रवाई की मांग कर रहे हैं।
इस मुद्दे पर चल रही चर्चाएं उद्योगों के भीतर प्रणालीगत बदलावों की व्यापक आवश्यकता पर प्रकाश डालती हैं, ताकि कमजोर समूहों को दुर्व्यवहार से बचाया जा सके और यह सुनिश्चित किया जा सके कि न्याय शीघ्रतापूर्वक और प्रभावी रूप से प्रदान किया जाए।












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